वित्त मंत्री अरुण जेटली अगले साल से शायद अपने सभी विरोधियों को बजट पेश करने से पहले भोजन करiने से नहीं चूकेंगे। इसका कारण है इस साल बजट पेश करने के पहले उन्होंने अपने पुराने मित्र और अब विरोधी बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को अपने घर खाना खिलाया और नीतीश ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देने के समय आलोचना तो की लेकिन बिहार के लिए कुछ अच्छे कामों के लिए प्रशंसा और धन्यवाद भी दिया। शायद नीतीश अकेले विरोधी नेता थे जिन्होंने कुछ विषयों के लिए जेटली की तारीफ की।
नीतीश कुमार ने कुछ मुद्दों पर अपना असंतोष भी जाहिर किया और केंद्र की नई नीति के कारण राज्यों को मध्याह्न भोजन, सर्व शिक्षा अभियान की राशि में हुई कटौती के लिए आलोचना भी की।
नीतीश ने फिर दोहराया की 14वें वित्त आयोग की अनुशंसा जिसमें राज्यों का हिस्सा बढ़ गया है, उसमें बिहार को प्रतिशत के स्टार पर बहुत ज्यादा फायदा नहीं होगा। उसी तरह सर्विस टैक्स में बढ़ोतरी के कारण बिहार को उसकी मार झेलनी पड़ेगी। बिहार में सर्विस टैक्स में सबसे ज्यादा राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ोतरी हुई है।
लेकिन नीतीश ने वित्त मंत्री अरुण जेटली को आंध्र की तर्ज पर बिहार पर भी विशेष ध्यान देने के लिए धन्यवाद दिया। ये अभी स्पष्ट नहीं है कि इसके अंतर्गत बिहार में चलने वाली परियोजनाओं में केंद्र अपना हिस्सा बढ़ाएगा या बिहार में लगने वाले उद्योगों को केंद्रीय करों से मुक्ति मिलेगी।
हालांकि इस सम्बंध में नीतीश का कहना है कि अगले कुछ दिनों में केंद्र अपनी नीती स्पष्ट करेगा। लेकिन पिछड़े राज्यों के लिए बिहार को मिलने वाली राशि नीतीश के अनुसार केंद्र सरकार बंद नहीं करेगी। इसके लिए नीतीश ने अरुण जेटली का स्वागत करते हुए उन्हें धन्यवाद दिया। बिहार में एम्स की तर्ज पर एक और मेडिकल संस्थान खुलने पर भी नीतीश खुश दिखे।
लेकिन नीतीश कुमार की शिकायत रही कि बोध गया को उन हेरिटेज साइट में क्यों शामिल नहीं किया गया जैसे नालंदा को शामिल किया गया है। बोध गया में हर वर्ष लाखो की संख्या में पुरी दुनिया से सैलानी आते हैं।
जाते-जाते नीतीश ने बीजेपी के अपने विरोधियों से अपील कर डाली कि बिहार के विकास के मुद्दे पर अब राजनीति नहीं करनी चाहिए। हां नीतीश ने मना कि वित्त मंत्री अरुण जेटली के घर पर बिहार के मुद्दों पर हुई बातचीत और खाने का असर बिहार के लिए हुई घोषणा पर निश्चित रूप से सकारात्मक असर दिखा।