विज्ञापन
This Article is From Dec 26, 2018

दिक्कत क्या है विराट कोहली की आक्रामकता में...

Sanjay Kishore
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    दिसंबर 26, 2018 14:59 pm IST
    • Published On दिसंबर 26, 2018 14:47 pm IST
    • Last Updated On दिसंबर 26, 2018 14:59 pm IST

मैदान में टीम इंडिया के कप्‍तान विराट कोहली की आक्रामकता को लेकर इस समय चर्चाओं का दौर जारी है. मैं पूछता हूं, दिक्कत क्या है विराट कोहली की आक्रामकता में! क्यों वही भद्रजन बने रहे? क्रिकेट को ‘जेंटलमैन गेम' बनाने रखने की ज़िम्मेवारी हिंदुस्तान ने ही थोड़े ही उठा रखी है. सबसे बड़ी बात ज़माने को ‘सज्जनता' के सम्मान की फ़िक्र है क्या?  दुनिया ‘सॉफ़्ट' लोगों को ‘टेकेन फ़ॉर ग्रांटेड' लेने लगती है. दबाने लगती है. सौरव गांगुली ने आंख में आंख डालकर बात करना सिखाया तो टीम इंडिया ने जीतना भी सीखा. महेंद्र सिंह धोनी की ‘कूलनेस' में भी आक्रामकता थी.अब विराट कोहली सीने टकरा रहे हैं. कोहली का सीना उस 56 इंच की तरह खोखला नहीं हैं जहां से सिर्फ बातें और वादे निकलते हैं. इस सीने के अंदर आग है जो सिर्फ जीत से बुझना चाहती है. कामयाबी के लिए ये आत्मविश्‍वास भी जरूरी है-'तुम एक स्टैंडिंग कप्तान हो और मैं दुनिया का सर्वश्रेष्ठ बल्लेबाज़!' कोहली ने ये कहा हो या न कहा हो, बंदे में क़ुव्वत है तभी दंभ दिखा रहा है. वो कहते हैं न...

मुख़्तसर सा गुरूर भी… ज़रूरी है जीने के लिये,
ज्यादा झुक के मिलो तो दुनिया पीठ को पायदान बना लेती है …!!

क्रिकेट के मैदान से ज़्यादा समय कॉमेंट्री बॉक्स में बिताने वाले कई ‘आर्म चेयर' आलोचक हैं. उनमें से एक नाम है-संजय मांजरेकर. जनाब को विराट कोहली की आक्रामकता पर ऐतराज़ रहा है. उनका कहना है कि कोहली के अच्छे प्रदर्शन के कारण उनकी कई अस्वीकार्य हरकतों को नज़रअंदाज़ कर दिया जाता है जबकि आंकड़े इस बात की तसदीक़ करते हैं कि आक्रामकता से कोहली का प्रदर्शन निखरता है. दिलचस्प बात है कि ऑस्ट्रेलियाई कप्तान टिम पेन को कोहली का बर्ताव नागवार नहीं गुज़रा है. वे इसका लुत्फ़ उठाने की बात कर रहे हैं. एलन बॉर्डर और शेन वॉर्न सहित पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कोहली की जीत की भूख की तारीफ़ों के पुल बांध रहे हैं. सर विव रिचर्डस के लिए वे सबसे अच्छे कप्तान हैं (हालांकि प्लेइंग इलेवन से लेकर कप्तान के तौर पर उनके  फ़ैसलों पर सवाल उठते रहे हैं).

ब्रो कोहली, वर्ल्ड कप में आपके 'लड़कों' को इस 'आदमी' की ज़रुरत पड़ेगी!

ऑस्ट्रेलिया में चर्चा चल रही है कि टेस्ट क्रिकेट के रोमांच के लिए मैदान पर 'फ्रेंडली बैंटर' जरूरी हैं. गर्मागर्मी सही है लेकिन इसे बदतमीज़ी की हद पार नहीं करनी चाहिए. एक समय मांजरेकर ने मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के फुटवर्क पर सवाल उठाते हुए टिप्पणी कर दी थी कि उन पर उम्र हावी हो गयी है. तब ‘फ़ुटवर्क' पर सवाल उठाने वाले मांजरेकर को ‘बैकफ़ुट' पर आना पड़ा था.

सिनेमाई संसार की प्रबुद्धता हमेशा से बहस का मुद्दा रहा है. नसीरुद्दीन शाह जैसी शख्सियत जब कोहली को सबसे बुरा क़रार देते हैं तो थोड़ी हैरानी होती है. कोफ़्त होती है. उनकी राय अपनी जगह दुरुस्त हो सकती है. नसीर जैसे लोग शायद ‘फ्रोजेन इन टाइम' के शिकार हैं. बदलती सोच के साथ आत्मसात और नए ज़माने के साथ क़दमताल नहीं कर पा रहे हैं.

Ind vs Aus: पर्थ टेस्‍ट के दौरान कोहली के साथ नोकझोंक पर यह बोले टिम पेन...

ये सच है कि गौतम बुद्ध और महात्मा गांधी का ये देश अहिंसावादी और शांतिप्रिय रहा है. 326 बीसी में ग्रीक आक्रामणकारी एलेक्जेंडर से लेकर अरब से मोहम्मद बिन क़ासिम, टर्की के मोहम्मद गजनी , ग़ुलाम, ख़िलजी, तुग़लक़, सैयद, लोदी, मुग़ल और अंग्रेज़ ने हिंदुस्तान को लूटा-खसोटा मगर सैकड़ों आक्रमणकारियों के हमले-क़ब्ज़े-लूट के बावजूद देश के मिज़ाज में आक्रमकता नहीं आई या फिर आक्रमकता और आत्मविश्वास सदियों की ग़ुलामी के कारण दबती चली गई.

वीडियो: मैडम तुसाद म्‍यूजियम में विराट कोहली

‘हिंदुस्तान'को आध्यात्मिक गुरु बनने के रास्ते में विनम्रता और सहिष्णुता की ज़रूरत थी. कल का हिंदुस्तान आध्यात्मिक गुरु बनना चाहता था मगर आज का इंडिया आर्थिक शक्ति बन कर विश्‍व गुरु बनना चाहता है. तेज़ी से और आक्रामकता के साथ दबदबा क़ायम करना चाहता है. आज का युवा अधीर है. व्यग्र है. बेचैन है. उसे किसी भी क़ीमत पर कामयाब होना है. आज का युवा याचक नहीं है उसे हक़ छीनना और हक़ जताना आता है. सूचना और प्रौद्योगिकी के ज़रिए भारत की बढ़ती ताक़त का दुनिया देख रही है.लब्बोलुआब यह है कि इंडिया को आक्रामकता पसंद है. फिर चाहे ‘सर्जिकल स्ट्राइक' की मोदी ब्रैंड आक्रमकता हो, या फिर राहुल गांधी की ‘चौकीदार चोर है' या फिर अरविंद केजरीवाल की ‘दिल्ली के मालिक हम हैं' वाला एंग्री यंग मैन वाला अंदाज. लोगों को पसंद आ रहा है. दिल्ली के छोरे विराट कोहली की आक्रमकता के क़द्रदानों की कमी नहीं...

संजय किशोर एनडीटीवी के खेल विभाग में डिप्टी एडिटर हैं...

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं. इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति NDTV उत्तरदायी नहीं है. इस आलेख में सभी सूचनाएं ज्यों की त्यों प्रस्तुत की गई हैं. इस आलेख में दी गई कोई भी सूचना अथवा तथ्य अथवा व्यक्त किए गए विचार NDTV के नहीं हैं, तथा NDTV उनके लिए किसी भी प्रकार से उत्तरदायी नहीं है.

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com