मेरे प्यारे कमज़ोर और कमसिन से रुपैया,
आए दिन समाचार माध्यमों में तुम्हारे गिरते-पड़ते रहने की ख़बरें देखता रहता हूं। सच कहूं तो मैं तुम्हारे गिरने की ख़बरों को पढ़कर कुछ महसूस नहीं करता। जैसे कि बहुत दुखी हो गया हूं या बहुत खुश हूं कि कोई तो गिरा। मुझे पता नहीं कि गिरने से तुम घायल होते हो या काग़ज़ पर ही गिरते रहते हो। कागज़ पर कोई कैसे गिर सकता है रुपया। तो क्या तुम नज़रों से गिर जाते हो, कहीं ऐसा तो नहीं मेरी तरह भूकंप से तुम भी घबराते हुए डोलते रहते हो। इतना भी क्या कमसिन होना। सीढ़ी और लिफ्ट से मत भागना। सेफ जगह पर खड़े रहना दोस्त। खैर, तुम्हारे गिरने की कोई जगह है तो बता देना। मैं खुद आ जाऊंगा या किसी को भेज दूंगा।
देखो, रुपया तुम गिरो मत। मुझे तो तुम्हारे गिरने का हिसाब समझ नहीं आता। 64 साल की उम्र में कोई प्रधानमंत्री बनकर अथक परिश्रम करता रहता है, देश दुनिया में भागते रहता है और तुम हो कि 64 पर पहुंच कर गिरे हुए मान लिये जाते हो। कमज़ोर मान लिये जाते हो। ये कौन लोग हैं, जो तुम्हें पतनशील बता रहे हैं। तुम्हारे होने से हमारा जीवन कितना प्रगतिशील हो जाता है। देश का जीवन विकासशील हो जाता है और तुम हो कि गिरे हुए बताये जा रहे हो। कमज़ोर कहे जा रहे हो। बोलो कि हम कमज़ोर नहीं हुए हैं। हम पर्स में रखे रखे गल ज़रूर गए हैं मगर हम में दम और दाम अब भी बाकी है रे पुष्पा। बोल दे राजेश खन्ना वाला डायलॉग।
रुपल्ली, क्या मैं प्यार से तुम्हें रुपये की जगह रुपल्ली कह सकता हूं। चौक-चौबारे पर तुम्हें कितने लोग रुपल्ली भी पुकारते हैं। ‘अदरभाइज’ मत लेना। तुम कब गिरते थे और कब उछलते थे हमें पता ही नहीं चलता था। नया नया पत्रकार बना तो हमारे एक संपादक दिन भर बताते रहते कि देखो भाई लोग, ई जो रुपया है डालरवा के मुकाबले ही चढ़ता रहता है। हम तो खुश ही हो गए। हमारा रुपया डालर को पटक भी देता है। आंख भी दिखा देता है। डालर माने अमरीका भाईजान को आंख मार देता है। हम तो बोले थे कि शाबाश रुपल्ली। हम तो नहीं कर सके तू ही कमाल करते रहिओ। मगर इससे ज्यादा तुम्हारा कमज़ोर होना बुझाता नहीं था।
दो साल पहले जब चुनाव का माहौल गरमाया न तो हम देखे कि रोज्जे लोग ट्वीट कर रहे हैं कि आज भी रुपया कमज़ोर हो गया। हाय रे देश कहां पहुंच गया। हम रसातल में हैं कि रुपया 64 पर है। जो भी तुमको 64 पर देखता था न, सोफा पर बैठे बैठे फील करने लगता था कि ड्राइंग रूम से सरक कर बेसमेंट में आ गया है। एक नेता ने कहा कि कभी हम डॉलर के बराबर थे। एक डालर बराबर एक रुपया। हम रुपये को डॉलर के बराबर ले आयेंगे। तब हम झट से गूगल मारे कि तब डालर की बराबरी के दिनों में हमारे हसीन सपने क्या थे। जवाब नहीं मिला। पता नहीं कब और कैसे तुम डालर के नाम पर कभी इधर तो कभी उधर डोलने लगे। सुनते सुनते लगा कि अगर मुल्क को रसातल में जाने से बचाना है कि तुमको रुपल्ली कुछ करना होगा। देश की प्रतिष्ठा को तुम यूं न सुबह शाम गिराया करो, खा पीकर डटे रहो, मेरी गली आया करो। ये मैं गाना लिख रहा हूं तुमको प्रेरित करने के लिए रुपया।
लगता है कि तुम भी 64 पर पहुंच जवानी जैसा फील करते हो। इसीलिए बार-बार वहीं पहुंच जाते हो का। हम गणित में विद्वान रहते तो समझते कि 61 पर आते हो तो मज़बूत हो जाते हो और 64 पर जाते हो तो कमज़ोर। सब्ज़ी मंडी में कोई आलू तौल रहा हो जैसे। एक आलू निकाला तो पलड़ा उधर और एक रख दिया तो इधर। तुम ठीक-ठीक बताओ कि तुमको कमज़ोरी कब बुझाता है। 61 पर या 64 पर।
देखो, रुपया, हम तुमको प्यार करते हैं। बाप बड़ा न भैया। द होल थिंग इंज़ दैट कि सबसे बड़ा रुपया। तुमको सबसे बड़ा कहा गया और तुम हो कि लुढ़क जाते हो। पीते-पाते तो नहीं हो न। बता दो। सरकार ने नशामुक्ति पर प्रोग्राम चलाया हुआ है। रुपये से प्यार न करते तो हम दिन रात ऐसे न खटते। तुम्हारी ख़ातिर हम किस किस की ख़ातिरदारी में लगे हैं, तुमको मालूम भी न होगा। तुम हो कि आव देखे न ताव लुढ़क जाते हो। अच्छा हुआ कि अब लोग तुम्हारे गिरने पर हंगामा नहीं करते। जिसका ठिकाना नहीं कि कब कौन कहां गिर पड़े उसके चक्कर में कौन पड़े।
इसलिए हे रुपया तुम हो गए हो सीनियर सिटिजन। ट्रेन में लोअर बर्थ भी मिलेगा तुमको। भाड़ा भी कम लगेगा। 63-64 साल में हमारे गांव में लोग तीर्थयात्रा पर निकल जाते हैं। तुम हो कि 64 के दुआरिये पर ढिमला जाते हो ( दरवाज़े पर ही लुढ़क जाते हो)। विटामिन दें तुमको। बोर्नविटा या होर्लिक्स। चिन्ता मत करो। डालर से मुकाबला छोड़ दो। मान लो हमरी बात। कह दो दुनिया से कि हम ‘माइसेल्फ’ में यकीन करते हैं। मैं जो हूं वो हूं। वो कमज़ोर हूं या मज़बूत हूं मुझे नहीं पता, मैं 64 हूं तो हूं।
इसलिए रुपया तुम फिकर मत करो। कहो कि हम अपने गिर गए हैं। हम डालर के साथ मैच खेल ही नहीं रहे है। 64 के होने पर भारत को कुछ नहीं होता है। ई कोई रिक्टर स्केल नहीं है कि एक झटका आया और सब बिल्डिंग से बाहर। तुम गिरो या मत गिरो हमको का है। तुम जहां जाकर गिरते हो हम तो वहां पहुंचे बिना ही गिरे हुए हैं। तुम जहां जाकर चढ़े हुए कहलाते हो हम तो वहां चढ़कर भी गिरे हुए कहलाते हैं।
सुने हैं कि तुम विदेश भी चले जाते हो घूमने के लिए और जाते हो तो लौट कर नहीं आते। वित्त मंत्री ने कानून बनाया है कि अब से कोई भी रुपया ब्लैक होकर बाहर जाएगा उसे सफेद करने के लिए बताना पड़ेगा। ये भी सुने हैं कि तुम विदेशी बैंक में लुका (छिप) जाते हो। लुकाये लुकाये काला पड़ जाते हो और इहां जेठमलानी जी तुमको निकाल कर लाने के लिए रोज़ कोर्ट में बहस कर रहे हों। इसलिए हे रुपया तुम विदेश जाओ। किसका मन नहीं करता है विदेश में घूमने के लिए लेकिन वापस आ जाओ। शाहरुख ख़ान की फिल्म स्वदेश की तरह। मेक इन इंडिया का रुपया विदेशों में रहे अच्छी बात नहीं है रुपल्ली। यहां बैंक नहीं हैं तुम्हारे छिपने के लिए। काला ही होना है तो विदेश में जाकर क्यों होते हो। यही हो जाओ। कोई रोकता है का जी तुमको।
तुम मज़बूत बनो। वीर बनो। एक दिन डालर तुम्हारे मुकाबले गिरेगा। तुम कभी नहीं गिरोगे। वो दिन आ रहा है। आने से पहले तुम गिरने की अपनी सभी ख्वाहिशें पूरी कर लो। कमज़ोर होना कोई गुनाह नहीं होता है। रुपल्ली तू अपनी लाइफ जी ले। लोड मत ले। तुम पर्स में टटका-टटका( ताज़ा) कितना अच्छा लगते हो। तुम जब मेरे पास होते हो तो दूसरा कोई नहीं होता। ये गाना है लेकिन ये गाना तुमको डेडिकेट कर दिये हैं। रुपल्ली गाना सुन। मौज कर। फ्री माइंड से लाइफ जी। कमज़ोर और मज़बूत रहने से कुछ नहीं होता है। इसलिए हे रुपया तुम अपने मार्ग पर चलो। अनार का जूस पियो। मगर कमज़ोर मत बनो। 64 रहो या 64 के पार जाओ मगर इंडियन बने रहो। तुम्हारी कमज़ोरी किसी की सीनाजोरी नहीं है।
तुम्हारा बड़ा भैय्या
रवीश कुमार
This Article is From May 13, 2015
कमजोर, कमसिन 'रुपये' के नाम रवीश कुमार की खुली चिट्ठी
Ravish Kumar
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Updated:मई 13, 2015 16:17 pm IST
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Published On मई 13, 2015 11:52 am IST
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Last Updated On मई 13, 2015 16:17 pm IST
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