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शाहरुख-अक्षय से पहले सनी देओल बनने वाले थे अशोका और पृथ्वीराज, लेकिन इस वजह से नहीं बन पाई बात

सनी देओल और राजकुमार संतोषी ने कभी ‘अशोक द ग्रेट’ और ‘पृथ्वीराज चौहान’ जैसे बड़े ऐतिहासिक प्रोजेक्ट बनाने की योजना बनाई थी. लेकिन ये फिल्में क्यों नहीं बन पाईं और बाद में इन्हीं किरदारों को दूसरे सितारों ने क्यों निभाया?

शाहरुख-अक्षय से पहले सनी देओल बनने वाले थे अशोका और पृथ्वीराज, लेकिन इस वजह से नहीं बन पाई बात
क्या सनी देओल हुए थे साइडलाइन? नई फिल्म ने छेड़ी पुरानी बहस
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‘घायल', ‘दामिनी' और ‘घातक' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले सनी देओल और राजकुमार संतोषी की जोड़ी को कमर्शियली सेलेबल न माना जाए, तो ताज्जुब होना लाजमी है. बंटवारा 1947 के बाद एक बार फिर ये मामला चर्चा में है कि इन दोनों ने साथ मिलकर कुछ बड़े ऐतिहासिक प्रोजेक्ट सोचे थे, लेकिन वे कभी पर्दे पर नहीं आ सके. सनी ने हाल ही में बताया कि संतोषी ने उन्हें ‘अशोक द ग्रेट' और ‘पृथ्वीराज चौहान' पर फिल्म की कहानी सुनाई थी. दोनों प्रोजेक्ट बनाना चाहते थे, लेकिन निर्माता तैयार नहीं हुए. दिलचस्प बात यह है कि बाद में अशोक और पृथ्वीराज चौहान पर बड़े सितारों के साथ फिल्में बनीं. सोशल मीडिया पर इसी को लेकर अब सवाल उठ रहा है कि क्या सनी देओल को उस दौर में जानबूझकर पीछे रखा गया था? 

संतोषी के पास थीं दो बड़ी कहानियां, लेकिन…

सनी देओल ने हाल ही में बताया कि 2000 के दशक की शुरुआत में राजकुमार संतोषी ने उन्हें ‘अशोक द ग्रेट' की कहानी सुनाई थी. दोनों ‘पृथ्वीराज चौहान' पर भी फिल्म बनाना चाहते थे. लेकिन दोनों ही प्रोजेक्ट आगे नहीं बढ़ सके. सनी के मुताबिक उस समय निर्माताओं को वह और संतोषी इन फिल्मों के लिए ‘सेलेबल' नहीं लगते थे. यानी कहानी और इच्छा दोनों थीं, लेकिन उन्हें पर्दे पर लाने के लिए पैसा लगाने वाला तैयार नहीं था.

यह पहली बार नहीं था जब सनी ने इस तरह की बात कही. इससे पहले भी उन्होंने कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री बाजार के हिसाब से चल रही है और निवेशक उन्हें और संतोषी को मार्केट के हिसाब से भरोसेमंद नहीं मान रहे थे. अच्छी फिल्में बनाने के बावजूद दोनों के लिए प्रोजेक्ट नहीं आ रहे थे.

फिर वही ऐतिहासिक किरदार दूसरे सितारों के हिस्से में आए

अब सोशल मीडिया पर इसी कहानी को एक अलग नजरिए से देखा जा रहा है. बाद में शाहरुख खान ने ‘अशोका' में सम्राट अशोक का किरदार निभाया, जबकि अक्षय कुमार ‘सम्राट पृथ्वीराज' में पृथ्वीराज चौहान बने. दोनों फिल्मों का बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन भी उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा. ऐसे में सवाल उठाया जा रहा है कि जिस दौर में सनी और संतोषी को इन विषयों के लिए पैसा नहीं मिला, अगर वही प्रोजेक्ट सनी के साथ बनते तो क्या तस्वीर अलग होती?

‘बटवारा 1947' ने फिर चर्चा में आई ये कहानी

करीब तीन दशक बाद सनी देओल और राजकुमार संतोषी ‘बटवारा 1947' के लिए फिर साथ आए. लेकिन इस फिल्म की राह भी आसान नहीं रही. सनी और संतोषी के पास इस कहानी का विचार 2010 से था, लेकिन लंबे समय तक कोई इसे बनाने के लिए तैयार नहीं हुआ. आखिरकार आमिर खान बतौर निर्माता इस प्रोजेक्ट से जुड़े और फिल्म आगे बढ़ सकी.

तो क्या सनी देओल को वाकई साइडलाइन किया गया था?

यही वह सवाल है जिसने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है. एक तरफ सनी का अपना बयान है कि बड़े प्रोजेक्ट के बावजूद निर्माता उन्हें उस समय ‘सेलेबल' नहीं मानते थे. दूसरी तरफ बाद में उन्हीं ऐतिहासिक विषयों पर बड़े सितारों के साथ फिल्में बनीं. ऐसे में सनी देओल को साइडलाइन करने की बात कितनी सही है, यह कहना तो मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर है कि सनी के करियर का यह अध्याय बॉलीवुड में स्टार की ‘बाजार कीमत' और फिल्म के कंटेंट के बीच चलने वाली पुरानी बहस को फिर सामने ले आया है.

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