बॉलीवुड सिनेमा में 58 साल पहले एक ऐसा गाना आया जिसको सुनते ही कानों में ट्रेन की छुक-छुक सुनाई देने लगती है. 1968 में आई हृषिकेश मुखर्जी की फिल्म आशीर्वाद उन फिल्मों मे से एक है, जिसकी कहानी के साथ-साथ इसके गानों ने भी अपनी अलग पहचान बनाई. अशोक कुमार जो अपने करियर के एक वर्सेटाइल गायक थे. उन्होंने अपने करियर में ऐसे गाने बनाए जो सालों बाद भी लोगों को याद रहते हैं. लेकिन आज हम बात करेंगे उनके एक ऐसे गाने की जो आज से 58 साल पहले उस दौर के रैप के तौर पर आया था. अशोक कुमार के इस गाने को हिंदी फिल्मों के शुरुआती रैप-जैसे गीतों में गिना जाता है. आइए जानते हैं, इस गाने के बारे में.
1968 में बना था रैप जैसा अंदाज
आज के समय में बादशाह, हनी सिंह ने अपने रैप से लोगों को दीवाना बना रखा है. लेकिन आपको बता दें कि साल 1968 में आई फिल्म आर्शीवाद का एक गाना ऐसा है, जिसे अशोक कुमार ने अपनी आवाज से खास बनाया. ये गाना था रेल गाड़ी, जिसे इस तरह से बनाया गया कि वो आज भी याद है. इस गाने के साथ उस समय पर काफी अलग प्रयोग था. अशोक कुमार ने इसे नॉर्मल गाने से हटकर तेज रफ्तार में बोलते हुए गाया था और इसे एक एक्ट के तौर पर पेश किया गया था. इसी वजह से इसे भारतीय सिनेमा के शुरुआती रैप-जैसे गीतों में गिना जाता है. गाने में 'छुक-छुक', 'रुक-रुक' और कुल 28 स्टेशनों के नामों ने इस गाने को और भी खास बनाया.
14 जोड़ियों में आए 28 स्टेशनों के नाम
इस गाने का सबसे दिलचस्प हिस्सा है वो रेलगाड़ी का सफर, जिसे बच्चों के साथ फिल्माया गया. इस गाने में बच्चे रेलगाड़ी वाला गेम खेलते हैं. जिसमें कोई इंजन, कोई डिब्बा तो कोई पैसेंजर बनता है. इस गाने के बोल में कुल 28 स्टेशनों के नाम लिए गए. इस गाने को हरिंद्रनाथ चट्टोपाध्याय ने लिखा था और इसका संगीत वसंत देसाई ने तैयार किया था. गाने के बोल इस तरह से हैं-
रेल गाड़ी, रेल गाड़ी
छुक छुक छुक छुक छुक छुक
बीच वाले स्टेशन बोले
रूक रूक रूक रूक रूक रूक
धरमपुर-ब्रह्मपुर, ब्रह्मपुर-धरमपुर
मंगलौर-बैंगलोर, बैंगलोर-मंगलौर
मांडवा-खांडवा, खांडवा-मांडवा
रायपुर-जयपुर, जयपुर-रायपुर
तालेगाँव-मालेगाँव, मालेगाँव-तालेगाँव
नेल्लूर-वेल्लूर, वेल्लूर-नेल्लूर
शोलापुर-कोल्हापुर, कोल्हापुर-शोलापुर
कुक्कल-डिंडिगल, डिंडिगल-कुक्कल
मछलीपट्नम-भीमनीपटनम
भीमनीपटनम-मछलीपट्नम
ओंगोल-नारगोल, नारगोल-ओंगोल
कोरेगाँव-गोरेगाँव, गोरेगाँव-कोरेगाँव
अहमदाबाद-महमदाबाद
महमदाबाद-अहमदाबाद
शोतपुर-जोधपुर, जोधपुर-शोतपुर
छुक छुक छुक छुक छुक..
बीच वाले स्टेशन बोले
रूक रूक रूक रूक रूक रूक
तड़क-भड़क, लोहे की सड़क
धड़क-धड़क, लोहे की सड़क
यहाँ से वहाँ, वहाँ से यहाँ
यहाँ से वहाँ, वहाँ से वहाँ
छुक छुक छुक छुक छुक..
मजेदार बात यह है कि गाने में सिर्फ नाम गिना नहीं दिए गए. लगभग हर जोड़ी को उलटकर भी बोला गया है. यही तरीका गाने को तेज रफ्तार और रैप जैसा एहसास देता है. अशोक कुमार ने अपनी अलग आवाज और बोलने के अंदाज से इस गाने को पेश किया, जिसने इसको एक अलग पहचान दिलाई.
अशोक कुमार को मिला था अवॉर्ड
बात करें फिल्म आर्शीवाद की तो इसे हृषिकेश मुखर्जी ने डायरेक्ट किया था. फिल्म में अशोक कुमार के साथ संजीव कुमार, सुमिता सान्याल और वीणा जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म की कहानी एक पिता और उसकी बेटी के रिश्ते के इर्द-गिर्द घूमती है. इस फिल्म में अशोक कुमार की एक्टिंग को भी खूब पसंद किया गया था और इसके लिए उनको अवॉर्ड भी मिला था.
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