प्रतीकात्मक इमेज
- शिक्षा विभाग की नई रेटिंग में शिक्षामंत्री का जिला ही सबसे फिसड्डी
- शिक्षामंत्री कृष्णा नंदन वर्मा का गृह जिला जहानाबाद रेटिंग में सबसे नीचे
- राजधानी पटना 16वें स्थान पर है
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पटना:
यूं तो मुख्यमंत्री और मंत्रियों की अपने गृह जिला पर विशेष कृपा होती है. लेकिन बिहार के शिक्षा मंत्री कृष्णा नंदन वर्मा इस मामले में अपवाद नजर आते हैं. राज्य के शिक्षा विभाग के विभिन्न मानकों पर एक नयी रेटिंग व्यवस्था में मंत्री कृष्णा नंदन वर्मा का गृह जिला जहानाबाद सबसे नीचे आया है. दरअसल,बिहार के शिक्षा विभाग के इस सर्वे में बेगूसराय और पश्चिम चंपारण जिला सबसे अव्वल नम्बर पर है. वहीं, राजधानी पटना 16वें स्थान पर है. ये ग्रेडिंग सिस्टम पहली बार राज्य के विद्यालयों और जिला में शिक्षा की व्यवस्था से संबंधित है.
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इस ग्रेडिंग सिस्टम में जिन सात बिंदुओं को नम्बर का पैमाना बनाया गया है, उसमें संबंधित जिले से मैट्रिक की परीक्षा में पास विद्यार्थियों की संख्या, स्कूल में नामांकन के बदले छात्रों की असल उपस्थिति, आधार प्राप्त छात्रों की संख्या, नशा मुक्ति और बाल विवाह के लिए अभियान प्रमुख है. सभी पैमाने के साथ एक निश्चित नम्बर निर्धारित किया गया है.
VIDEO: बिहार में शिक्षा व्यवस्था इतनी बदहाल क्यों?
इस संबंध में राज्य सरकार का कहना है कि इस ग्रेडिंग सिस्टम के पीछे असल मकसद जिलों के बीच एक प्रतिस्पर्धा हो और सभी में अपनी स्थिति सुधारने की होड़ लगे, यह एक मुख्य मकसद है. निश्चित रूप से शिक्षा मंत्री के लिए शुरुआती वर्ष का ग्रेडिंग खराब रहा, लेकिन सबकी निगाहें अगले साल के सर्वे पर होगी कि क्या शिक्षा मंत्री अपने गृह जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधार पाते हैं.
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इस ग्रेडिंग सिस्टम में जिन सात बिंदुओं को नम्बर का पैमाना बनाया गया है, उसमें संबंधित जिले से मैट्रिक की परीक्षा में पास विद्यार्थियों की संख्या, स्कूल में नामांकन के बदले छात्रों की असल उपस्थिति, आधार प्राप्त छात्रों की संख्या, नशा मुक्ति और बाल विवाह के लिए अभियान प्रमुख है. सभी पैमाने के साथ एक निश्चित नम्बर निर्धारित किया गया है.
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इस संबंध में राज्य सरकार का कहना है कि इस ग्रेडिंग सिस्टम के पीछे असल मकसद जिलों के बीच एक प्रतिस्पर्धा हो और सभी में अपनी स्थिति सुधारने की होड़ लगे, यह एक मुख्य मकसद है. निश्चित रूप से शिक्षा मंत्री के लिए शुरुआती वर्ष का ग्रेडिंग खराब रहा, लेकिन सबकी निगाहें अगले साल के सर्वे पर होगी कि क्या शिक्षा मंत्री अपने गृह जिले में शिक्षा व्यवस्था को सुधार पाते हैं.
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