VIRAL VIDEO: पंजाब के फरीदकोट से एक ऐसी खबर सामने आई है, जहां महज 7 रुपये के एक फैसले ने मजदूर परिवार की किस्मत तो बदल दी, लेकिन एक करोड़ जीतने के बाद भी यह परिवार तकनीकी रूप से 'करोड़पति' नहीं बन पाएगा. कोटकपूरा की रहने वाली बिमला देवी की एक करोड़ रुपये की लॉटरी तो लगी है, मगर उनके बैंक खाते में पूरे एक करोड़ नहीं, बल्कि करीब 65.68 लाख रुपये ही आएंगे. आखिर उनके इनाम से 34 लाख रुपये से ज्यादा की रकम किसने और क्यों काट ली, आइए इसके पीछे का पूरा गणित समझते हैं.
महज 7 रुपये ने बदली मजदूर परिवार की किस्मत
बिमला देवी के पति दिहाड़ी मजदूरी करते हैं. बुधवार शाम को बिमला देवी रेलवे स्टेशन के पास बाजार में कुछ सामान खरीदने गई थीं. वहां एक स्टॉल देखकर उनके मन में विचार आया और उन्होंने सिर्फ सात रुपये में सिक्किम स्टेट लॉटरी का एक टिकट खरीद लिया. गुरुवार शाम को जब नतीजे आए, तो परिवार के पैरों तले जमीन खिसक गई. जिस टिकट को उन्होंने सिर्फ 7 रुपये में खरीदा था, उस पर एक करोड़ रुपये का बंपर इनाम निकला था. दुकानदार का भी कहना है कि उनकी दुकान से निकला यह अब तक का सबसे बड़ा इनाम है. परिवार में जश्न का माहौल है और वे इस पैसे से बच्चों का भविष्य संवारने और खुद का काम शुरू करने की तैयारी में हैं.
फिर जेब से कहां गायब हो गए 34 लाख रुपए?
सुनने में तो यही लगता है कि परिवार रातों-रात करोड़पति बन गया, लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है. बिमला देवी के हाथ में एक करोड़ में से करीब 65.68 लाख रुपए ही आएंगे. बाकी के 34.32 लाख रुपये भारत सरकार के खाते में सीधे टैक्स के रूप में चले जाएंगे.
Punjab Woman Wins Rs 1 Crore Lottery Prize With Just Rs 7 Ticket #Punjab https://t.co/EmdCQI25Jr
— NDTV (@ndtv) October 23, 2026
समझिए लॉटरी पर लगने वाले टैक्स का नियम
आयकर कानून के मुताबिक, लॉटरी, गेम शो या सट्टेबाजी से जीती गई रकम को 'आकस्मिक आय' (Casual Income) माना जाता है. इस पर इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 115BB के तहत टैक्स वसूला जाता है, जिसके नियम आम कमाई से बिल्कुल अलग हैं. लॉटरी की रकम पर सामान्य टैक्स स्लैब (जैसे 5 या 7 लाख रुपये तक की छूट) लागू नहीं होता. साथ ही, इसमें सेक्शन 80C (LIC, PPF) या 80D (हेल्थ इंश्योरेंस) के तहत मिलने वाली किसी भी छूट का फायदा नहीं मिलता. ऐसी कमाई पर पहले ही रुपए से सीधा 30 फीसदी फ्लैट टैक्स लगता है, जो एक करोड़ पर 30 लाख बनता है. चूंकि इनाम की रकम 50 लाख रुपए से ज्यादा है, इसलिए इस टैक्स के ऊपर 10% सरचार्ज (3 लाख रुपये) और फिर कुल टैक्स पर 4% हेल्थ एंड एजुकेशन सेस (1.32 लाख रुपये) भी जुड़ता है.
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खाते में पहले ही कटकर आएगा पैसा
कानूनन लॉटरी आयोजित करने वाली संस्था को सेक्शन 194B के तहत इनाम की रकम देने से पहले ही TDS काटना पड़ता है. नियम के तहत कंपनी कम से कम 31.2% (31.20 लाख रुपये) या सरचार्ज सहित पूरा 34.32% (34.32 लाख रुपये) टैक्स काटकर ही पैसा खाते में भेजती है. अगर कंपनी शुरुआत में सरचार्ज नहीं भी काटती है, तो भी बिमला देवी को अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरते समय बचा हुआ सरचार्ज खुद जमा करना होगा. यानी हर हाल में सरकारी खजाने में 34.32 लाख रुपये जाने के बाद उनके हाथ में 65.68 लाख रुपये ही बचेंगे."
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