मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स के धुरंधर रहे जेक हैगर को अमेरिका के शहर लास वेगास में थप्पड़ जड़कर नॉकआउट करने वाले महाबली शेरा ने दुनिया भर में भारत का परचम फहराया. महाबली शेरा के नाम से जाने जाने वाले 35 वर्षीय इस नौजवान का असली नाम अमनप्रीत सिंह रंधावा है. अमनप्रीत एक पेशेवर रेसलर हैं. 2018 में उन्होंने कुछ वक्त के लिए WWE के साथ करार किया था. मौजूदा समय में वह 2019 से अब तक ओहियो वैली रेसलिंग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं.
महाबली शेरा कहां के रहने वाले?
पंजाब के फिरोजपुर जिले के गांव माना सिंह वाला में जन्म लेने वाले अमनप्रीत की जिंदगी शुरू से ही संघर्ष से भरी रही. 8वीं के बाद पढ़ाई छूट गई और लकड़ी के मिस्त्री के रूप में काम किया, लेकिन इरादा पक्का था कि शरीर इतना दमदार बनाना है कि पूरी दुनिया में उनका नाम हो. 6 फुट 2 इंच कद के इस नौजवान के दिमाग में परिवार के हालात से लड़ने और अपने देश का नाम आगे ले जाने की सोच थी. जुलाई 2026 में पावर स्लैप गेम में धुरंधर जेक हैगर को ऐसा थप्पड़ जड़ा कि रातोंरात शेरा वायरल हो गए.

mahabali shera success story amanpreet singh randhawa punjab Photo Credit: NDTV
फिरोजपुर से अमेरिका तक यूं छाया शेरा
पंजाब के फिरोजपुर के नजदीक गांव माना सिंह वाला में 2 मई 1990 को जन्मे महाबली शेरा का असली नाम अमनप्रीत सिंह रंधावा है. शेरा के परिवार का संबंध खेती से है. उनके पिता जमींदार थे और मां घर का कामकाज संभालती थीं. शेरा का एक छोटा भाई और एक बहन है. उनके पिता, ताया और चाचा कबड्डी के शौकीन थे, लेकिन उनके पिता को शराब की बुरी लत थी. पिता की इस लत ने शेरा को तोड़कर रख दिया था. लेकिन यही वह वजह थी जिसने शेरा को जिंदगी में कुछ अलग करने के लिए प्रेरित किया और वह निकल पड़े अपना और अपने गांव का नाम रोशन करने की ओर. बेहतर जिंदगी के लिए उन्होंने अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर तलवंडी भाई स्थित अपने ननिहाल का रुख कर लिया.
लकड़ी के मिस्त्री का किया काम
अमनप्रीत ने गांव में 8वीं तक पढ़ाई की, लेकिन जिम्मेदारियों ने उन्हें कम उम्र में ही रोजी-रोटी के मैदान में उतार दिया. 12 साल की उम्र में अपने ननिहाल तलवंडी पहुंचकर शेरा को लकड़ी के काम में दिलचस्पी हुई. वहीं एक कारपेंटर की दुकान पर वह काम सीखने लगे. काम भले ही वह मिस्त्री का कर रहे थे, लेकिन दिल में स्पोर्ट्स को लेकर ख्वाहिश बनी रही. इसीलिए उन्होंने अपनी पहली कमाई से 600 रुपये की साइकिल खरीदी और बॉडी बनाने की तरफ ध्यान देना शुरू किया.
अपने गांव माना सिंह वाला से वह रोजाना सुबह 4 बजे साइकिल पर तलवंडी के लिए निकलते थे. वक्त पर पहुंचकर कुछ समय कसरत को देते और फिर लकड़ी के मिस्त्री के तौर पर काम शुरू करते. अपनी 8 घंटे की ड्यूटी के दौरान हाथ से काम करना और शरीर को फौलाद बनाना, बस यही उनका मकसद था. जहां उनके साथ काम करने वाले दोपहर की एक घंटे की ब्रेक में आराम किया करते थे, वहीं शेरा इस दौरान अपनी बॉडी पर ध्यान देते रहे.
इस लंच ब्रेक के दौरान वह तलवंडी से मोगा जिम करने के लिए जाया करते थे. जब तक वह वापस गांव लौटते, तब तक रात हो जाती थी और घर की तरफ पैदल जाते-जाते तारों से बातें करते थे. शेरा बताते हैं, ‘‘घर की ओर जाते-जाते तारों से बातें करता था और कहता था कि हे भगवान, हे वाहेगुरु जी, ये संघर्ष कब खत्म होगा. शायद भगवान की रोशनी या ताकत इतनी मिलती रही कि मैं अंदर ही अंदर खुश होता था. आज वही मेहनत काम आ रही है.'' जिम और बॉडी बिल्डिंग की तरफ दिलचस्पी इस कदर बढ़ी कि महाबली शेरा के नाम से मशहूर हुए अमनप्रीत सिंह रंधावा 2011 में WWE तक पहुंच गए.
मोहाली में खोला जिम
महाबली शेरा ने थोड़ा स्थिर होने के बाद चंडीगढ़ के नजदीक मोहाली का रुख किया और वहां एक जिम खोला. यही वह वक्त था जब उन्होंने बॉडी बिल्डिंग से जुड़े कई मुकाबलों में हिस्सा लिया. 2007-08 के दौरान उन्हें मिस्टर चंडीगढ़ और मिस्टर मोहाली के खिताब हासिल हुए. इसके बाद 2010 में गुवाहाटी में उनके सिर मिस्टर इंडिया का ताज सजा. इसी दौरान उन्हें 2011 में टीवी सीरियल CID में काम करने का मौका मिला और उन्होंने कई पंजाबी फिल्मों में भी काम किया. ‘‘जब आपके पास बहुत कम होता है तो भूख ज्यादा होती है'' महाबली शेरा ने शुरू से ही घर में गरीबी देखी थी. संघर्ष ने उनका और उनके परिवार का कभी साथ नहीं छोड़ा. शुरू से ही घर के माहौल ने उन्हें हर पल हिम्मत दी और वह अपने मकसद को पूरा करने की दिशा में लगे रहे.
घर में गरीबी के बारे में वह कहते हैं, ‘‘इतनी गरीबी थी कि मैं जिंदगी में कई चीजें नहीं कर पा रहा था, लेकिन जिंदगी में कुछ लोग आपका सहारा बनते हैं और दिवंगत रविंद्र सिंह संधू मेरा सबसे पहला सहारा बने. उन्होंने मेरे हाथ में 10 हजार रुपये दिए और कहा, 'जा बेटा, जिंदगी में कुछ करके दिखाओ.''' रविंद्र सिंह संधू पास के गांव रत्ता खेड़ा के समाजसेवी थे, जिन्होंने शेरा की आर्थिक मदद की. शेरा बताते हैं कि यही वह पल था जब उनका सफर वास्तव में शुरू हुआ और उसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा.
‘‘तिरंगे को लेकर बहुत इमोशनल हूं''
अमनप्रीत उर्फ महाबली शेरा ने बतौर पहले भारतीय 2014 में 'TNA इम्पैक्ट रेसलिंग' में महाबली शेरा के रूप में अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई. दिल में जज्बा लेकर छोटे से गांव से निकलने वाले महाबली शेरा के दिल में भारत की शान तिरंगे को लेकर अलग तरह के अहसास हैं. अपनी पेशेवर जिंदगी से लेकर निजी जिंदगी तक तिरंगा उन्हें खूब हौसला और प्रेरणा देता है. शेरा कहते हैं, ‘‘स्पोर्ट्स को लेकर मेरी भूख बढ़ती रही. मैं देश और तिरंगे को लेकर बहुत इमोशनल हूं. जहां भी मुझे मौका मिला, मैं अपने लोगों और देश को गर्व महसूस कराने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ करने में लगा रहा.''
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