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नेपाल का संविधान बनाने वाला सांसद अब पाल रहा बकरी, दूसरे किसानों को दिखाया रास्ता, लोग बोले- कॉमरेड हो तो ऐसा

छात्र जीवन से ही CPN (माओवादी) से जुड़े गमबहादुर श्रीष 2008 से 2012 तक नेपाल की पहली संविधानसभा के सदस्य थे. आज वह राजनीति से ज्यादा खेती और पशुपालन पर ध्यान देते हैं. वह बकरी पालन, संतरे की खेती, मधुमक्खी पालन और मछली पालन कर रहे हैं.

नेपाल का संविधान बनाने वाला सांसद अब पाल रहा बकरी, दूसरे किसानों को दिखाया रास्ता, लोग बोले- कॉमरेड हो तो ऐसा
पूर्व सांसद गमबहादुर श्रीष अब राजनीति से ज्यादा पशुपालन पर ध्यान दे रहे हैं (फोटो- SG Myagdi /यूट्यूब)

नेपाल का संविधान बनाने में शामिल पूर्व सांसद गमबहादुर श्रीष अब राजनीति से ज्यादा पशुपालन पर ध्यान दे रहे हैं, उससे होने वाली कमाई से घर चला रहे हैं. वह हर साल 15 से 20 बकरियां बेचते हैं, संतरे की खेती करते हैं और मधुमक्खियों को पालकर शहद बेचते हैं. 20 साल तक नेपाल की राजनीति में एक्टिव रहने वाले श्रीष अब मछली भी पालते हैं. नेपाल में उनकी इस सादगी भरी जीवनशैली वाली नई पारी की तारीफ हो रही है. वह अपने छात्र जीवन से ही सीपीएन (माओवादी) से जुड़े गमबहादुर ने अब अपना ध्यान खेती और पशुपालन पर लगा दिया है. 

2 बकरी और एक लाख नेपाली रुपए से शुरू की नई पारी

6 साल पहले दो बकरियों और एक लाख रुपये के निवेश से शुरू हुआ उनका यह फार्म अब काफी बड़ा हो गया है. इसमें अभी 39 बकरियां हैं और वे सालाना 15 से 20 खसी-बोका बेचते हैं. साथ ही, उन्होंने पारंपरिक खेती के विकल्प के रूप में 350 संतरे के पेड़ लगाए हैं, जिनसे अब उत्पादन भी शुरू हो गया है. नेपाली अखबार रातोपाटी की रिपोर्ट के अनुसार श्रीष एक्टिव राजनीति को छोड़कर अपने गांव लौट आए और खेती-पशुपालन से जुड़ गए. 

उन्होंने अपनी मेहनत और निवेश के जरिए स्वरोजगार का रास्ता चुना है. श्रीष का कहना है कि खेती से जुड़ा व्यवसाय लोगों की जिंदगी सुधारने, बदलाव लाने और रोजगार देने का सबसे बड़ा जरिया है. मैंने पहाड़ में खुद के दम पर कुछ करने की मिसाल पेश करने की कोशिश की है.

इतना आसान नहीं था सफर

गमबहादुर श्रीष अब व्यावसायिक स्तर पर पशुपालन कर रहे हैं, जिसमें वे खारी और जमुनापारी नस्ल की बकरियां पालते हैं. शुरुआत में बकरी पालन आसान नहीं था. उन्हें नुकसान भी उठाना पड़ा, क्योंकि ताराखोला से खरीदी गई बकरियां वहां के स्थानीय मौसम के अनुकूल नहीं थीं. फिर भी, उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अपना काम जारी रखा. अब उनके फार्म को अच्छे से मैनेज किया जाता है. पशु चिकित्सालय और पशुधन सेवा केंद्र की मदद से एक आधुनिक शेड बनाया गया है.

बकरी पालन के साथ-साथ, उन्होंने संतरे की खेती का भी विस्तार किया है. जिन खेतों में पहले धान-गेहूं जैसी पारंपरिक फसलें उगाई जाती थीं, वहां अब 350 संतरे के पेड़ लगाए गए हैं. इन पेड़ों से फल मिलना शुरू हो गया है. खाली पड़ी जमीन पर बकरियों के लिए जरूरी घास भी लगाई गई है. इससे पशुपालन आसान हो गया है. उन्होंने मधुमक्खी पालन भी शुरू किया है. फिलहाल उनके पास मधुमक्खियों के 16 छत्ते हैं. सिंचाई के लिए बनाए गए तालाब में मछली पालन भी शुरू किया गया है. श्रीष फेसबुक पर लोगों को पशुपालन और खेती का वीडियो बनाकर अपडेट भी देते हैं. वहां उनके चाहने वाले उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और कई तो कहते हैं कि कॉमरेड हो तो ऐसा. 

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अब दूसरों को दिखा रहे रास्ता

उनकी पहल पर एक आदर्श किसान समूह बनाया गया. उनके दिखाए रास्ते पर चलते हुए बरंजा के 15 परिवारों ने व्यावसायिक स्तर पर बकरी पालन शुरू कर दिया है. इससे गांव में कृषि-उद्यमिता के प्रति आकर्षण बढ़ा है. बरंजा के किसान बकरी पालन के साथ-साथ संतरे की खेती और पशुपालन भी करते हैं. वे अपने यहां मिलने वाले दूध को बाजार में बेचते हैं. श्रीष का मानना ​​है कि खेती को आय का एक जरिया बनाया जा सकता है, क्योंकि यहां स्थानीय स्तर पर उत्पादन और बाज़ार, दोनों की संभावनाएं मौजूद हैं.

राजनीति में रहे बड़े नाम

गमबहादुर श्रीष अपने छात्र जीवन से ही CPN (माओवादी) से जुड़े हुए थे. 2058 BS से भूमिगत राजनीति में सक्रिय रहे. वे उस समय माओवादी पार्टी द्वारा चलाए गए सशस्त्र संघर्ष के दौरान राजनीतिक गतिविधियों में शामिल थे. 2006 में वे अंतरिम विधायिका संसद के सदस्य बने. इसके बाद, उन्होंने 2008 से 2014 तक पहली संविधान सभा में प्रतिनिधित्व किया. संविधान सभा के सदस्य के रूप में अपना कार्यकाल पूरा करने के बाद वे अपने जन्मस्थान, बरंजा लौट आए.

इसके बाद, उन्होंने कृषि उद्यमिता को अपनी आजीविका का आधार बनाया. वैसे श्रीष अभी भी राजनीति में सक्रिय हैं. वे वर्तमान में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल के केंद्रीय सदस्य हैं. उनकी योजना राजनीति और कृषि उद्यमिता को एक साथ आगे बढ़ाने की है.

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