Indian Mangoes in US: अमेरिका के सुपरमार्केट में इन दिनों ऐसी जंग छिड़ी है, जैसी शायद ही आपने देखी हो. भारत से आने वाले आमों की एक झलक पाने के लिए लोग पागलों की तरह टूट पड़ रहे हैं. आलम यह है कि स्टोर में आम आने के महज 20 मिनट के अंदर पेटियां 'गायब' हो जा रही हैं. लोग सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां कर रहे हैं कि, आखिर 'फलों के राजा' के दर्शन के लिए कितनी जद्दोजहद करनी होगी. आखिर क्यों है सात समंदर पार भारतीय आमों का इतना जबरदस्त क्रेज? आइए जानते हैं इस देसी मिठास का पूरा टशन. आखिर क्यों है भारत के 'आमों' की इतनी जबरदस्त डिमांड?

भारत में तो आम का सीजन आते ही हर घर में बाल्टियां भर-भर के आम दिखने लगते हैं, लेकिन सात समंदर पार अमेरिका में तो जैसे इसकी किल्लत ने गदर मचा रखा है. वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक ताजा रिपोर्ट ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है. खबर है कि वहां लोग भारतीय आमों, खासकर 'Alphonso (हापुस)' और 'Kesar' के पीछे ऐसे दीवाने हुए पड़े हैं कि स्टॉक आते ही चंद मिनटों में बोर्ड लग जाता है, 'आउट ऑफ स्टॉक'. सोशल मीडिया पर एक पोस्ट बिजली की तरह फैल गई, जिसमें बताया गया कि शाम 4:56 पर स्टोर में आम की खेप पहुंची और 5:16 बजते-बजते सब सफाचट. लोग कह रहे हैं कि अमेरिका में अच्छा आम मिलना 'अमृत' मिलने जैसा मुश्किल काम हो गया है.
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विदेशी भी हुए देसी स्वाद के मुरीद (High Demand for Indian Mangoes in USA)
मजेदार बात ये है कि भारत दुनिया का लगभग आधा आम अकेले पैदा करता है, यानी करीब 2 करोड़ मीट्रिक टन, लेकिन हम ठहरे पक्के खाने वाले, हम अपना 99% आम खुद ही डकार जाते हैं और सिर्फ 1% बाहर भेजते हैं. इसी बात पर विदेशी जनता चकरा गई है. एक यूजर ने तो यहां तक कह दिया, 'अगर मेरे पास केसर और हापुस जैसे आमों का खजाना होता, तो मैं भी किसी को एक दाना न दूं'. कुछ विदेशी तो ये भी कह रहे हैं कि, 'भारतीयों की चमकती त्वचा का राज शायद ये आम ही हैं, इसलिए थोड़ा हमारे साथ भी शेयर करो भाई, इतने मतलबी मत बनो.'
Getting good mangoes in the US is absurdly hard.
— Sheel Mohnot (@pitdesi) May 4, 2026
4:56pm: new shipment in
5:16pm: sold out https://t.co/euFo8ncQpq pic.twitter.com/nVkDfTh81L
पुरानी पाबंदी हटी पर प्यास अभी बाकी (History of Indian Mango Export to US)
साल 2006 में एक डील के बाद अमेरिका में भारतीय आमों की एंट्री पर लगा 18 साल पुराना बैन हटा था, तब से उम्मीद थी कि वहां आम की नदियां बहेंगी, लेकिन सप्लाई आज भी ऊंट के मुंह में जीरे के बराबर है, जो नसीब वालों को मिल भी रहे हैं, उनके लिए उन्हें अपनी जेब काफी ढीली करनी पड़ रही है. लोग पुराने दिनों को याद कर रहे हैं जब घर के बगीचे से ताजे आम मिलते थे, क्योंकि अमेरिका में मिलने वाले आम अक्सर सफर की थकान से पिचके (bruised) से नजर आते हैं.

Photo Credit: pexels
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कुल मिलाकर बात ये है कि भारतीय आम का स्वाद ही ऐसा है कि एक बार जुबान पर चढ़ जाए, तो बंदा सात समंदर पार भी इसके लिए लाइन में लगने को तैयार है. ये सिर्फ एक फल नहीं, बल्कि हम भारतीयों का इमोशन है जो अब ग्लोबल हो चुका है.
(डिस्क्लेमर: यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के आधार पर दी गई है. NDTV इसकी पुष्टि नहीं करता.)
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