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Exclusive: EO के हत्यारे रामधनी का खौफनाक इतिहास, कभी कत्ल कर कटा सिर लेकर पहुंचा था थाने... पढ़ें पूरी कुंडली

रामधनी ने अपने बेटों को सत्ता के गलियारों में सेट कर दिया था. बड़ा बेटा (सन्नी) MLC प्रतिनिधि है. वहीं, दूसरा बेटा (मनीष) चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) का युवा जिला अध्यक्ष है और रामधनी बड़े नेताओं का करीबी माना जाता था. 

Exclusive: EO के हत्यारे रामधनी का खौफनाक इतिहास, कभी कत्ल कर कटा सिर लेकर पहुंचा था थाने... पढ़ें पूरी कुंडली

Bihar News: भागलपुर के सुल्तानगंज में अपराधी रामधनी यादव का अंत बिल्कुल वैसा ही हुआ, जैसा उसका खौफनाक इतिहास था. एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (EO) की हत्या और चेयरमैन पर जानलेवा हमले के बाद पुलिस एनकाउंटर में रामधनी मारा गया. शुरुआती दौर में रामधनी यादव कभी घर-घर जाकर दूध बेचता था और आर्थिक तंगी के कारण उसका परिवार झोपड़ी में रहता था. अपराध की दुनिया में उसका नाम तब गूंजा, जब उसने वर्ष 2000 में एक कारोबारी की सनसनीखेज हत्या कर उसका कटा हुआ सिर लेकर खुद थाने पहुंच गया. इसके बाद रामधनी यादव के अपराध का ग्राफ ऐसा बढ़ा कि उसने जेल से बाहर आने के बाद पीछे मुड़कर नहीं देखा. हत्या, लूट और रंगदारी के दर्जनों मामले उस पर दर्ज होते गए.

पत्नी कभी स्कूल में बनाती थी खाना

जिस वक्त रामधनी अपराध की सीढ़ियां चढ़ रहा था, उसकी पत्नी नीलम देवी एक प्राइमरी स्कूल में रसोइया (खाना बनाने वाली) का काम करती थी. सियासी रसूख दिखाकर रामधनी ने अपनी बाहुबल और धनबल का इस्तेमाल राजनीति में किया. 2017 में पत्नी को वार्ड पार्षद बनाया और 2019 में अविश्वास प्रस्ताव की 'साजिश' रचकर उसे चेयरमैन की कुर्सी पर बिठा दिया.

बेटों को सत्ता के गलियारों में कर दिया था सेट

कभी झोपड़ी में रहने वाला यह परिवार आज 5 करोड़ से ज्यादा की अकूत संपत्ति, आलीशान मकान और लग्जरी गाड़ियों का मालिक बन गया. रामधनी ने अपने बेटों को सत्ता के गलियारों में सेट कर दिया था. बड़ा बेटा (सन्नी) MLC प्रतिनिधि है. वहीं, दूसरा बेटा (मनीष) चिराग पासवान की पार्टी (LJP-R) का युवा जिला अध्यक्ष है और रामधनी खुद बड़े नेताओं का करीबी माना जाता था. 

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चेयरमैन पर फायरिंग में ईओ को मारी गोली

मंगलवार शाम नगर परिषद दफ्तर में तालाब और होर्डिंग की बोली लग रही थी. जो विवाद की वजह बना. जिसके बाद हाफ पैंट पहने रामधनी झोले में हथियार छिपाकर चेयरमैन राजकुमार गुड्डू के दफ्तर में घुसा. उसने चेयरमैन पर फायरिंग की, लेकिन बीच-बचाव करने आए एग्जीक्यूटिव अफसर कृष्णा भूषण कुमार को गोली लग गई और उनकी मौके पर ही मौत हो गई. यह पूरी वारदात CCTV में कैद हो गई. 

जैसे खौफनाक इतिहास, वैसे हुआ अंत

पहचान उजागर होने के डर से रामधनी ने रात 8 बजे खुद थाने जाकर सरेंडर कर दिया. जब पुलिस उसे हथियार बरामदगी के लिए सुनसान इलाके में ले गई, तो रामधनी ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर पुलिस पर ही हमला बोल दिया. इस गोलीबारी में DSP सहित तीन पुलिसकर्मी घायल हुए. पुलिस की जवाबी फायरिंग में एक गोली रामधनी के सीने में लगी. अस्पताल ले जाते समय 'सुल्तानगंज के इस आतंक' का अंत हो गया. कभी पत्नी के रसोइया की आय पर पलने वाला रामधनी, सत्ता और अपराध के गठजोड़ से करोड़ों का मालिक तो बना, लेकिन कानून के शिकंजे से नहीं बच सका.

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