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Oh My Dog Review: सिर्फ फिल्म नहीं, इंसान और कुत्ते के रिश्ते की भावुक कहानी है ओह माय डॉग

"ओह माय डॉग" इंसान और जानवरों के बीच के अनूठे और खूबसूरत रिश्ते पर बनी एक बेहद प्यारी और पारिवारिक फिल्म है. यह फिल्म करुणा, दया और उस रिश्ते की बात करती है.

Oh My Dog Review: सिर्फ फिल्म नहीं, इंसान और कुत्ते के रिश्ते की भावुक कहानी है ओह माय डॉग
"ओह माय डॉग" - फिल्म समीक्षा
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"ओह माय डॉग" इंसान और जानवरों के बीच के अनूठे और खूबसूरत रिश्ते पर बनी एक बेहद प्यारी और पारिवारिक फिल्म है. यह फिल्म करुणा, दया और उस रिश्ते की बात करती है, जिसमें शब्दों की ज़रूरत नहीं है, बल्कि ज़रूरत है भावनाओं की जो एक इंसान और जानवर के बीच होती है और इस फिल्म की बात करें तो वो है डॉग. हिंदी सिनेमा में डॉग्स के इर्द-गिर्द घूमती कहानियां कम ही हैं, जिनमें ‘तेरी मेहरबानियां', ‘एंटरटेनमेंट' और ‘777 चार्ली' जैसी फिल्में ही याद आती हैं और ‘ओह माय डॉग' इस फेहरिस्त को आगे बढ़ाती है. फिल्म में बैकग्राउंड स्कोर मंगेश धड़के का है और गानों को संगीत अमन पंत ने दिया है. सिनेमेटोग्राफी माटे हरबाई की है, जो कि हंगेरियन हैं, वहीं फिल्म के एडिटर सुबीर नाथ हैं.

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कहानी
फिल्म की कहानी दो अलग शहरों में समांतर रूप से चलती है, जहां एक परिवार अपने डॉग को अपने बच्चे की तरह मानता है और दूसरी तरफ एक मज़दूर लड़का है, जो गरीबी में भी अपने डॉग के साथ अपना हर एक पल गुज़ारता है. फिर एक दिन कुछ ऐसा होता है कि एक शहर में जहां एक डॉग गुम हो जाता है, वहीं दूसरी ओर डॉग का मालिक गुम हो जाता है. जहां एक तरफ डॉग के गायब होने से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ता है, वहीं दूसरी ओर कहानी में डॉग बेचैन हो अपने मालिक को ढूंढने में दिन-रात एक कर देता है. कहानी सिर्फ इतनी नहीं है, ये सिर्फ एक झलक है और बाकी कहानी जानने के लिए दर्शकों को फिल्म देखनी पड़ेगी.

ख़ामियां
1. फिल्म कहीं-कहीं थोड़ी धीमी लग सकती है, मसलन चेज़ सीक्वेंस यानी स्क्रीनप्ले यहाँ थोड़ा कसा जा सकता था.
2. भारतीय दर्शक ड्रामा पर जीते हैं और मुझे लगता है कि फिल्म की टेकिंग से ड्रामा और बेहतर रचा जा सकता था.
3. कुछ कलाकार अभिनय में थोड़ा लाउड नज़र आए जो फिल्म की ज़मीन से थोड़ा अलग नज़र आते हैं .

4. जैसा मैं कहा की इस तरह की फिल्में कम ही नज़र आयीं है और वजह कई बार इन्वेस्टमेंट या प्रोडूसर भी होते है, निर्माताओं को इस फिल्म का साथ देने के लिए शाबाशी है पर थोड़ा फिल्म पर और ध्यान देते तो इसकी प्रोडक्शन क्वालिटी और भी निखर कर आती .

खूबियां
1. निर्देशक अमित राय की लिखाई कमाल की है. इस फिल्म से जो दुनिया उन्होंने रची है, वह हिंदी सिनेमा में काफी वक्त से देखने को नहीं मिली और फिल्म देखकर यह अहसास होता है कि आज भी कुछ फिल्मकार चकाचौंध से दूर अपने मन की बात सुन रहे हैं.
2. जानवरों के साथ फिल्म बनाना आसान नहीं है और इस फिल्म के लिए दोनों डॉग्स के ट्रेनर और निर्देशक अमित राय की तारीफ बनती है.
3. यह फिल्म जानवरों और इंसान के रिश्ते के बारे में तो बात करती ही है, साथ में चुपके से और भी संदेश दे जाती है, जैसे गरीबी इंसान पर किस कदर हावी हो जाती है और ज़िंदगी के मायने क्या हैं. मैं स्पॉइलर नहीं देना चाहता, पर एक सीन में एक बाप को सिर्फ इस बात की ख़ुशी है कि उसका बेटा ज़िंदा रहेगा, बाकी उसके शरीर के साथ क्या हुआ, उससे वह इतना विचलित नहीं है.
4. फिल्म में जो डॉग ऑस्कर का किरदार निभा रहा है, उसका एक पैर ख़राब है और बतौर निर्देशक अमित राय की इस डॉग को चुनने के लिए तारीफ करनी पड़ेगी, क्योंकि इस डॉग के मालिक के साथ इसकी भी लाचारी नज़र आती है. साथ ही, पहले दृश्य में ही आपका दिल इसके प्रति दया से भर जाता है.
5. फिल्म इंसान और जानवर दोनों की ही तस्करी की बात करती है और बहुत ख़ूबसूरती से निर्देशक और लेखक अमित राय ने दो डॉग्स की कहानियों को समांतर रेखाओं में दर्शाकर ना सिर्फ एक बेहतरीन संदेश दिया है, बल्कि स्क्रीनप्ले के तौर पर भी यह काबिले तारीफ है.
6. पंकज त्रिपाठी, माही राय, गीता अग्रवाल, सुलखना बरुआ, पवन मल्होत्रा, बुल्लू कुमार और राजेश शर्मा अभिनय में अपनी छाप छोड़ते हैं.
7. अमित राय का डायरेक्शन अच्छा है, उनकी पकड़ कहानी और इमोशन दोनों पर तगड़ी है.
अंतिम बात

अंतिम बात

‘ओह माय डॉग' एक पारिवारिक फिल्म है और एक संवेदनशील कहानी है, जिसमें हो सकता है कई जगह आपकी आँखें भर आएं. जिस तरह समाज में कई डॉग्स के हीरोइज़्म की कहानी हम सुनते हैं या पढ़ते हैं, उसी तरह अब मौका है इस हीरोइज़्म को बड़े पर्दे पर देखने का. तो जाइए और इस फिल्म का लुत्फ उठाइए, जहाँ सीख भी है, संवेदनाएं भी हैं, मनोरंजन भी और समाज के प्रति ज़िम्मेदारी भी.

3.5 स्टार्स
कास्ट: पंकज त्रिपाठी, माही राय, गीता अग्रवाल, पवन मल्होत्रा, सुलखना बरुआ, विजय, श्रीधर दुबे, विजय मिश्रा.

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