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किशोर कुमार-सुनील दत्त का 58 साल पुराना वो गाना जिसने बंद करवा दी थीं पड़ोस की खिड़कियां, हीरो सिर्फ हिलाता था होंठ और दोस्त गाता था गीत

हम बात कर रहे हैं सुनील दत्त और किशोर कुमार की जबरदस्त जुगलबंदी वाली फिल्म पड़ोसन की. जिसमें इन दोनों ने ऐसा समां बांधा कि पड़ोस की अधिकतर खिड़कियां बंद ही रहने लगीं और यह गाना हर घर-घर में सुनाई देने लगा.

किशोर कुमार-सुनील दत्त का 58 साल पुराना वो गाना जिसने बंद करवा दी थीं पड़ोस की खिड़कियां, हीरो सिर्फ हिलाता था होंठ और दोस्त गाता था गीत
मेरे सामने वाली खिड़की में… चांद का टुकड़ा अभी भी चमकता है
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हिंदी सिनेमा में 58 साल पहले एक ऐसी फिल्म आई थी जिसमें हीरो हीरोइन का दिल जीतने के लिए बॉलीवुड स्टाइल प्लेबैक सिंगिंग वाला फॉर्मूला अपनाता है. यानी सिर्फ मुंह हिलाता है जबकि उसका दोस्त पीछे बैठकर गाना गाता है. हम बात कर रहे हैं सुनील दत्त और किशोर कुमार की जबरदस्त जुगलबंदी वाली फिल्म पड़ोसन की. जिसमें इन दोनों ने ऐसा समां बांधा कि पड़ोस की अधिकतर खिड़कियां बंद ही रहने लगीं और यह गाना हर घर-घर में सुनाई देने लगा. इस गाने का नाम 'मेरे सामने वाली खिड़की में' है. 

किशोर कुमार की आवाज और आर.डी. बर्मन का संगीत के साथ राजेंद्र कृष्ण के बोल ने ऐसा जादू रचते हैं कि 'मेरे सामने वाली खिड़की में' गाना सुनते ही दिल मुस्कुराने लगता है. सुनील दत्त खिड़की के सामने खड़े होकर लिप-सिंक करते हैं, जबकि किशोर कुमार बैकग्राउंड में गाते हैं और सायरा बानू मुस्कुराती हुई सुनती हैं. यह सीन आज भी उतना ही फ्रेश लगता है जितना रिलीज के दिन था.

गाने की खासियत और किशोर कुमार का कमाल

'मेरे सामने वाली खिड़की में' गाना फिल्म की कहानी का केंद्र है. सुनील दत्त का किरदार भोला संगीत नहीं जानता, लेकिन पड़ोसन बिंदू को इम्प्रेस करने के लिए गुरु (किशोर कुमार) की मदद लेता है. गुरु गाना गाते हैं और भोला लिप-सिंक करता है. आर.डी. बर्मन का हल्का-फुल्का अरेंजमेंट और किशोर दा का प्लेफुल टोन गाने को अनोखा बनाते हैं. यह ट्रैक फिल्म के अन्य हिट्स जैसे 'एक चतुर नार' और 'कहना है' के साथ मिलकर साउंडट्रैक को कालजयी बनाता है.

कॉमेडी और म्यूजिक ने बनाया कल्ट

ज्योति स्वरूप के निर्देशन में बनी 'पड़ोसन' मेहमूद और एन.सी. सिप्पी की प्रोडक्शन थी. कास्ट में सुनील दत्त, सायरा बानू, महमूद  और किशोर कुमार के अलावा ओम प्रकाश, मुकरी और केष्टो मुखर्जी शामिल थे. फिल्म बंगाली फिल्म 'पाशेर बाड़ी' का रीमेक थी. करीब 70-80 लाख के बजट में बनी इस फिल्म ने लगभग 2.8 करोड़ का कलेक्शन किया और 1968 की छठी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी. कॉमेडी, म्यूजिक और बेहतरीन परफॉर्मेंस ने इसे कल्ट क्लासिक बना दिया.

किशोर कुमार शुरू में एक्टिंग नहीं करना चाहते थे. मेहमूद ने लगभग एक महीना उनका पीछा किया और एक रात उनके घर के बाहर टेंट लगाकर रात भर बुलाते रहे, तब जाकर किशोर दा राजी हुए. गुरु दत्त को भोला का रोल ऑफर था, लेकिन उनकी मौत हो गई. आर.डी. बर्मन को भी यह रोल मिला था, लेकिन उन्होंने मना कर दिया.

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