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लड़कियों के वर्जिनिटी टेस्ट पर सवाल उठाती एक फिल्म, क्या है 'कुकरी रस्म'

हिमांशु जोशी
  • ब्लॉग,
  • Updated:
    अप्रैल 21, 2026 19:03 pm IST
    • Published On अप्रैल 21, 2026 19:03 pm IST
    • Last Updated On अप्रैल 21, 2026 19:03 pm IST
लड़कियों के वर्जिनिटी टेस्ट पर सवाल उठाती एक फिल्म, क्या है 'कुकरी रस्म'

महिलाओं को घर की चारदीवारी में सीमित रखने, ट्रांसमैन और वर्जिनिटी टेस्ट जैसे मुद्दों पर पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग ट्रस्ट की ओर से बनाई गई तीन डॉक्यूमेंट्री फिल्में देखने लायक हैं. ये फिल्में LGBTQ और महिला विमर्श पर आधारित हैं. इनका प्रदर्शन पिछले दिनों देहरादून की दून लाइब्रेरी में किया गया. 

माधुरी मोहिंदर निर्देशित 'Can't Hide Me' नाम की डॉक्यूमेंट्री में अलग-अलग राज्यों की कुछ महिलाओं को दिखाया गया है. ये महिलाएं उपेक्षित किए जाने के बाद भी डांस, स्पोर्ट्स, फोटोग्राफी जैसे क्षेत्रों में अपनी पहचान बना रही हैं.

क्या घर से बाहर जाकर लड़कियां बेकार हो जाती हैं

'औरत घर की जीनत है, बाहर के माहौल में घूमेगी तो बेकार हो जाएगी.', 'लड़की कलंक होती है, टाइम से शादी नहीं करोगी तो गलत काम कर सकती है.' जैसे कथनों के साथ डॉक्यूमेंट्री में हिना अपनी कहानी बताती हैं. हिना जिनकी जल्दी शादी कर दी गई थी. उनके पति ने उनके साथ मारपीट की. यहां तक कि उस पर चाकू से हमला भी किया. डॉक्यूमेंट्री दिखाती है कि महिलाएं घर में ही सुरक्षित नहीं हैं. लोगों के साक्षात्कार में उनकी विचारधारा दिखाई जाती है, वे कहते हैं कि बहन को बाहर भेजना और इज्जत नीलाम करना दोनों बराबर है. 

इसके बाद डॉक्यूमेंट्री में एक सफल महिला रग्बी खिलाड़ी का इंटरव्यू दिखाया जाता है, जिसका भारतीय टीम के लिए कैंप सिलेक्शन हुआ. मंगलौर में महिलाओं की कहानी देखते हुए हमें यक्षगान नृत्य शैली की जानकारी मिलती है, जिसमें महिलाओं की एंट्री बैन थी. लेकिन अब महिलाएं उस नृत्य शैली को सीखती हैं, इनमें स्कूल ड्रॉपआउट भी शामिल हैं. नृत्य के दौरान किसी महिला के निभाए किरदार को देखकर लोग पहचान नहीं सकते कि यह एक महिला है.

डॉक्यूमेंट्री में 'आवाज ए निस्वान ग्रुप' की महिलाओं की फोटोग्राफी को भी कवर किया गया है, वे बुर्का पहन कर भी फोटोग्राफी करती रहीं. पुरुषों के साक्षात्कार शामिल हैं, जो महिलाओं की ड्रेस और स्वतंत्रता पर अपने विचार रखते हैं. अधिकतर यही कहते हैं कि लड़कियां बाहर निकलेंगी तो परिवार का नाम खराब होगा. फोटोग्राफी सीखी हुई हीना की बेटी जब कहती है, ''मुझे भी सीखनी है फोटोग्राफी.'', यह दृश्य शानदार है और उम्मीद जगाता है कि महिलाएं बदल रही हैं.

क्या इज्जत का दूसरा नाम है लड़की

'My Sacred Glass Bowl' इस डॉक्यूमेंट्री में हम महिलाओं को ही महिलाओं का विरोध करते देखते हैं, साक्षात्कार में एक महिला लड़कियों के घर से बाहर ना निकलने को सही ठहराती है. प्रिया थुवासरी द्वारा निर्देशित इस डॉक्यूमेंट्री में हमें बाटला हाउस की रुखसाना तलत दिखती हैं. वो कहती हैं कि लड़कियों की वजह से उन पर प्रेशर होता है क्योंकि लड़कियों के लिए ज्यादा हिफाजत की जरूरत होती है. कुछ भी हो मां पर ही आरोप लगाया जाएगा कि क्या सही है और क्या गलत.

डॉक्यूमेंट्री में वर्जिनिटी टेस्ट को लेकर कुछ सिहरन पैदा करने वाली रिपोर्ट्स दिखाई गई है.'कुकरी रस्म' पर एक महिला कहती है कि सफेद पेटीकोट पहना कर लड़की को पति के पास भेजा जाता है, खून नहीं निकला तो पंचायत होगी और लड़की के भविष्य पर फैसला लिया जाता है. यह सब कुछ दर्शकों के लिए चौंकाने वाला और नया हो सकता है.

डॉक्यूमेंट्री में हम देखते हैं कि लोगों की मानसिकता है कि महिलाओं की चाल से पता चलता जाता है कि लड़की वर्जिन है या नहीं. इसके उदाहरण स्वरूप लड़के लड़कियों की चाल को दिखाया जाता है, यह डॉक्यूमेंट्री का सबसे शानदार हिस्सा है. इसमें यह भी कहा जाता है कि ऐसी बातें बस लड़कियों के लिए ही कही जाती हैं. सेब को वर्जिनिटी का प्रतीक के रूप में दिखाया जाना भी निर्देशक की रचनात्मकता का उत्कृष्ट उदाहरण है.

ट्रांसमैन के लिए अधिकार पर बात करती 'Please Mind the Gap'

मिताली त्रिवेदी और गगनदीप सिंह द्वारा निर्देशित डॉक्यूमेंट्री 'Please Mind the Gap' ट्रांसमैन श्वेतांजलि डॉन की कहानी है. उन्होंने इसमें अपने शरीर के बदलावों और जीवन में आने वाली चुनौतियों पर खुलकर बातचीत की है और यह दर्शकों के लिए बिल्कुल नया विषय है.

इस तरह की डॉक्यूमेंट्री देखनी और प्रसारित की जानी बहुत जरूरी लगती है क्योंकि इन विषयों पर अज्ञानता ही समाज में भ्रम और सवाल पैदा करती है.डॉक्यूमेंट्री के मुख्य किरदार अपने लिए 'भाई' और 'लड़का' जैसे शब्दों में संतुष्टि महसूस करता है. वह पब्लिक टॉयलेट में जाने के अपने अनुभव साझा करता है, जिसमें उसके लिए अजीब स्थिति बन जाती है.ऐसा ही कुछ मेट्रो स्टेशन में एंट्री पर चेकिंग के दौरान श्वेतांजलि के साथ हमेशा घटित होता है, जब चेकिंग के दौरान उसके शरीर को हाथ लगाया जाता है और यह दृश्य ट्रांसमैन के लिए अलग से अधिकार लागू करवाने की पैरवी करता है.डॉक्यूमेंट्री शानदार ढंग से फिल्माई गई है. इसमें श्वेतांजलि को महिलाओं के लिए आरक्षित डिब्बे में चढ़ते और महिलाओं को उसे घूरते हुए दिखाया गया है.

(डिस्क्लेमर: इस लेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी हैं, उनसे एनडीटीवी का सहमत या असहमत होना जरूरी नहीं है.)

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