प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 10 जून को संवैधानिक चुनाव पद्धति से चयनित सबसे अधिक कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री हो जाएंगे. मोदी देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का 4398 दिनों का रिकॉर्ड तोड़ कर अपनी देश सेवा के 4399 दिन पूर्ण करेंगे. प्रधानमंत्री मोदी अपने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री दोनों के कार्यकाल को जोड़कर 25 साल के साथ ही 9007 दिनों की अनवरत राष्ट्र सेवा को भी पूर्ण करेंगे. यह एक उत्साही, अविश्रांत, अनथक कर्मयोगी की यात्रा है.
इन 12 सालों का उनका कार्यकाल देश के विकास के लिए अनेक कीर्तिमान गढ़ने वाले कठोर निर्णयों के लिए अविस्मरणीय रहेगा ही साथ ही साथ देश की सुरक्षा के लिए भी उनके योगदान को भुलाया नहीं जा सकता है. राष्ट्र प्रथम के सिद्धांत का अनुपालन करते हुए उन्होंने आतंकवाद से प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को अपनाया. 13 जून 2014 को भारतीय सेना के साउथ ब्लॉक स्थित रक्षा वॉर रूम में सेना के उच्च अधिकारियों के साथ संवाद और रक्षा तैयारियों की समीक्षा कर ही अपनी सुरक्षा के प्रति प्राथमिकता को स्पष्ट कर दिया था.
जब पूरा देश दीपावली पर दीपों से अपने-अपने घरों को प्रकाशमान करता है, तब प्रधानमंत्री मोदी सीमा पर सुरक्षा में तैनात जवानों के बीच उपस्थित रहकर, देश उनके साथ है का संदेश देते हैं.सियाचिन से प्रारंभ कर 12 सालों में 12 स्थानों पर जाकर उन्होंने अपनी सीमा सुरक्षा के प्रति प्रतिबद्धता प्रकट की है.
मजबूत सेना,सुरक्षित राष्ट्र
आचार्य चाणक्य ने राष्ट्र की सुरक्षा के संदर्भ में कहा था,''मजबूत सेना के बिना राष्ट्र सुरक्षित नहीं रह सकता.'' 1962 में चीन युद्ध में हमारी पराजय और 1964 में चीन के परमाणु परीक्षण के बाद निर्मित निराशाजनक स्थिति से उबारने के लिए भारत को भी परमाणु शक्ति युक्त होना चाहिए, यह मांग जनसंघ ने चार दिसंबर 1964 को अपने पटना अधिवेशन में की थी. तब कांग्रेस समेत समस्त दलों ने इस मांग का उपहास उड़ाया था. जनसंघ के इसी संकल्प की पूर्ति को 1974 के परमाणु विस्फोट के बाद 11 मई 1998 को प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने पोकरण विस्फोट कर पूर्ण किया था. प्रधानमंत्री मोदी के आने के बाद 2014 में रक्षा विभाग का बजट 2.27 लाख की तुलना में तीन गुना बढ़कर 7.85 लाख करोड़ हो गया.
आज हम 100 से अधिक देशों को अपने रक्षा उत्पाद बेच रहे हैं. अब हमारा निर्यात 2014 की तुलना में 686 करोड़ से बढ़कर 2025-26 में 38424 करोड़ का हो गया है. इसका अर्थ यह हुआ कि रक्षा उत्पादों के निर्यात में 56 गुना की बढ़ोतरी हुई है. अब हम हाइपर सोनिक मिसाइल, ब्रह्मोस, बैलिस्टिक मिसाइल, एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को ध्वस्त करने वाले रुद्रम -2, प्रलय, आकाश एयर डिफेन्स मिसाइल बना रहे हैं. भारत का स्वदेशी आईएनएस विक्रांत, राफेल, एस-400 विमानों से हम युक्त हैं. आर्मेनिया ने येरेवान रिपब्लिक स्क्वायर में भारत में बनी 'आकाश' एयर डिफेंस मिसाइल और पिनाका रॉकेट लॉचर्स का प्रदर्शन भारतीयों के मस्तक को ऊंचा करता है.
पाकिस्तान में 22 मिनट में भेद दिए सभी लक्ष्य
15 अगस्त 2025 को लाल किला से प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था, ''स्वदेशी क्षमताओं, मेड इन इंडिया हथियारों ने सिद्ध किया कि राष्ट्रीय सुरक्षा विदेशी निर्भरता पर नहीं टिक सकती.'' इसी का परिणाम ऑपरेशन सिंदूर में हमारी सेना ने 22 मिनट में ही सभी निर्धारित लक्ष्य पूर्ण कर किए थे. 72 हजार करोड़ की लागत से तैयार होने वाली ग्रेट निकोबार परियोजना भारत की आर्थिक समृद्धि, सामुद्रिक रणनीति और सुरक्षा का आधार बनेगी.
सेना में स्वदेशी रक्षा उत्पाद, रक्षा बजट में वृद्धि, सेना के आधुनिकीकरण के साथ-साथ आंतरिक सुरक्षा पर सफलता प्राप्त करना ऐतिहासिक कदम है. 2014 से पूर्व पाकिस्तान प्रेरित आतंकवाद चरम पर था. केवल कश्मीर ही नहीं देश का कोई शहर सुरक्षित नहीं था. मुंबई, जयपुर, दिल्ली, काशी समेत अनेक शहरों में हुईं आतंकी घटनाएं आज भी हमको विचलित करती हैं. सुरक्षाबलों को आधुनिक शस्त्र, बुलेट प्रूफ जैकेट, टेरर फंडिंग पर रोक हेतु 'NO MONEY FOR TERROR' जैसे कड़े कदम, FATF के माध्यम से वित्तीय दबाव के साथ सर्जिकल और बालाकोट एयर स्ट्राइक के माध्यम से आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने का काम किया. ऑपरेशन सिंदूर ने पाकिस्तान में स्थापित आतंकी केंद्रों का सफाया और पाकिस्तान के सुरक्षा तंत्र को ध्वस्त किया. 370 को हटाने का ऐतिहासिक निर्णय कर देश की एकात्मता को सुदृढ़ किया है.
नक्सलियों का सफाया
इस ऐतिहासिक दिन को देश ही नहीं सम्पूर्ण विश्व स्मरण करेगा, जब हमने कहा कि 31 मार्च 2026 को वामपंथ प्रेरित नक्सलवाद से हम मुक्त हो रहे हैं. साल 2024 में 126 जिले नक्सलवादी आतंक से युक्त थे. साल 2024 में 290 नक्सली मारे गए, 1090 गिरफ्तार हुए और 881 ने आत्मसर्पण कर भारत की मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया. अब बस्तर समेत सभी नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास की बयार बह रही है.
घुसपैठिये देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था, सुरक्षा के लिए खतरा और जनसांख्यिकी असंतुलन निर्माण कर रहे हैं. भारत सरकार ने इस संकट से उबरने के लिए 'डिटेक्ट, डिलीट, डिपोर्ट' नीति के अंतर्गत कठोर कार्रवाई की है. सीमा की निगरानी को सख्त किया है. बंगाल भाजपा विजय के पश्चात् बांग्लादेशी घुसपैठियों की बांग्लादेश की ओर वापसी की लाइन हम देख रहे हैं. 15,106 किलोमीटर लंबी सीमा 'सोती रेखा से जागती दीवार' लक्ष्य में लेजर वॉल, वाइब्रेशन सेंसर्स और नाइट विजन कैमरों का इस्तेमाल हो रहा है. सीमा सुरक्षा का बजट 49 फीसद बढ़ाकर 5597 करोड़ निर्धारित किया गया है.
मोदी सरकार में साइबर सुरक्षा कैसी है
अदृश्य युद्ध के माध्यम से भारत की साइबर सुरक्षा को चुनौती देने का कार्य भारत विरोधी शक्तियां कर रही हैं. राज्यसभा में पेश रिपोर्ट के अनुसार भारत ने करीब 54 लाख साइबर शिकायतों और 31594 करोड़ रुपयों के ठगी के प्रयासों का सामना करने में भारत सफलता पाई है. भारत सरकार ने 2024 में साइबर कमांडो व्यवस्था निर्माण का साइबर सुरक्षा प्रदान करने की व्यवस्था की है. DCYA (DEFENCE CYBER AGENCY) और I4C के माध्यम से समन्वय कर साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में प्रयास हो रहा है.इसके अलावा देश को नशामुक्त बनाने और आतंकवाद जैसी समस्याओं के आय के प्रमुख स्रोत ड्रग्स के गैर कानूनी व्यापार पर करारा प्रहार करते हुए लगातार उनको जब्त किया जा रहा है. साल 2024 में ही 25,330 करोड़ रुपये के ड्रग्स की जब्ती इस बात का पुख्ता प्रमाण है.
सीमा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान सीमावर्ती गांव में बसे ग्रामीणों का रहता है. उनके मन में अपने प्रति उपेक्षा भाव न रहे इसलिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2023को कहा था,''ये अंतिम गांव नहीं, भारत मां के प्रथम गांव हैं. VVP (VIBRANT VILLAGES PROGRAM) PHASE 1-2 के तहत 4121 गांवों के विकास के लिए करीब 11639 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है. इसके जरिए मौसम अनुकूल सड़क(ALL WEATHER ROAD), सौर उर्जा, मोबाइल कनेक्टिविटी, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यटन का ढांचा खड़ा किया जा रहा है. साल 2023 में लालकिला के मैदान में 600 सीमावर्ती गांवों के सरपंचों की सहभागिता ने सीमा और दिल्ली का संगम कर दिया है.
औपनिवेशिक गुलामी से मुक्ति
अपने पंच प्रण के संकल्प में भारत को गुलामी की मानसिकता से मुक्ति का आह्वान भी प्रधानमंत्री मोदी ने किया था. इसका अनुपालन करते हुए औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति और भारतीय स्वाभिमान में वृद्धि के अनेक प्रयास हुए हैं. IPC, CRPC की धाराएं अब भारतीय न्याय संहिता हो गई हैं. राजपथ अब कर्तव्यपथ ,सात रेस कोर्स रोड- सात लोक कल्याण मार्ग , प्रधानमंत्री कार्यालय सेवा तीर्थ और राजभवन अब लोकभवन हो गए हैं. चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) की नियुक्ति ने तीनों सेनाओं में समन्वय किया है. नेवी का प्रतीक चिन्ह अब ब्रिटिश दासता का स्मरण नहीं बल्कि छत्रपति शिवाजी का स्मरण कराता है,उसके तिरंगे में अष्टकोणीय चिन्ह के साथ शिवाजी की राजमुद्रा से अंकित और वेद मंत्र 'शं नो वरुण' और अशोक स्तम्भ का स्मरण कराता है. गणतंत्र दिवस के बाद सेना की ओर से आयोजित बीटिंग रिट्रीट परेड में अब अंग्रेजी धुन की जगह लता मंगेशकर के गाए 'ए मेरे वतन के लोगों' ने ले ली है. सेना में महिला सहभागिता, सैनिक स्कूलों में वृद्धि और अग्निवीर योजना से सुरक्षा तंत्र में समाज की सहभागिता बढ़ेगी.
प्रधानमंत्री मोदी के ऐतिहासिक सुरक्षा के प्रति किए गए निर्णय सदैव स्मरण किए जाएंगे. राष्ट्र की संप्रभुता, आर्थिक विकास, शांति सभी के लिए सुरक्षा अनिवार्य शर्त है. सुरक्षा के प्रति किए गए उपायों का ही परिणाम है कि आज देश गरीब कल्याण, ढांचागत और आर्थिक विकास कर अपने सांस्कृतिक मूल्यों को संरक्षित करते हुए विश्व में अपना गौरवपूर्ण स्थान बना रहा है. भारत सुरक्षा के प्रति सजग रहते हुए 2047 तक 'विकसित भारत' के अपने लक्ष्य प्राप्ति में सफल हो, यह सभी नागरिकों का संकल्प बनना चाहिए.
(डिस्क्लेमकर: लेखक बीजेपी के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री हैं. इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)