Viral News: बिहार के नवादा जिले में एक अनोखी शादी चर्चा का विषय है. जहां लोग शादी में महंगी गाड़ियां से बारात तो दूल्हे के लिए रथ का इंतजाम करते हैं तो वहीं नवादा में एक शिक्षक अपनी दुल्हन को बैलगाड़ी में बैठाकर गांव लेकर आया. फूलों से सजी बैलगाड़ी और उसमें बैठी दुल्हन को देखकर गांव वाले भी अचरज में पड़ गए. बैलगाड़ी में आई दुल्हन के साथ-साथ शादी का कार्ड भी आकर्षण का केंद्र रहा, जिस पर लिखी लाइन को पढ़कर हर किसी कोई एक बार हैरान रह जाता.
निकाह के बाद बैलगाड़ी से आई दुल्हन
दरअसल, नवादा के रोह प्रखंड स्थित मरुई गांव के शिक्षक एहतेशाम रजा का 16 अक्टूबर को निकाह था. वह निकाह के बाद अपनी पत्नी जाकरा अकील को बैलगाड़ी से गांव लेकर आए. इस फैसले को लेकर उनका कहना है कि इस पहल के पीछे पुरानी ग्रामीण संस्कृति को फिर से जीवंत करने और उससे अपना जुड़ाव बनाए रखने की इच्छा थी. जब वह अपनी दुल्हन को बैलगाड़ी से लेकर आए तो देखकर गांव वाले एक बार के लिए हैरान रह गए. और तो और जब लोगों ने उनके शादी का कार्ड देखा तो लोगों के लिए और ही अचरज वाली बात रही.
कार्ड पर लिखा- बापू संग कस्तूरबा
एहतेशाम की शादी का निमंत्रण कार्ड पर ‘बापू संग कस्तूरबा' लिखा था. इसके पीछे महात्मा गांधी और कस्तूरबा गांधी से उनकी प्रेरणा के साथ पति-पत्नी के बीच का आत्मीय रिश्ता भी है. एहतेशाम बताते हैं कि वे महात्मा गांधी से प्रेरित हैं. वे अपनी पत्नी को प्यार से ‘कस्तूरबा' कहकर बुलाते हैं, जबकि पत्नी उन्हें ‘बापू' कहती हैं. इसी वजह से उन्होंने शादी के कार्ड पर यह नाम लिखवाया.

कार्ड पर लिखा- बापू संग कस्तूरबा
Photo Credit: NDTV
पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को दी गई प्राथमिकता
16 अक्टूबर को नवादा में निकाह के बाद जब एहतेशाम अपनी पत्नी के साथ फूलों से सजी बैलगाड़ी पर मरुई गांव पहुंचे, तो ग्रामीणों, परिजनों और विद्यार्थियों समेत सैकड़ों लोग उनके स्वागत के लिए मौजूद थे. सफेद शेरवानी और पारंपरिक पगड़ी पहने एहतेशाम के साथ लाल जोड़े में सजी जाकरा बैलगाड़ी पर बैठी थीं. उन्होंने अपने निकाह में पारंपरिक ग्रामीण संस्कृति को प्राथमिकता दी थी.
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दिखावे के बीच एहतेशाम ने पेश की मिसाल
एहतेशाम सरसमसुद्दीन मेमोरियल स्कूल, मरुई में शिक्षक हैं. उनके पिता का नाम मो. नैयर है. उनकी पत्नी जाकरा अकील नवादा के मुस्लिम रोड निवासी अकिलूज्जमा की पुत्री हैं. जाकरा ने अमृतसर से स्नातक की पढ़ाई की है और फैशन डिजाइनिंग का प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है. दोनों की उम्र 22-22 वर्ष है. एहतेशाम चाहते हैं कि युवा शादी को दिखावे और खर्च की होड़ बनाने के बजाय इसे सादगी के साथ मनाएं. वे कहते हैं कि शादी बिना दहेज और फिजूलखर्ची के होनी चाहिए. इसे यादगार बनाने के लिए महंगी गाड़ियों और भव्य सजावट की जरूरत नहीं, बल्कि अच्छे विचारों और अपनी परंपराओं से जुड़ाव जरूरी है.
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