NDTV से बोले बिहार के स्वास्थ्य मंत्री- कोरोना अस्पतालों में शवों को अलग रखने के दिए गए निर्देश

बिहार सरकार हर दिन पटना के अस्पतालों के कोविड वार्ड से मृत व्यक्तियों के वीडियो वायरल होने पर चिंतित है. अब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अस्पतालों को हिदायत दी है कि वो इन शवों को वार्ड में न छोड़कर अलग रखें.

NDTV से बोले बिहार के स्वास्थ्य मंत्री- कोरोना अस्पतालों में शवों को अलग रखने के दिए गए निर्देश

Bihar Coronavirus News : NMCH वार्ड में शव के साथ रहने को मजबूर दूसरे मरीज.

नई दिल्ली:

बिहार सरकार हर दिन पटना के अस्पतालों के कोविड वार्ड से मृत व्यक्तियों के वीडियो वायरल होने पर चिंतित है. अब राज्य के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अस्पतालों को हिदायत दी है कि वो इन शवों को वार्ड में न छोड़कर अलग रखें. NDTV से बातचीत में मंगल पांडेय ने माना कि ये चिंता का विषय है. हालांकि उन्होंने कहा कि कोविड मरीजों की इलाज के दौरान मौत हो जाने पर शवों के अंत्योष्टि को लेकर नियम बना हुआ है, जिसे हमें फॉलो करना होता है.

उन्होंने कहा कि शव को हम सामान्य लोगों की तरह से नहीं दे सकते हैं. हमें उसे पहले लेप लगाकर स्पेशल पैकिंग करनी होती है फिर उनके परिवार वालों को सूचित करना होता है. इसके बाद जिला प्रशासन द्वारा परिवार के लोगों की उपस्थिति में उसकी अंत्येष्टि की जाती है. राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने माना कि पिछले एक हफ्ते के दौरान जैसे-जैसे जांच बढ़ी है, राज्य में जो संक्रमित मरीज़ों की संख्या है उसका प्रतिशत 10 से 15 प्रतिशत रहा है. इस वजह से कुल मरीजों की संख्या बढ़ी तो है, लेकिन संक्रमण की चेन को तोड़ने के लिए अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है. मंगल पांडेय के अनुसार, जांच अनुमंडल अस्पताल से प्राथमिक जांच केंद्र तक ले जाया जा रहा है. 

हालांकि बढ़ते मरीजों की संख्या के मद्देनज़र क्या राज्य सरकार के पास उतने बेड हैं? इस सवाल के जवाब पर मंगल पांडेय ने कहा कि जिनमें लक्षण नहीं हैं उन्हें घर पर ही रखा जायेगा, लेकिन जिसे डॉक्टर या मॉनिटरिंग की जरूरत है उन्हें अस्पताल में रखा जाएगा.


राज्य में अब निजी अस्पताल भी अगले कुछ दिनों में कोविड मरीज़ को भर्ती कर सकते हैं. जांच के बाद रिपोर्ट में देरी पर पांडेय ने माना कि कई लैब कर्मचारियों के संक्रमित होने के कारण कुछ दिन बंद हो जाते हैं जिससे एक बैक्लॉग हो जाता है. आखिर राज्य सरकार के मंत्री, विधायक या अधिकारी बिहार सरकार के अस्पताल के बजाय AIIMS में ही इलाज क्यों कराना पसंद करते हैं? इसपर मंगल पांडेय का कहना था कि सब सरकार के द्वारा संचालित है और ये सब जहां जिसे बेड मिलता है वहां इलाज के लिए भर्ती हो जाते हैं. 

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