आर. माधवन की गिनती बॉलीवुड और साउथ सिनेमा में दिग्गज कलाकारों में होती है. वह अपने इंटरव्यू में अक्सर पर्सनल और प्रोफेशनल पर खुलकर बात करते हैं. हाल ही में आर. माधवन ने कनाडा में एक्सचेंज स्टूडेंट के तौर पर बिताए दिनों की यादें ताजा कीं. उन्होंने बताया कि वहां उन्हें ऐसे परिवारों के साथ रहना पड़ा जो जिंदगी गुजारने के लिए गायों को काटते थे. शाकाहारी होने के कारण आर. माधवन लिए यह अनुभव बहुत मुश्किल भरा था.
गाय मारकर खाता था परिवार
साल 2023 में आर. माधवन ने इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस के YouTube चैनल पर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने कहा, '90 के दशक में मुझे रोटरी की ओर से एक्सचेंज स्टूडेंट बनने का मौका मिला और मैं एक्सचेंज स्टूडेंट के तौर पर कनाडा गया. कनाडा में मैं स्टेटलर नाम की एक जगह पर गया. वह काउबॉय का इलाका है. मैं काउबॉय के साथ रहा. वहां मैं ऐसे परिवारों के साथ रहा जो गुजारे के लिए गायें मारते थे. मेरे लिए यह पूरी तरह से अधर्म था क्योंकि मैं एक शाकाहारी हूं.'
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एक स्कूल की बास्केटबॉल टीम का हिस्सा
कनाडा में आर. माधवन एक स्कूल की बास्केटबॉल टीम में शामिल हुए. भारतीय होने और कम ऊंचाई होने के बावजूद टीम में जगह मिलना उनके लिए बड़ी उपलब्धि थी. एक बार सात दिन का टूर्नामेंट खेलने के लिए उन्हें दूसरे शहर जाना पड़ा. मैचों के बाद लॉकर रूम में नहाने का सिलसिला शुरू होता था.
वहां लड़कों के शावर एरिया में एक खंभा होता था, जिसके चारों तरफ कई शावर लगे होते थे. सभी लड़के बिना कपड़ों के एक साथ नहाते थे. माधवन दक्षिण भारतीय परिवार से हैं, जहां घर में भी बिना कपड़ों के घूमना आम नहीं था. इसलिए उनके लिए यह बहुत असहज करने वाली बात थी.
शर्मिंदा महसूस हुआ
उन्होंने बताया कि गेम खेलने से ज्यादा डर उन्हें शावर में जाने का था. उन्होंने फैसला किया कि अंडरवियर पहने ही रहेंगे और नहीं उतारेंगे. जब वे अंडरवियर में शावर में गए तो बाकी लड़के हैरानी से उन्हें देखने लगे. माधवन ने कहा कि उन्हें बहुत शर्मिंदा महसूस हुआ क्योंकि बाकी सब एक-दूसरे को नहीं देख रहे थे, लेकिन वे सोच रहे थे कि वह क्या छिपा रहा है. सात दिनों तक उन्हें यही करना पड़ा.
शुरुआत में उन्होंने आम जिंदगी को अपनाने की कोशिश की, लेकिन तीसरे दिन उन्होंने फैसला किया कि यह उनके स्वभाव के खिलाफ है. वे सात दिनों तक कपड़े पहने ही रहे. इस अनुभव से उन्हें समझ आया कि अगर अंतरात्मा किसी काम में असहज महसूस करे और आम चलन को न मानने की हिम्मत हो, तो व्यक्ति खुद के साथ सहज रह सकता है. माधवन का कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में आने के लिए यह गुण बहुत जरूरी साबित हुआ.
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