VIRAL VIDEO: चाय की एक प्याली सिर्फ प्यास नहीं बुझाती, बल्कि इसके पीछे करोड़ों का कारोबार भी खड़ा हो सकता है. सोशल मीडिया पर 'शर्मा कैफे रेस्टोरेंट' के मालिक का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिनका हर महीने का लाखों का टर्नओवर है. करीब 55 साल पुराने इस काम को संभालने वाले इस शख्स के रोल मॉडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एलन मस्क हैं. रोजाना 3 हजार कप चाय बेचने वाले इस उद्यमी का मानना है कि बड़ा बनने के लिए विरासत की नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत और छोटे-छोटे रिस्क से मिलने वाले तजुर्बे की जरूरत होती है.
मुनाफे का गणित समझिए
बिक्री का गणित समझाते हुए उन्होंने बताया कि दुकान पर रोज लगभग तीन हजार कप चाय बिक जाती है. 10 रुपये प्रति कप के हिसाब से रोजाना का गल्ला 25 हजार से 30 हजार रुपये के बीच बैठता है. महीने का हिसाब लगाएं तो यह आंकड़ा 7.5 लाख से 9 लाख रुपये तक पहुंचता है. हालांकि, यह पूरा पैसा मुनाफा नहीं है. इस कमाई में से दूध, पत्ती, चीनी, दुकान का किराया, बिजली बिल और स्टाफ की सैलरी जैसे तमाम खर्चे भी निकालने होते हैं. इस दुकान पर करीब 30-35 लोग काम करते हैं, जिसे मालिक एक बेहद सफल और संतोषजनक बिजनेस मानते हैं.
मोदी और मस्क से मिलती है प्रेरणा
बातचीत के दौरान जब आयुष ने पूछा कि क्या युवा कम पैसों से शुरुआत करके बड़ा बिजनेस खड़ा कर सकते हैं? तो चायवाले ने बेहद खूबसूरत जवाब दिया. उन्होंने उन लोगों की मिसाल दी जिन्होंने बिल्कुल जमीन से उठकर आसमान को छुआ है. उन्होंने कहा, "हर कोई सीढ़ी के सबसे निचले पायदान से ही ऊपर चढ़ता है. उदाहरण के लिए एलन मस्क और पीएम नरेंद्र मोदी को ही देख लीजिए." वे इन दोनों से बेहद प्रभावित हैं. उनका कहना है, "मोदी जी कभी चाय बेचते थे और आज देश के प्रधानमंत्री हैं. मस्क ने छोटे स्तर से शुरुआत की थी और आज वे खरबों की कंपनियों के मालिक हैं. बड़ा बनने के लिए बपौती जायदाद या विरासत में मिली दौलत की जरूरत नहीं होती, कड़ी मेहनत के दम पर शून्य से शिखर तक पहुंचा जा सकता है."
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छोटे रिस्क से ही मिलती है बड़ी सीख
नए उद्यमियों को सलाह देते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआत में ही सारा पैसा झोंकने के बजाय छोटे-छोटे रिस्क लेने चाहिए. उनका कहना है, "शुरुआत 10 हजार, 20 हजार या 50 हजार रुपये जैसे छोटे रिस्क से करें. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? नुकसान ही तो होगा, लेकिन इस नुकसान के बदले जो तजुर्बा मिलेगा, वह अनमोल होगा. धंधे में आपका तजुर्बा ही सबसे ज्यादा मायने रखता है."
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