
प्रतीकात्मक तस्वीर...
नीमच:
एशिया के सबसे बड़े 'ओपियम एंड अल्कलॉइड प्लांट' की सुरक्षा को अब और कड़ा कर दिया गया है और प्लांट में अफीम के भारी भंडारण (स्टॉक) के मद्देनजर चप्पे-चप्पे पर क्लोज सर्किट टेलीविजन कैमरों (सीसीटीवी) की नजर है।
प्लांट की सुरक्षा का दायित्व केन्द्रीय औद्यौगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का है और इस अफीम कारखाने के अंदर और चारों तरफ दूर-दूर तक इन सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सीआईएसएफ के जवान नजर रखते हैं। इस प्लांट में हाल ही कुल पचास सीसीटीवी कैमरे लगाकर इसकी सुरक्षा को 'हाईटेक' कर दिया गया है।
नीमच का 'ओपियम एंड अल्कलॉइड प्लांट' एशिया का सबसे बड़ा अफीम कारखाना है, जहां अफीम का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) कर जीवन रक्षक दवाओं के लिए 'कोडीन फास्फेट' और 'मार्फिन' बनाई जाती है। पूरे देश में उत्पादित अफीम का भंडारण और उसकी 'ग्रेडिंग' का काम भी यहीं होता है।
प्लांट के नए महाप्रबंधक हरिनारायण मीणा ने कहा, 'अभी मध्यप्रदेश और राजस्थान के 25 हजार अफीम उत्पादक किसानों की फसल 'ग्रेडिंग' के लिए यहां रखी हुई है, जिसकी वजह से यह प्लांट 'निषिद्ध क्षेत्र' है। प्लांट की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ के लगभग 100 जवान और अधिकारी यहां तैनात हैं।
सुरक्षा के इंतजामों को सीसीटीवी कैमरों के जरिए 'हाईटेक' बनाने वाले मीणा ने कहा, 'प्लांट में वर्ल्ड क्लास कंपनी के 50 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिसमे 32 कैमरे प्लांट की प्रयोगशाला में लगाए गए हैं, जहां अफीम की ग्रेडिंग और फिर उसके उप उत्पाद (बॉय प्रोडक्ट) बनाने का काम होता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशाला 'नारकोटिक ड्रग्स एण्ड सॉयकोट्रोपिक सबस्टेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट' के कड़े प्रावधानों के तहत चलती है। इसमें काम करने वाले कर्मचारियों की जांच और तलाशी तो हर रोज होती ही है, लेकिन अब हमने इसके चप्पे-चप्पे पर कैमरे लगाकर इसको और पुख्ता कर दिया है।
प्लांट की सुरक्षा का दायित्व केन्द्रीय औद्यौगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) का है और इस अफीम कारखाने के अंदर और चारों तरफ दूर-दूर तक इन सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से सीआईएसएफ के जवान नजर रखते हैं। इस प्लांट में हाल ही कुल पचास सीसीटीवी कैमरे लगाकर इसकी सुरक्षा को 'हाईटेक' कर दिया गया है।
नीमच का 'ओपियम एंड अल्कलॉइड प्लांट' एशिया का सबसे बड़ा अफीम कारखाना है, जहां अफीम का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) कर जीवन रक्षक दवाओं के लिए 'कोडीन फास्फेट' और 'मार्फिन' बनाई जाती है। पूरे देश में उत्पादित अफीम का भंडारण और उसकी 'ग्रेडिंग' का काम भी यहीं होता है।
प्लांट के नए महाप्रबंधक हरिनारायण मीणा ने कहा, 'अभी मध्यप्रदेश और राजस्थान के 25 हजार अफीम उत्पादक किसानों की फसल 'ग्रेडिंग' के लिए यहां रखी हुई है, जिसकी वजह से यह प्लांट 'निषिद्ध क्षेत्र' है। प्लांट की सुरक्षा के लिए सीआईएसएफ के लगभग 100 जवान और अधिकारी यहां तैनात हैं।
सुरक्षा के इंतजामों को सीसीटीवी कैमरों के जरिए 'हाईटेक' बनाने वाले मीणा ने कहा, 'प्लांट में वर्ल्ड क्लास कंपनी के 50 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिसमे 32 कैमरे प्लांट की प्रयोगशाला में लगाए गए हैं, जहां अफीम की ग्रेडिंग और फिर उसके उप उत्पाद (बॉय प्रोडक्ट) बनाने का काम होता है।
उन्होंने कहा कि यह प्रयोगशाला 'नारकोटिक ड्रग्स एण्ड सॉयकोट्रोपिक सबस्टेंसेस (एनडीपीएस) एक्ट' के कड़े प्रावधानों के तहत चलती है। इसमें काम करने वाले कर्मचारियों की जांच और तलाशी तो हर रोज होती ही है, लेकिन अब हमने इसके चप्पे-चप्पे पर कैमरे लगाकर इसको और पुख्ता कर दिया है।
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