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45 साल पुराना वो भोजपुरी गाना, किशोर कुमार का ठेठ देसी रोमांटिक अंदाज, यूपी-बिहार में मचाई धूम, प्रेमी आज भी गाते हैं 'सांवर गोरिया'

किशोर कुमार ने हिंदी के साथ भोजपुरी सिनेमा में भी अपनी आवाज का जादू चलाया था. 1981 की फिल्म ‘धरती मइया’ में उनका गाया ‘सांवर गोरिया’ अपने चुलबुले और रोमांटिक अंदाज के लिए खूब पसंद किया गया.

45 साल पुराना वो भोजपुरी गाना, किशोर कुमार का ठेठ देसी रोमांटिक अंदाज, यूपी-बिहार में मचाई धूम, प्रेमी आज भी गाते हैं 'सांवर गोरिया'
किशोर कुमार ने गाया था ठेठ देसी गाना 'सांवर गोरिया', अंदाज आज भी सुपरहिट
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किशोर कुमार हिंदी सिनेमा के उन महान गायकों में शामिल हैं, जिनकी आवाज ने हर तरह के गीत को अपनी अलग पहचान दी. रोमांस हो, दर्द हो, शरारत हो या फिर मस्ती, किशोर दा हर भाव को आवाज के जरिए इतनी खूबसूरती से पेश करते थे कि गीत सीधे सुनने वालों के दिल तक पहुंच जाता था. खास बात यह है कि उन्होंने सिर्फ हिंदी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि भोजपुरी सिनेमा के लिए भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा था. उनकी आवाज में गाया एक ऐसा भोजपुरी गीत आज भी पुराने संगीत प्रेमियों को खूब पसंद आता है.

भोजपुरी में किशोर दा का अलग अंदाज

साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘धरती मइया' भोजपुरी सिनेमा की चर्चित फिल्मों में शामिल रही. इस फिल्म में कई गीत थे और इनमें किशोर कुमार की आवाज में गाया गया ‘सांवर गोरिया' खास तौर पर याद किया जाता है. किशोर कुमार ने इस गाने को बेहद सहज और चुलबुले अंदाज में गाया था. गीत में प्रेमी अपनी प्रेमिका की खूबसूरती की तारीफ करता है और उसके सामने अपने दिल की बात रखने की कोशिश करता है. किशोर दा की आवाज ने गाने के रोमांटिक भाव के साथ उसकी शरारत को भी बखूबी उभारा. यही वजह रही कि यह गीत अपने दौर में लोगों के बीच काफी लोकप्रिय हुआ.

लक्ष्मण शाहबादी के बोल और चित्रगुप्त का संगीत

‘सांवर गोरिया' की खासियत सिर्फ किशोर कुमार की आवाज नहीं थी. गीत के बोल लक्ष्मण शाहबादी ने लिखे थे, जबकि इसका संगीत मशहूर संगीतकार चित्रगुप्त ने तैयार किया था. चित्रगुप्त भोजपुरी फिल्मों के संगीत के लिए खास पहचान रखते थे. गाने में इस्तेमाल की गई भाषा बिल्कुल देसी और सहज थी. यही इसकी सबसे बड़ी खूबी बनी. किशोर कुमार ने शब्दों को अपने खास अंदाज में गाया और गीत में प्रेम, मासूमियत और हल्की-सी नोकझोंक का रंग भर दिया. उनकी गायिकी ने इस भोजपुरी गीत को लंबे समय तक याद रहने वाला बना दिया.

दशकों बाद भी बरकरार है किशोर दा की आवाज का जादू

किशोर कुमार के निधन के दशकों बाद भी उनकी आवाज का असर कम नहीं हुआ है. उनके पुराने गीत आज भी रेडियो, म्यूजिक प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया पर सुने जाते हैं. ‘सांवर गोरिया' भी ऐसे ही गीतों में शामिल है, जिसे पुराने दौर के संगीत के चाहने वाले आज भी याद करते हैं.

समय के साथ इस तरह के गीतों को नए अंदाज में पेश करने की कोशिशें हुईं, लेकिन किशोर कुमार की मूल आवाज का आकर्षण अलग ही रहा. ‘धरती मइया' में जयश्री, ब्रज किशोर, हरि शुक्ला और पद्मा खन्ना जैसे कलाकार नजर आए थे. फिल्म और उसके गीतों ने भोजपुरी सिनेमा के उस दौर की संगीत परंपरा को मजबूत किया. किशोर दा का ‘सांवर गोरिया' इसी विरासत का एक खूबसूरत हिस्सा है, जो करीब 45 साल बाद भी अपनी मिठास बनाए हुए है.

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