बॉलीवुड में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जो एक ही किरदार से पहचान बना लेते हैं. लेकिन राज मयूर वर्मा की कहानी इससे बिल्कुल अलग है. उन्होंने बाल कलाकार के रूप में फिल्मी दुनिया में कदम रखा और 'यंग अमिताभ बच्चन' के नाम से मशहूर हुए. वो अपने समय के सबसे ज्यादा फीस पाने वाले चाइल्ड आर्टिस्ट में शामिल थे. बाद में उन्होंने टीवी की दुनिया में काम किया, 'महाभारत' में अभिमन्यु का किरदार निभाया और अमिताभ बच्चन के टीवी एशिया से भी जुड़े. आज वो ब्रिटेन में कई रेस्टोरेंट चलाने वाले सक्सेसफुल बिजनेसमैन हैं.
'यंग अमिताभ बच्चन' बनकर मिली पहचान
राज मयूर वर्मा की मां स्नेह लता वर्मा थिएटर से जुड़ी थीं. उन्होंने ही राज को एक्टिंग की दुनिया में आगे बढ़ाया. राज ने तीन साल की उम्र में स्टेज पर काम करना शुरू कर दिया था. पांच साल की उम्र में उन्होंने टीवी पर डेब्यू किया. साल 1978 में राज ने फिल्म 'मुकद्दर का सिकंदर' से बॉलीवुड में कदम रखा. इसके बाद उन्होंने 'लावारिस' और 'बेमिसाल' जैसी फिल्मों में अमिताभ बच्चन के बचपन का किरदार निभाया. फिल्म 'रेड रोज' में उन्होंने राजेश खन्ना के युवा किरदार को भी निभाया.

राज के लिए 'रेड रोज' बेहद खास फिल्म रही. इससे उन्हें कई पुरस्कार मिले और यह साबित हुआ कि वह सिर्फ अमिताभ बच्चन की तरह दिखने वाले कलाकार नहीं, बल्कि एक अच्छे एक्टर भी हैं. बाद में उन्होंने 'लव इन गोवा' में लीड एक्टर के तौर पर काम किया, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं रही.
अमिताभ बच्चन की सलाह से बदली जिंदगी
एक समय ऐसा आया जब राज न तो कलाकारों के छोटे किरदार निभाने की उम्र में थे और न ही बड़े किरदारों के लिए तैयार थे. इसी दौरान उनकी मां ने अमिताभ बच्चन से सलाह ली. अमिताभ ने उन्हें फिल्म निर्देशकों के साथ काम करने की सलाह दी. इसके बाद राज ने प्रकाश मेहरा के साथ 'नमक हलाल' में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया. शुरुआत में यह बदलाव उनके लिए मुश्किल था, लेकिन धीरे-धीरे उन्हें निर्देशन और प्रोडक्शन का काम पसंद आने लगा.
बाद में उन्होंने 'वैरायटी' नाम का वीडियो मैगजीन शो बनाया. इस शो को लॉन्च करने के लिए उन्होंने अमिताभ बच्चन को साथ लाने का वादा किया. काफी कोशिशों के बाद वह इसमें सफल भी हुए. आगे चलकर उन्होंने टीवी एशिया के साथ काम किया और कई टीवी कार्यक्रमों का हिस्सा बने.
शोहरत छोड़कर वेल्स में बस गए
साल 2007 के आसपास राज ने मुंबई और लंदन की चमक-दमक से दूर रहने का फैसला किया. वह अपनी पत्नी नूरी, मां और बच्चों के साथ वेल्स चले गए. उनका कहना था कि वह अपने बच्चों को एक सामान्य और शांत जिंदगी देना चाहते थे. वह नहीं चाहते थे कि उनके बच्चे उन्हें किसी बहुत बड़े स्टार की तरह देखें. वेल्स में राज और नूरी ने मिलकर 'इंडियाना कुजीन' नाम का भारतीय रेस्टोरेंट शुरू किया. यह नूरी के शेफ बनने के सपने को पूरा करने की कोशिश थी. यह रेस्टोरेंट दो दशक से ज्यादा समय से चल रहा है. इसके अलावा दोनों 'चस्का' नाम का रेस्टोरेंट और एबर्गिनोलविन में एक कैफे भी चलाते हैं.
राज ने पढ़ाई पूरी नहीं की, लेकिन उन्हें इसका कोई अफसोस नहीं है. उनका मानना है कि समझदारी और मेहनत के दम पर इंसान कारोबार में सफल हो सकता है. बाल कलाकार से अभिनेता, टीवी होस्ट, निर्देशक और फिर कारोबारी बनने तक राज मयूर वर्मा की जिंदगी कई अलग-अलग पड़ावों से गुजरी है. आज वह कैमरे से दूर अपनी जिंदगी में खुश हैं.
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