
नई दिल्ली:
असम विधानसभा चुनावों में दोनों राष्ट्रीय पार्टियों के बीच चल रहे सीधे मुकाबले में इस बार दिल्ली के चेहरों की तुलना में स्थानीय नेताओं का बोलबाला है।
तीन बार से मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के तरुण गोगोई से टक्कर लेने के लिए बीजेपी ने असम गण परिषद और कांग्रेस के कुछ विद्रोही नेताओं के साथ मिलकर अपनी टीम तैयार की है। आपको बता दें कि 2014 में हुए लोकसभा चुनावों शानदार प्रदर्शन करने वाली बीजेपी का उससे पहले असम में कोई खास जनाधार नहीं था।
बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार 53 वर्षी सर्वानंद सोनोवाल केंद्र में मंत्री भी हैं लेकिन एजीपी के इस पूर्व नेता की दिल्ली में यह पहली ही पारी है। 2011 में वह बीजेपी में शामिल हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे। 
बीजेपी में 47 वर्षीय हिमंत विश्व शर्मा भी हैं जिन्हें कभी कांग्रेस में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का उत्तराधिकारी माना जाता था। लेकिन उन्होंने गोगोई के खिलाफ बगावत कर दी और अब 2014 के लोकसभा चुनावों की तरह ही राज्य में बीजेपी के क्लीन स्वीप की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
सोनोवाल ने एनडीटीवी से कहा, हिमंता और मैं एक टीम की तरह काम करते हैं। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि असम में हर कोई बदलाव चाहता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में धुआंधार चुनाव प्रचार किया और अपनी रैलियों में न केवल तरुण गोगोई पर निशाना साधा बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भी हमले किए हैं। एक रैली में पीएम मोदी ने कहा, गोगोई जल्दी ही 90 वर्ष के हो जाएंगे और उन्हें अब रिटायर हो ही जाना चाहिए। गोगोई 81 वर्ष के हो गए हैं और सक्रीय राजनीति छोड़ना तो दूर, वो चौथी बार मुख्यमंत्री बनना चाह रहे हैं।
कांग्रेस जहां अपने दम पर अकेले ही असम में चुनाव लड़ रही है वहीं बीजेपी ने क्षेत्रीय पार्टियों प्रफुल्ल कुमार महंत की एजीपी और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ गठबंधन किया है।
वहीं एक तरफ हैं बदरुद्दीन अजमल जो कि बांग्ला बोलने वाले मौलवी और व्यापारी हैं, और जिसे लेकर कांग्रेस चिंतित है। कांग्रेस को डर है कि अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) राज्य में उसके परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक जिसकी संख्या करीब 1 करोड़ 10 लाख है, में सेंध ना लगा दे। 
वहीं मौलाना अजमल का कहना है कि राज्य में कोई भी पार्टी उनके सहयोग के बिना सरकार नहीं बना पाएगी।
असम में दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं, सोमवार 4 अप्रैल को 65 सीटों पर मतदान हो चुका है जबकि बाकी की 61 सीटों पर अगले सोमवार 11 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। 19 मई को अन्य 4 राज्यों के साथ ही वोटों की गिनती होगी।
तीन बार से मुख्यमंत्री रहे कांग्रेस के तरुण गोगोई से टक्कर लेने के लिए बीजेपी ने असम गण परिषद और कांग्रेस के कुछ विद्रोही नेताओं के साथ मिलकर अपनी टीम तैयार की है। आपको बता दें कि 2014 में हुए लोकसभा चुनावों शानदार प्रदर्शन करने वाली बीजेपी का उससे पहले असम में कोई खास जनाधार नहीं था।
बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार 53 वर्षी सर्वानंद सोनोवाल केंद्र में मंत्री भी हैं लेकिन एजीपी के इस पूर्व नेता की दिल्ली में यह पहली ही पारी है। 2011 में वह बीजेपी में शामिल हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष भी रहे।

बीजेपी में 47 वर्षीय हिमंत विश्व शर्मा भी हैं जिन्हें कभी कांग्रेस में मुख्यमंत्री तरुण गोगोई का उत्तराधिकारी माना जाता था। लेकिन उन्होंने गोगोई के खिलाफ बगावत कर दी और अब 2014 के लोकसभा चुनावों की तरह ही राज्य में बीजेपी के क्लीन स्वीप की भविष्यवाणी कर रहे हैं।
सोनोवाल ने एनडीटीवी से कहा, हिमंता और मैं एक टीम की तरह काम करते हैं। उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि असम में हर कोई बदलाव चाहता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य में धुआंधार चुनाव प्रचार किया और अपनी रैलियों में न केवल तरुण गोगोई पर निशाना साधा बल्कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भी हमले किए हैं। एक रैली में पीएम मोदी ने कहा, गोगोई जल्दी ही 90 वर्ष के हो जाएंगे और उन्हें अब रिटायर हो ही जाना चाहिए। गोगोई 81 वर्ष के हो गए हैं और सक्रीय राजनीति छोड़ना तो दूर, वो चौथी बार मुख्यमंत्री बनना चाह रहे हैं।
कांग्रेस जहां अपने दम पर अकेले ही असम में चुनाव लड़ रही है वहीं बीजेपी ने क्षेत्रीय पार्टियों प्रफुल्ल कुमार महंत की एजीपी और बोडोलैंड पीपल्स फ्रंट (बीपीएफ) के साथ गठबंधन किया है।
वहीं एक तरफ हैं बदरुद्दीन अजमल जो कि बांग्ला बोलने वाले मौलवी और व्यापारी हैं, और जिसे लेकर कांग्रेस चिंतित है। कांग्रेस को डर है कि अजमल की पार्टी ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (एआईयूडीएफ) राज्य में उसके परंपरागत मुस्लिम वोट बैंक जिसकी संख्या करीब 1 करोड़ 10 लाख है, में सेंध ना लगा दे।

वहीं मौलाना अजमल का कहना है कि राज्य में कोई भी पार्टी उनके सहयोग के बिना सरकार नहीं बना पाएगी।
असम में दो चरणों में चुनाव हो रहे हैं, सोमवार 4 अप्रैल को 65 सीटों पर मतदान हो चुका है जबकि बाकी की 61 सीटों पर अगले सोमवार 11 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे। 19 मई को अन्य 4 राज्यों के साथ ही वोटों की गिनती होगी।
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