हिंदी सिनेमा में प्यार, दुनिया, भाई-बहन और दोस्ती पर कई गाने बने हैं. गानों में मम्मी-पापा का प्यार भी खास रहा है. मम्मी-पापा के प्यार पर 50 साल पहले एक गाना आया था. जिसे उस दौरान खूब पसंद किया गया था. यह गाना गणित के सवाल पर बना था. इस गाने का नाम 'एक बट्टा दो, दो बट्टे चार' है. जो साल 1976 में आई फिल्म 'कालीचरण' का है. बट्टे फॉर्मूले का इस्तेमाल गणित में किया जाता है. यह सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि मां-बाप के अटूट प्यार का वो जादुई मंत्र है जो दशकों से बच्चों और बड़ों के दिलों में बसा है.
अनुरधा पौडवाल और कंचन की मधुर आवाज
1976 की सुपरहिट फिल्म 'कालीचरण' से निकला यह बच्चों का गाना आज भी स्कूलों, पार्टियों और परिवारिक अवसरों पर गूंजता है. 'एक बट्टा दो, दो बट्टे चार' गाने को अनुरधा पौडवाल और कंचन की मधुर आवाज, कल्याणजी-आनंदजी के संगीत और इंद्रजीत सिंह तुलसी के बोल ने इसे अमर बना दिया. 'कालीचरण' सुभाष घई की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म थी, जिसे एन.एन. सिप्पी ने प्रोड्यूस किया. शत्रुघ्न सिन्हा ने डबल रोल निभाया थी. उनके अलावा फिल्म में रीना रॉय, प्रेमनाथ, अजीत, मदन पुरी और डैनी डेंजोंगपा भी मौजूद थे.
शत्रुघ्न सिन्हा को सोलो हीरो के तौर पर बड़ा ब्रेकथ्रू
'एक बट्टा दो, दो बट्टे चार' गाना शिमला के बोर्डिंग स्कूल में पेरेंट्स डे के मौके पर दो बच्चे राजू और बिट्टू अपने मम्मी-डैडी के लिए गाते है. 'एक बट्टा दो, दो बट्टे चार' कहता है कि दुनिया छोटी बातों पर बंट जाती है, लेकिन मम्मी-डैडी का प्यार कभी नहीं बंटता. शत्रुघ्न सिन्हा के लिए यह सोलो हीरो के रूप में बड़ा ब्रेकथ्रू था. प्रोड्यूसर शुरू में राजेश खन्ना चाहते थे, लेकिन सुभाष घई ने शत्रुघ्न सिन्हा पर जोर दिया क्योंकि किरदार के लिए एक्टर चाहिए था, स्टार नहीं.
कब रिलीज हुई फिल्म
फिल्म 'कालीचरण' 7 फरवरी 1976 को रिलीज हुई और बॉक्स ऑफिस हिट साबित हुई था. फिल्म बाद में तेलुगु, कन्नड़, तमिल और मलयालम में रीमेक हुई. शत्रुघ्न सिन्हा ने शुरू में स्क्रिप्ट रिजेक्ट कर दी थी, लेकिन दोस्त सुभाष घई की डेब्यू फिल्म होने के कारण मान गए. घई ने खुद बताया कि उन्हें निर्देशन के लिए सिर्फ 25,000 रुपये मिले.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं