सवाल यह नहीं है कौन सुषमा स्वराज के साथ है और कौन विरोध में है। यह भी मूल सवाल से भटकाने वाला है कि मोदी कैबिनेट का कोई मंत्री सुषमा स्वराज फिक्स कर रहा है। जिस एकजुटता से आरएसएस, बीजेपी और मोदी सरकार ने सुषमा स्वराज का बचाव किया है, उससे यह कतई नहीं लगता कि यह ख़बर इसलिए लीक की गई कि इन्हें बहुत दिनों से सुषमा स्वराज के बचाव का मौका नहीं मिल रहा था। यह ख़बर तो लंदन के अख़बारों में पिछले हफ्ते से छप रही थी।
सुषमा स्वराज ने टाइम्स नाउ की पत्रकार नविका कुमार पर ही एक ट्वीट दाग दिया कि देखो शुचिता यानी प्रोपराइटी की बात कौन कर रहा है। सुषमा स्वराज ने लंदन के अख़बार द संडे टाइम्स और डेली मेल के पत्रकारों को चैलेंज नहीं किया है। इस मुद्दे को लेकर अच्छा ख़ासा राजनीतिक दबाव पैदा हो गया है, लेकिन जिसकी वजह से तनाव है। उन्हें आप देखेंगे तो लगेगा कि आईएएस टॉपर हों। ललित मोदी की सोहबतों में कौन-कौन है ये बात बेमानी है।
ललित मोदी उन भगोड़ों की तरह नहीं है, जो जौनपुर से भागकर झांसी में छिप गए और पहाड़ी के पीछे एनकाउंटर हो गया। वैसे उनके वकील के मुताबिक मोदी भगोड़ा नहीं हैं। किसी कोर्ट ने भगोड़ा घोषित नहीं किया है। इटली के शहर वेनिस से पत्रकारों को बताया कि वे ख़बर पर नज़र रख रहे हैं।
आरोप है कि ललित मोदी को पत्नी के ऑपरेशन के लिए पुर्तगाल जाना था, ताकि वे ऑपरेशन के लिए सहमति पत्र पर दस्तखत कर सकें। भारत में ललित मोदी का पासपोर्ट रद्द कर दिया गया था, इसलिए वे शरणार्थी की तरह रह रहे थे। तस्वीरों से तो लगता है कि ये दुनिया के सबसे ग्लैमरस शरणार्थी हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 अगस्त को उनके पासपोर्ट को बहाल कर दिया था। इसलिए कहना मुश्किल है कि ललित मोदी ने सुषमा स्वराज की बदौलत से मिले दस्तावेजों के सहारे थाईलैंड, दुबई, हवाना, स्पेन, वेनिस और ईबिज़ा जैसे शहरों की यात्रा की। चार अगस्त 2014 को ललित ने पुर्तगाल से ट्वीट भी किया था कि just spend a day at champali maude centre for unknown. यह पुर्तगाल के अस्पताल का नाम है।
लंदन के अख़बारों में उनके कैंसर की ख़बरें छपती रही हैं। आईपीएल क्रिकेट के कमिश्नर के तौर पर करीब सात सौ करोड़ रुपये के गबन का आरोप है। भारत के प्रवर्तन निदेशालय ने ब्लू कार्नर नोटिस जारी किया है। इंटरपोल के ज़रिए ब्लू कार्नर नोटिस जारी किया जाता है ताकि पता रहे कि अमुक व्यक्ति कहां हैं। मोदी के वकील का कहना है ब्लू कार्नर नोटिस जारी नहीं हुआ है।
साल 2013 में यूपीए के वित्त मंत्री के तौर पर पी चिदंबरम ने ब्रिटिश सरकार से कहा था कि वह ललित मोदी के ख़िलाफ कार्रवाई करे और भारत को सौंप दे। ज़ाहिर है यूपीए ने ललित मोदी के मामले में खानापूर्ति की। लेकिन सवाल यह है कि एनडीए के समय खानापूर्ति क्यों हो रही है। एक साल में मोदी सरकार ललित मोदी को भारत क्यों नहीं ला सकी? क्या सुषमा स्वराज बताएंगी कि क्या-क्या प्रयास हुए। 27 अगस्त 2014 में दिल्ली हाईकोर्ट ने ललित मोदी का पासपोर्ट बहाल किया, तब विदेश मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती भी नहीं दी।
इस मामले को ब्रिटेन की नज़र से देखा जाना चाहिए जहां कंजर्वेटिव पार्टी के सांसद एंड्रयू ब्रिजन ने संसद के स्टैंडर्ड कमिश्नर को लिखा है कि वह जांच करे कि लेबर पार्टी के सासंद कीथ वाज़ ने किसी की मदद करने के लिए सांसदों की आचार संहिता का उल्लंघन किया है या नहीं।
डेली मेल के अनुसार पिछले जून में कीथ वाज़ ने इमीग्रेशन के महानिदेशक को ऑफिशियल लेटर पैड पर लिखा था कि ललित मोदी को एक शादी में शरीक होने के लिए और अपनी बीमार पत्नी के साथ जाने के लिए ट्रैवल डाक्यूमेंट चाहिए। भारतीय मूल के सांसद कीथ वाज़ की इस चिट्ठी की बदौलत 24 घंटे के भीतर ललित मोदी को ब्रिटिश ट्रैवल दस्तावेज़ मिल गए।
लंदन के अख़बारों में एक ईमेल का भी ज़िक्र हो रहा है कि सुषमा स्वराज के पति स्वराज कौशल ने ललित मोदी से अपने भतीजे के एडमिशन के लिए मदद मांगी थी। ललित मोदी ने इस बाबत कीथ वाज़ को भी ईमेल किया था। एडमिशन हो चुका है। अब सवाल है कि एडमिशन भी क्या मानवीय आधार पर किया गया या किसी लेन देन का हिस्सा रहा होगा।
सुषमा स्वराज प्रेस कांफ्रेंस नहीं कर रही हैं। ट्वीट कर रही हैं। इसमें कोई शक नहीं कि ट्विटर पर मदद मांगने पर वे आम लोगों की भी मदद करती हैं, तुरंत एक्शन लेती हैं, लेकिन यहां मदद का आरोप एक ऐसे व्यक्ति की मदद का है जो भारत आकर कानून की मदद नहीं कर रहा है।
सुषमा स्वराज ने कहा कि ललित मोदी को पत्नी के ऑपरेशन के लिए सहमति पत्र पर साइन करना था, इसलिए मानवीय आधार पर मदद की लेकिन यूरोपीय संघ के अनुसार ऑपरेशन के समय मरीज़ खुद अपने ऑपरेशन के लिए लिखित सहमति दे सकता है। गवाह की ज़रूरत तब पड़ती है, जब मरीज़ बोलने या लिखने में असमर्थ हो। पुर्तगाल यूरोपीय संघ का सदस्य है। पुर्तगाल के अपने के कानून के अनुसार मरीज़ किसी भी तरीके से अपने ऑपरेशन की सहमति दे सकता है। तो क्या सहमति का बहाना बनाया गया? क्या एक व्यक्ति जिसके खिलाफ ब्लू कॉर्नर नोटिस हो वह इतनी आसानी से भारत के विदेश मंत्री से संपर्क कर सकता है।
रविवार को सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर सफाई दी जुलाई 2014 में ललित मोदी ने मुझे बताया कि उनकी पत्नी का चार अगस्त को पुर्तगाल में कैंसर का ऑपरेशन होना है। सहमति पत्र पर दस्तख्त करने के लिए उनका वहां रहना ज़रूरी है। उन्होंने यात्रा दस्तावेज़ जारी कराने में मदद मांगी। मैंने मानवीय आधार पर ब्रिटिश उच्चायुक्त से कहा कि इस मामले में ब्रिटिश सरकार अपने कानून के आधार पर विचार करे। अगर ब्रिटेन उन्हें यात्रा दस्तावेज़ जारी करता है तो इससे दोनों देशों के रिश्ते खराब नहीं होंगे। वाज ने भी मुझसे बात की। मैंने उनसे भी वहीं बात कही, जो ब्रिटिश उच्चायुक्त से कही थी।
सहमति पत्र पर दस्तखत के लिए होना ज़रूरी नहीं है। सवाल यह भी है कि मदद करते वक्त क्या सुषमा स्वराज ने भारतीय दूतावास को जानकारी दी। क्या ललित मोदी से कहा कि बदले में आपको समपर्ण करना होगा? प्रवर्तन निदेशालय की इस विवाद के सामने आने के बाद क्या भूमिका है? क्या सुषमा स्वराज ने प्रवर्तन निदेशालय को सूचना दी कि ललित मोदी की मानवीय आधार पर मदद की गई है?
डीएनए अखबार ने 7 मई 2014 को जब ललित मोदी से पूछा कि आप भारत कब वापस आने वाले हैं, तब उन्होंने कहा था कि दो हफ्ते रह गए हैं। चुनाव के नतीजे आने दो तब हम बात करते हैं। इसे कहते हैं कांफिडेंस।
इस बीच शाम होते-होते प्रकाश जावड़ेकर की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ललित मोदी नरेंद्र मोदी और अमित शाह की जो तस्वीरें दिखा रही हैं, वो 2010 की हैं। 2015 में दिखाने का क्या तुक है। राजीव शुक्ला और ज्योतिरादित्य सिंधिया की सैंकड़ों तस्वीरें हैं। क्यों पुरानी तस्वीरें दिखाईं जा रही हैं। सोनिया गांधी और राहुल गांधी की कोयला और 2 जी घोटाले के आरोपियों के साथ तस्वीरें हैं। प्रकाश जावड़ेकर दो सवाल पूछ कर चले गए कि ललित मोदी को किसकी सरकार ने लंदन जाने दिया। कांग्रेस के नेता कहां छुट्टी मनाने गए थे।
हर सवाल के सामने एक सवाल खड़ा किया जा रहा है। क्या पुराने मामलों को निकाल कर बीजेपी और मोदी सरकार इन सवालों से बच सकती है। जेल में बंद कैदी का मानवीय आधार होता है उसे परोल पर रिहा किया जाता रहा है, आरोपी अदालत की इजाजत से विदेश जाते रहे हैं। प्राइम टाइम
This Article is From Jun 15, 2015
ललित मोदी की मदद पर घिरीं सुषमा स्वराज
Ravish Kumar
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Updated:जून 15, 2015 21:46 pm IST
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Published On जून 15, 2015 21:23 pm IST
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Last Updated On जून 15, 2015 21:46 pm IST
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