पंजाबी गायक गुरदास मान का एक मशहूर गीत है, "दिल होना चाहीदा जवान, उमरां विच की रखिया." यानी आपका दिल जवान होना चाहिए, उम्र में क्या रखा है. इसी बात को सच कर दिखाया है 53 साल के राणा हरपिंदर पाल सिंह ने, जिन्होंने उम्र के इस पड़ाव में 110CC स्कूटी से 2342 किलोमीटर का सफर तय कर डाला. वह भी अकेले और हिमालय के पहाड़ों में, जहां जरा सी चूक जानलेवा साबित हो सकती है.

वह कहते हैं, "भीड़ से अलग चलने और कुछ ऐसा करने की हमेशा चाहत रही है. Photo Credit: NDTV
राणा हरपिंदर सिंह कौन हैं?
राणा हरपिंदर पाल सिंह पंजाब के फिरोजपुर स्थित शहीद भगत सिंह स्टेट यूनिवर्सिटी में लोक संपर्क विभाग में कार्यरत हैं. उन्हें शुरू से ही जिंदगी में कुछ अलग करने की चाह रही है. NDTV से बातचीत में वह कहते हैं, "भीड़ से अलग चलने और कुछ ऐसा करने की हमेशा चाहत रही है. इसीलिए मैंने जिंदगी के हर कदम पर कुछ ऐसा करने की कोशिश की, जिससे मेरी रूह भी खुश हो और समाज को भी सकारात्मक संदेश मिले."

चुनौती बड़ी थी, उम्र का भी तकाजा
हिमालय की पर्वत श्रृंखलाओं की यात्रा शुरू करने से पहले राणा हरपिंदर के मन में कई बातें चल रही थीं. 53 वर्ष की उम्र में हिमालय की ऊंचाइयों तक पहुंचना सेहत के लिहाज से भी चिंता का विषय था, लेकिन राणा ने अपने बुलंद हौसलों के दम पर यह साबित कर दिखाया कि पहाड़ जैसा हौसला रखने वाले लोग मुश्किलों के आगे रेत की तरह नहीं बिखरते.
एनडीटीवी से बातचीत में राणा ने अपने सफर के बारे में बताया कि जब उन्होंने हिमालय जाने का मन बना लिया, तो सोचा कि क्यों न इसे देश और समाज को समर्पित किया जाए. इसी वजह से उन्होंने लोगों की परवाह किए बिना अकेले 110CC स्कूटी से 2342 किलोमीटर की यात्रा की योजना बना ली. जिस उम्र में लोग अपनी रिटायरमेंट की योजनाएं बनाने में जुटे होते हैं, उस उम्र में राणा ने हिमालय का कठिन सफर पूरा कर एक मिसाल कायम की है. उन्होंने चुनौतीपूर्ण रास्तों पर स्कूटी पर तिरंगा लगाकर यात्रा की और समाज को नशे से दूर रहने का संदेश दिया.

फिरोजपुर से भारत के आखिरी गांव तक का सफर
पंजाब के फिरोजपुर से शुरू हुई राणा की सोलो यात्रा 2342 किलोमीटर लंबी रही. फिरोजपुर से वह पठानकोट, जम्मू, श्रीनगर और सोनमर्ग होते हुए जोजिला पास पहुंचे. इसके बाद उन्होंने द्रास, कारगिल, बटालिक सेक्टर, लामायुरु और लेह का सफर तय किया. जटिल पहाड़ी रास्तों और बदलते मौसम के बीच राणा हरपिंदर पाल सिंह खारदुंग ला तक भी पहुंचे. इसके बाद वे भारत के आखिरी गांव थांग पहुंचे, जो लद्दाख की नुब्रा घाटी में सीमा के पास स्थित है. बता दें कि राणा हरपिंदर पाल सिंह की यह रोमांचक यात्रा 23 सितंबर 2026 को शुरू हुई थी और 5 अक्टूबर 2026 को समाप्त हुई.
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