बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार (फाइल फोटो)
पटना:
कई वर्षों के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मंगलवार को अहमदाबाद जा रहे हैं. जहां वो विजय रूपाणी के नेतृत्व में नई सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होंगे. ये पहला मौक़ा है जब इस साल जुलाई में भाजपा के साथ सरकार बनाने के बाद और एनडीए में शामिल होने के बाद किसी भाजपा के मुख्यमंत्री के शपथ ग्रहण समारोह में नीतीश मौजूद रहेंगे. हालांकि 2013 तक जब नीतीश भाजपा के साथ सरकार चला भी रहे थे तब नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण से दूर रहते थे. हालांकि नीतीश ने भी बिहार में 2007 से 2010 तक के विधानसभा चुनाव में उन्हें प्रचार नहीं करने दिया. लेकिन गठबंधन टूटने के बाद मोदी ना केवल प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने बल्कि प्रधानमंत्री भी बने और उसके बाद पार्टी के प्रचार का नेतृत्व किया.
लेकिन पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिवालय में सूत्रों का कहना है कि नीतीश, विजय रूपाणी के आमंत्रण पर जा रहे हैं. नीतीश ने गुजरात चुनाव में जीत के बाद ट्वीट और फ़ोन कर रूपाणी को बधाई दी थी. हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि बदली हुई परिस्थिति में नीतीश कुमार के पास अब ज़्यादा विकल्प नहीं बचा और उन्हें अब गठबंधन धर्म निभाना होगा.
नीतीश भी जानते हैं कि जिस मुस्लिम वोट के चक्कर में वो मोदी और गुजरात से दूरी बनाये रखते थे वो लालू के साथ तालमेल तोड़ने के बाद फ़िलहाल कुछ चुनाव में उनके ख़िलाफ़ ही वोट देगा. लेकिन राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी अब अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगे हैं और गुजरात के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद इस बात का अंदाज़ा हो गया है कि पटेल समुदय का एक तबक़ा भाजपा से नाराज़ चल रहा है. नीतीश भले कोई बड़ा असर नहीं डाल सकते लेकिन नाराज़ पटेलों को शांत करने में उनकी भूमिका को नज़रंदाज नहीं किया जा सकता.
VIDEO: बीजेपी को गुजरात में कोई खतरा नहीं है : नीतीश कुमार
लेकिन पटना में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सचिवालय में सूत्रों का कहना है कि नीतीश, विजय रूपाणी के आमंत्रण पर जा रहे हैं. नीतीश ने गुजरात चुनाव में जीत के बाद ट्वीट और फ़ोन कर रूपाणी को बधाई दी थी. हालांकि भाजपा नेताओं का कहना है कि बदली हुई परिस्थिति में नीतीश कुमार के पास अब ज़्यादा विकल्प नहीं बचा और उन्हें अब गठबंधन धर्म निभाना होगा.
नीतीश भी जानते हैं कि जिस मुस्लिम वोट के चक्कर में वो मोदी और गुजरात से दूरी बनाये रखते थे वो लालू के साथ तालमेल तोड़ने के बाद फ़िलहाल कुछ चुनाव में उनके ख़िलाफ़ ही वोट देगा. लेकिन राजनीतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि प्रधानमंत्री मोदी अब अगले लोकसभा चुनाव की तैयारी में लगे हैं और गुजरात के विधानसभा चुनाव के परिणाम के बाद इस बात का अंदाज़ा हो गया है कि पटेल समुदय का एक तबक़ा भाजपा से नाराज़ चल रहा है. नीतीश भले कोई बड़ा असर नहीं डाल सकते लेकिन नाराज़ पटेलों को शांत करने में उनकी भूमिका को नज़रंदाज नहीं किया जा सकता.
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