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This Article is From Jun 14, 2015

बाबा का ब्लॉग : बिहार में बीजेपी भी है तैयार

Manoranjan Bharti, Saad Bin Omer
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  • Updated:
    जून 14, 2015 17:49 pm IST
    • Published On जून 14, 2015 17:42 pm IST
    • Last Updated On जून 14, 2015 17:49 pm IST
बिहार में चुनावी जंग की तैयारी शुरू हो गई है। बीजेपी ने सबसे पहले जीतनराम मांझी को अपने पाले में किया, जबकि रामविलास पासवान उनके साथ पहले से ही हैं। इस तरह से बीजेपी ने एक तरह से पूरे दलित वोट को अपने कब्जे में करने की कोशिश की है। इससे दलितों में भी एक संदेश जाएगा।

वैसे लोकसभा चुनाव के दौरान उत्तर प्रदेश में बीजेपी ऐसा कर चुकी है। अगड़ी जातियों के साथ दलितों का वोट बैंक एक समय कांग्रेस के पास होता था, मगर यह कांशीराम के बहुजन समाज के उदय के पहले की बात है।

बीजेपी के पास कुशवाहा भी हैं, जिससे लव-कुश जाति के वोटों में भी सेंध लगेगा। बिहार में कुरमी और कोइरी यानि कुशवाहा जाति को लव-कुश जाति कहा जाता है। इन दोनों जातियों में आपस में शादियां भी होती हैं और राजनीति में दोनों साथ-साथ ही वोट करते रहे हैं।

लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने अलग दल बना कर इन दोनों जातियों के वोटों को अलग कर दिया। यह नीतीश कुमार के लिए चिंता की बात हो सकती है, क्योंकि अभी तक इन दोनों जातियों के 8 फीसदी वोटों पर नीतीश कुमार का एकछत्र राज था। यहां तक कि उन्हें इनसे वोट मांगने की भी जरूरत नहीं पड़ती थी।

दूसरी तरफ पप्पू यादव हैं, जिनका कोशी के इलाके में दबदबा है खास कर तीन जिले पूर्णिया, सहरसा और मधेपुरा में। सुपौल सीट पर उनकी पत्नी कांग्रेस से सांसद हैं और पप्पू यादव ने अपनी अलग पार्टी बना ली है। ऐसे में रंजीता रंजन के लिए धर्मसंकट वाली स्थिति पैदा हो गई कि वह पति की पार्टी के लिए वोट मांगें या कांग्रेस के लिए।

यही वजह है कि बिहार चुनाव में बीजेपी की भी तैयारी पूरी है। वह कहीं से भी लालू, नीतीश और कांग्रेस गठबंधन से उन्नीस नहीं है। फिर उसके पास नीतीश ब्रैंड को टक्कर देने के लिए प्राधनमंत्री मोदी जैसा नेता भी है।

हालांकि यहीं पर बीजेपी की एक कमजोर कड़ी भी दिखती है वह है बिहार में नीतीश के टक्कर का कोई नेता न होना। यही वजह है कि बीजेपी किसी को मुख्यमंत्री पद का दावेदार बना कर चुनाव नहीं लड़ सकती है।

एक तरफ बिहारी बाबू शत्रुघ्न सिन्हा मुंहफुलाए बैठे हैं। बिहार के बीजेपी नेताओं से उनकी बनती नहीं है। साथ ही उन्हें लगता है कि उन्हें केंद्र में मंत्री बनाया जाना चाहिए था। उन्हें यह भी लगता है कि यदि केवल सांसद बन कर ही रहना है, तो वह जेडीयू से भी बना जा सकता है।

अब देखना है कि बीजेपी बिहार में चुनाव प्रचार को कैसे संभालती है। मोदी कैबिनेट में बिहार से छह मंत्री हैं और बीजेपी का प्रचार का तरीका बिहार चुनाव को काफी रोचक बनाने वाला है।

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