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This Article is From Aug 14, 2017

शरद यादव : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देना चाहेंगे 'धन्यवाद'

उन्होंने कहा, "उन्होंने हमेशा मेरी भावनाओं का सम्मान किया, और हमने एक साथ कुछ अच्छे काम किए..."

शरद यादव : बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को देना चाहेंगे 'धन्यवाद'
शरद यादव (फाइल फोटो)
  • शरद यादव ने कहा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'धन्यवाद' देना चाहेंगे
  • कहा : उन्होंने हमेशा मेरी भावनाओं का सम्मान किया
  • हमने एक साथ कुछ अच्छे काम किए..."
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जेडीयू के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने NDTV से कहा है कि वह बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को 'धन्यवाद' देना चाहेंगे, जिनके निर्देश पर शरद यादव को राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से हाल ही में हटाया गया है. लेकिन मुख्यमंत्री तथा पार्टी अध्यक्ष के खिलाफ शरद यादव पूरी तरह कटाक्ष करने के मूड में नहीं दिखे, और उन्होंने कहा, "उन्होंने हमेशा मेरी भावनाओं का सम्मान किया, और हमने एक साथ कुछ अच्छे काम किए..."

शरद यादव के बदलते सुर सोची-समझी रणनीति का हिस्सा प्रतीत होते हैं, क्योंकि 26 जुलाई को नीतीश कुमार द्वारा भारतीय जनता पार्टी, यानी बीजेपी से दोबारा संबंध जोड़ लेने के बाद से शरद यादव कहते आ रहे थे कि अब उनकी राहें कतई अलग होंगी. सच्चाई यह भी है कि भले ही जेडीयू की 14 राज्य इकाइयों ने लिखित में शरद यादव का समर्थन किया है, लेकिन बिहार में पार्टी के 71 में से एक भी विधायक शरद यादव के साथ नहीं दिखा, जब वह पिछले सप्ताह राज्य में दौरा कर रहे थे.

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नीतीश कुमार ने वर्ष 2003 में अपनी समता पार्टी का विलय शरद यादव के जनता दल में किया था. वे लोग 17 साल तक बीजेपी-नीत गठबंधन का हिस्सा रहे. जब वर्ष 2013 में बीजेपी ने गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित किया, तो नीतीश कुमार ने गठबंधन से रिश्ता तोड़ लिया था. इसकी उन्हें भारी कीमत भी चुकानी पड़ी. वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में लोकप्रिय नेताओं में शुमार किए जाने वाले नीतीश कुमार की पार्टी को बिहार में सिर्फ दो लोकसभा सीटों पर जीत हासिल हुई, जबकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीजेपी ने 30 से ज़्यादा सीटें पाईं.

बिहार में विधानसभा चुनाव का वक्त आने पर अपना दोबारा चुना जाना सुनिश्चित करने के लिए नीतीश कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल, यानी आरजेडी के नेता लालू यादव से मतभेदों को पूरी तरह भुला दिया और आरजेडी व कांग्रेस के साथ महागठबंधन बना लिया, और बिहार की सत्ता पर भी काबिज होने के प्रधानमंत्री के इरादों को नाकाम कर दिया.

लेकिन लालू और नीतीश की इस साझीदारी में हमेशा दिक्कतें बनी रहीं, और लालू तथा उनके परिवार के खिलाफ भ्रष्टाचार के मामले सामने आ जाने के बाद मामला पूरी तरह बिगड़ गया. अपनी 'अंतरात्मा' का हवाला देते हुए नीतीश कुमार गठबंधन से अलग हो गए, और साफ दिख रहा था कि वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारियां पहले ही की गई थीं. एक ही घंटे बाद नीतीश कुमार फिर बीजेपी के साथ आ गए, और नई सरकार का गठन कर लिया.

इस सप्ताहांत में पटना में होने वाली जेडीयू की बैठक में शरद यादव शिरकत नहीं करेंगे, जिसमें नीतीश कुमार द्वारा शरद यादव को पार्टी से निकाले जाने तथा बीजेपी के राष्ट्रीय गठबंधन में फिर शामिल होने की घोषणा की जा सकती है. शरद यादव ने स्पष्ट कर दिया है कि वह कांग्रेस के नेतृत्व में तैयार किए जा रहे 17 पार्टियों के उस गठबंधन का साथ देंगे, जिसमें लालू प्रसाद यादव भी शामिल हैं.

नीतीश कुमार की आलोचना करने के अपने हालिया रुख से अलग हटते हुए शरद यादव ने NDTV.com से कहा, "मैंने नीतीश के लिए बहुत कुछ किया, और उन्होंने मेरे लिए बहुत कुछ किया... लेकिन मैं बीजेपी के पास वापस लौटने के कदम का साथ नहीं दे सकता..."

Video  : शरद यादव- बिहार में दो जनता दल, एक सरकारी और एक जनता का

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