
भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हर्षवर्धन ने रविवार की रात कहा कि वह दिल्ली में सरकार बनाने का दावा नहीं करेंगे क्योंकि उनकी पार्टी के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है और संख्या बल जुटाने के लिए विधायकों की 'खरीद-फरोख्त' में शामिल होने की बजाय वह विपक्ष में बैठना पसंद करेंगे।
दिल्ली विधानसभा चुनाव में 31 सीटें हासिल करके भाजपा सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में उभरी है। 70 सदस्यीय विधानसभा में बहुमत के लिए उसे 36 सीटों की दरकार है।
उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं पता कि क्या होने वाला है, लेकिन मैं खुद को बेबस महसूस कर रहा हूं क्योंकि जहां मैंने उन्हें एक पारदर्शी प्रशासन देने का वादा किया था वहीं मेरे पास दिल्ली में सरकार बनाने का दावा करने के लिए जरूरी संख्या बल नहीं है। इसलिए मैं सच में नहीं जानता कि क्या होने वाला है।'
उन्होंने कहा, 'चूंकि मेरे पास 36 का जादुई आंकड़ा नहीं है इसलिए मैं दिल्ली में सरकार के गठन का हिस्सा नहीं हो सकता, लेकिन मैं पूरे समर्पण और जिम्मेदारी के साथ जनता की सेवा करता रहूंगा। मैं निस्वार्थ भाव से विपक्ष में बैठना पसंद करूंगा और किसी के भी द्वारा बनाई जाने वाली सरकार को जनसेवा के लिए पूरा सहयोग दूंगा।'
वर्धन ने कहा कि जहां तक उनका सवाल है, वह प्रत्यक्ष अथवा परोक्ष रूप से ऐसा कोई काम नहीं करेंगे, जिसे विधायकों की खरीदफरोख्त माना जा सकता हो।
उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि उन्होंने और उनकी पार्टी ने आप की ताकत को समझने में गलती की।
उन्होंने कहा, 'मैं ईमानदारी से स्वीकार करता हूं कि मैंने आप को मिल रहे समर्थन को कम करके आंका। मैं चुनाव में अच्छे प्रदर्शन के लिए केजरीवाल को बधाई देना चाहूंगा। मुझे लगता है कि हमने उनकी मौजूदगी को कम करके आंका। मुझे नहीं लगता कि सांगठनिक तौर पर हमें आप से कुछ सीखने की जरूरत है।'
वर्धन ने कहा, 'सांगठनिक रूप से हम बेहतर हैं। नयी पार्टी के प्रति हमेशा एक उत्साह होता है। लोगों ने अन्ना हजारे के आंदोलन का भी समर्थन किया था, जो एक निस्वार्थ आंदोलन था। यह पार्टी आंदोलन की उपज के तौर पर सामने आई।'
उन्होंने कहा कि आप ने बहुत ऊंचे मनोबल के साथ बहुत सी अच्छी बातें दिखाकर शुरुआत तो की थी, लेकिन मुझे दुख है कि वह अपने वादे के अनुसार बहुत सी चीजें नहीं कर सके।
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं