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पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में आना चाहिए? ड्यूटी घटने के बाद राज्यों ने नहीं घटाया टैक्स

केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10-10 रुपये प्रति लीटर कम की है, लेकिन राज्य सरकारें वैट नहीं घटा रही हैं, जिससे तेल कंपनियों के घाटे में कमी नहीं आई. ऐसे में पेट्रोल-डीजल को GST में शामिल करने की चर्चा है, ताकि टैक्स एकसमान हो और आर्थिक बोझ कम हो सके, जिससे तेल कंपनियों को राहत मिल सके.

पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में आना चाहिए? ड्यूटी घटने के बाद राज्यों ने नहीं घटाया टैक्स
  • मिडिल ईस्‍ट में जारी युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत अप्रैल 2026 में अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल 120 तक पहुंचीं
  • केंद्र सरकार ने बढ़ती अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों के बीच पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये घटाई
  • राज्य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर वैट और सेल्स टैक्स में कोई कमी नहीं की
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नई दिल्‍ली:

मिडिल ईस्‍ट संकट के बीच कच्‍चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं. दुनिया के कई देश कच्‍चे तेल की कमी से जूझ रहे हैं. भारत में भी इसका कुछ प्रभाव देखने को मिल रहा है. यहां पेट्रोल और डीजल के दाम तेल कंपनियों ने नहीं बढ़ाए हैं. ऐसे में तेल कंपनियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. इस संकट की घड़ी में लोगों को राहत देने और तेल कंपनियों का घाटा कम करने के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल की एक्‍साइज ड्यूटी में 10-10 रुपये प्रति लीटर की दर से कटौती की. लेकिन राज्‍य सरकारों ने पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट और सेल्‍स टैक्‍स में कोई कमी नहीं की है. ऐसे में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में शामिल करने की चर्चा हो रही है. एक्‍सपर्ट्स कहते हैं कि GST व्यवस्था में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को शामिल करने से देश में एक सामान टैक्स लगाना संभव हो सकेगा. 

120 रुपये प्रति बैरल तक पहुंचे कच्‍चे तेल के दाम 

मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से कच्चा तेल महंगा होता जा रहा है. पेट्रोलियम मंत्रालय की पेट्रोलियम प्‍लानिंग एंड एनालिसिस सेल (PPAC) की ताज़ा रिपोर्ट के मुताबिक, मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से 01 अप्रैल, 2026 को कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत बढ़कर US$ 120.84/बैरल के ऊंचे स्तर पर पहुंच गई. ऐसे में तेल  पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, युद्ध शुरू होने से पहले फरवरी, 2026 में कच्चे तेल (भारतीय बास्केट) की औसत कीमत 69.01 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल थी. यानी, मध्यपूर्व युद्ध एशिया में युद्ध की वजह से कच्चा तेल फरवरी, 2026 की औसत कीमत के मुकाबले अप्रैल के शुरुआत तक 51.83 डॉलर प्रति बैरल तक महंगा हो चुका है, यानि 75.10% तक महंगा. मार्च महीने के दौरान भी कच्चे तेल की औसत कीमत 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर रही थी.

केंद्र सरकार ने घटाई एक्साइज ड्यूटी

भारत अपनी जरूरत का 85% से ज़्यादा कच्चा तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार से आयात करता है. ऐसे में कच्चे तेल के आयात पर कुल खर्च 75% से ज़्यादा बढ़ चुका है. सरकारी तेल कंपनियों पर तेल आयात के बढ़ते बोझ को कम करने के लिए भारत सरकार ने करीब एक हफ्ते पहले 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी 10 रुपये प्रति लीटर घटाने का फैसला किया. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पूरी ने सोशल मीडिया प्लेटफार्म X पर ट्वीट कर कहा, "मोदी सरकार के पास दो विकल्प थे- या तो भारत के नागरिकों के लिए कीमतों में भारी वृद्धि करें जैसा कि अन्य सभी देशों ने किया है या भारतीय नागरिकों को अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता से बचाने के लिए सरकार इसका वित्तीय बोझ खुद उठाये. सरकार ने इस आसमान छूती अंतरराष्ट्रीय कीमतों के समय तेल कंपनियों के बढ़ते घाटे (पेट्रोल के लिए लगभग 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल के लिए 30 रुपये प्रति लीटर) को कम करने के लिए टेक्‍सेशन रेवेन्‍यू  छोड़ने का फैसला किया है."  

तेल कंपनियों को अभी पेट्रोल-डीजल पर कितना घाटा? 

जाहिर है, एक्साइज ड्यूटी में केंद्र सरकार द्वारा बड़ी कटौती के बाद भी पिछले हफ्ते तक तेल कंपनियों का घाटा पेट्रोल पर लगभग 14 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 20 रुपये प्रति लीटर था! लेकिन ये महत्वपूर्ण है कि केंद्र सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी को घटा दिया है, लेकिन राज्यों ने VAT/Sales Tax में कोई कमी नहीं किया है. मध्य पूर्व युद्ध के कारण ईंधन की बढ़ती कीमतों के बीच नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 1 अप्रैल, 2026 को राज्य सरकारों से एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) पर VAT कम करने की अपील किया. लेकिन राज्यों की तरफ अभी तक कोई पहल इस दिशा में नहीं की गई है.

राज्य सरकारों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले वैट/सेल्‍स टैक्‍स से हर साल लाखों करोड़ रुपये की कमाई होती है. इसीलिए, संकट के इस दौर में भी राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर वैट/सेल्‍स टैक्‍स घटाने के लिए तैयार नहीं हैं. उदहारण के लिए, इंडियन ऑयल के ताज़ा आंकड़ों के मुताबिक...

  • 1 अप्रैल, 2026 को दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 94.77 प्रति लीटर थी.
  • इसमें राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले VAT की हिस्सेदारी 15.40 रुपये प्रति लीटर है.
  • यानी, दिल्ली में बिकने वाले हर एक लीटर पेट्रोल पर VAT का शेयर 16.24% है.
  • 1 अप्रैल, 2026 को दिल्ली में डीजल की कीमत 87.67 प्रति लीटर थी.
  • इसमें राज्य सरकार द्वारा लगाए जाने वाले VAT की हिस्सेदारी 12.83 रुपये प्रति लीटर है.
  • यानी, दिल्ली में बिकने वाले हर एक लीटर डीजल की कीमत पर VAT का शेयर 14.63 % है.

पेट्रोलियम मंत्रालय के मुताबिक, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर सबसे ज़्यादा VAT लगाने वाले राज्य हैं:

  • तेलंगाना : 35.20% वैट
  • आंध्र प्रदेश: 31% वैट + ₹4 प्रति लीटर वैट + ₹1 प्रति लीटर रोड डेवलेपमेंट सेस और उस पर वैट
  • केरल: 30.08% बिक्री कर + ₹1 प्रति लीटर अतिरिक्त बिक्री कर + 1% सेस, सामाजिक सुरक्षा सेस ₹2 प्रति लीटर
  • कर्नाटक: 29.84% बिक्री कर
  • मध्य प्रदेश: 29% वैट + ₹2.5 प्रति लीटर वैट + 1% सेस
  • ओडिशा: 28% वैट
  • महाराष्ट्र : 25% वैट + ₹5.12 प्रति लीटर अतिरिक्त कर
  • पश्चिम बंगाल : 25% या ₹13.12 प्रति लीटर, जो भी अधिक हो
  • बिहार : 23.58% या ₹16.65 प्रति लीटर, जो भी अधिक हो

राज्य और केंद्रशासित प्रदेश हैं, जहां वैट प्रति बिक्री कर कुछ कम

  • हरियाणा: 18.20% या ₹14.50 प्रति लीटर, जो भी अधिक हो
  • हिमाचल प्रदेश: 17.5% या ₹13.50 प्रति लीटर, जो भी अधिक हो
  • उत्तराखंड: 16.97% या ₹13.14 प्रति लीटर, जो भी अधिक हो
  • अरुणाचल प्रदेश: 14.50%
  • गुजरात: 13.7% वैट + नगर दर पर 4% सेस और वैट

वित्तीय वर्ष 2024‑25 में राज्यों की POL उत्पादों पर बिक्री कर / वैट से कुल संग्रह 3,02,058.5 करोड़ रुपये रहा. वहीं, वित्तीय वर्ष 2025‑26 के पहले छह महीनों (प्रथम छमाही) में राज्यों की POL उत्पादों पर बिक्री कर / वैट से कुल संग्रह 1,46,892 करोड़ रुपये रहा.

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अगर GST के दायरे में आ जाएं पेट्रोल-डीजल के दाम 

देश में अलग-अलग राज्य अपनी वित्तीय ज़रूरतों के हिसाब से पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर वैट और सेल्स टैक्स लगाती हैं. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को GST के दायरे में शामिल करने पर नए सिरे से विचार होना चाहिए? GST व्यवस्था में पेट्रोल-डीजल और दूसरे पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स को शामिल करने से देश में एक सामान टैक्स लगाना संभव हो सकेगा और संकट के दौर में उनपर एक समान कटौती करना भी संभव होगा.

देश में पेट्रोल-डीजल की रिटेल कीमतों को डीरेगुलेट करने में अहम भूमिका निभाने वाले तेल अर्थशास्त्री  किरीट पारीख ने एनडीटीवी से कहा, "पेट्रोल और डीजल को GST में शामिल करना एक बेहतर विकल्प है जिसपर विचार किया जाना जरूरी है. अगर पेट्रोल और डीजल को जीएसटी में शामिल किया जाता है, तो इससे तेल कंपनियों पर मध्यपूर्व एशिया में जारी युद्ध की वजह से बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने में मदद मिलेगी."

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