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जापान ने क्यों लिया अपने घातक हथियार बेचने का फैसला, कौन सा देश उसे दे रहा है चुनौती

जापान ने मंगलवार को एक बहुत बड़ा रणनीतिक बदलाव किया. जापान ने अब अपने घातक हथियारों को भी बेचने का फैसला किया है. यह बदलाव जापान ने द्वतिय विश्व युदध के बाद किया है.

जापान ने क्यों लिया अपने घातक हथियार बेचने का फैसला, कौन सा देश उसे दे रहा है चुनौती
  • जापान ने अपनी उस नीति को बदल दिया है जिसमें रक्षा सामानों को दूसरे देशों को बेचने पर प्रतिबंध था.
  • नए फैसले के बाद अब जापान युद्धपोत और मिसाइल जैसे घातक हथियार भी बेच सकता.
  • चिर प्रतिद्वंद्वी चीन ने इसका विरोध किया है तो फिलीपींस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों ने स्वागत.
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नई दिल्ली:

चीन और उत्तर कोरिया से बढ़ते खतरे के बीच जापान ने हथियारों के व्यापार को लेकर अपने दशकों पुराने नियमों में बड़ा बदलाव किया है. प्रधानमंत्री सनाय ताकाइची के सरकार ने दूसरे देशों को बेचे जाने वाले हथियारों की सूची में घातक हथियार (lethal Weapons) को भी शामिल कर लिया है. जापान ने दूसरे विश्व युद्ध के बाद खुद को शांति प्रिय देश के रूप में पेश करने के लिए यह नीति अपनाई थी. लेकिन मंगलवार को हुई कैबिनेट और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल की बैठक में इन नियमों में बदल दिया गया.

इस बदलाव से पहले दूसरे देशों को रक्षा सामान बेचने पर कड़ी पाबंदियां थीं. पहले केवल राहत, निगरानी और परिवहन जैसी पांच श्रेणियों के रक्षा उपकरण ही दूसरे देशों को बेचे जाते थे. लेकिन अब ये सीमाएं हटा दी गई हैं. अब जापान दूसरे देशों को युद्धपोत और मिसाइल जैसे घातक हथियार भी बेच सकता है.

जापान के इस कदम का उसके चिर प्रतिद्वंद्वी चीन ने विरोध किया है. वहीं फिलीपींस और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में इस फैसला का स्वागत किया है. इस फैसले के बाद भी जापान ने यह दोहराया है कि वो अब भी दूसरे विश्व युद्ध के बाद अपनाए गए अपने 'शांतिप्रिय देश' के मूल सिद्धांतों पर कायम है.

जापान किन देशों को बेचेगा अपने हथियार

जापान का कहना है कि आज के समय कोई भी देश अपनी सुरक्षा अकेले के दम पर नहीं कर सकता है. इसलिए शांति बनाए रखने के लिए सहयोगी देशों की ताकत बढ़ाना और रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाना जरूरी है. जापान ने दूसरे देशों को घातक हथियार बेचने का फैसला तो कर लिया है. इससे अब दूसरे देशों को युद्धपोत, कॉम्बैट ड्रोन और अन्य हथियार की बिक्री का रास्ता साफ हो गया है. लेकिन यह सौदा उतना आसान नहीं होगा. अभी भी किसी सौदे तक पहुंचने से पहले उसकी जांच नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल करेगी.

जापान केवल उन्हीं देशों को ये घातक रक्षा उपकरण देगा, जिनके साथ उसका समझौता है. युद्ध में शामिल देशों को हथियार नहीं दिए जाएंगे, किसी खास परिस्थिति में ही उन्हें ये हथियार दिए जाएंगे. जापान जिन देशों के अपने हथियार देगा, वे देश किसी तीसरे देश को उन हथियारों को नहीं भेज पाएंगे. जापान दूसरे देशों में अपने हथियारों पर कड़ी निगरानी भी रखेगा.

जापान के इस फैसले का फिलीपींस ने स्वागत किया है. माना जा रहा है कि जापान जल्द ही अपना एक पुराना युद्धपोत फिलीपींस को बेच सकता है. फिलीपींस का कहना है कि इससे उसकी सुरक्षा मजबूत होगी और क्षेत्र में संतुलन बना रहेगा.

फिलीपींस और जापान मिलकर उस रणनीतिक क्षेत्र का हिस्सा हैं जिसे 'फर्स्ट आइलैंड चेन' कहा जाता है. यह गठबंधन चीन की दक्षिण चीन सागर में पहुंच को सीमित करता है.

जापान के लिए कितना बड़ा खतरा है चीन

चीन से संभावित खतरे को देखते हुए जापान भी अपनी सैन्य ताकत बढ़ा रहा है. वह मिसाइल, स्टेल्थ फाइटर जेट और ड्रोन खरीद रहा है. इसके अलावा वह ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर छठवीं पीढ़ी का फाइटर जेट विकसित करने में लगा हुआ है. इसके 2030 के दशक में तैयार हो जाने की उम्मीद है.

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जापान ने अभी शनिवार को ही ऑस्ट्रेलिया के साथ 6.5 अरब डॉलर की डील की है. इसमें वह ऑस्ट्रेलिया को तीन युद्धपोत देगा और कुछ उसके साथ मिलकर आठ युद्धपोत विकसित करेगा. पिछले कुछ सालों में जापान ने अपना रक्षा बजट बढ़ाकर डीजीपी के दो फीसदी के बराबर कर दिया है. उसकी अपने रक्षा बजट को और बढ़ाने की योजना भी है. 

जापान खुद भी सेना मजबूत कर रहा है

पहले जापान का रक्षा उद्योग छोटा और सीमित था, क्योंकि वह सिर्फ अपनी सेना के लिए काम करता था. लेकिन अब बदलते हालात में जापान अपनी सैन्य ताकत और रक्षा उद्योग दोनों को तेजी से बढ़ा रहा है. जापान इस नीति से अपने रक्षा उद्योग को भी बढ़ाना चाहता है. अब तक जापानी कंपनियां केवल अपनी सेना के लिए काम करती थीं. इससे लागत ज्यादा और उत्पादन कम होता था.लेकिन अब निर्यात बढ़ाकर जापान अपनी कंपनियों को बड़ा बाजार देना चाहता है. कम लागत में बेहतर क्षमता के साथ ज्यादा उत्पादन होगा. 

जापान का 17 देशों के साथ सैन्य समझौता है. इसलिए इस समझौते के दायरे में ये 17 देश ही आएंगे. इससे पहले जापान ने 2014 से कुछ गैर-घातक सैन्य साजो-सामान का निर्यात शुरू किया था. साल 2023 में उसने नियमों में बदलाव कर कुछ घातक हथियारों के कल-पुर्जे बेचने की इजाजत दी थी.

इसी बदलाव के चलते जापान अब ब्रिटेन और इटली के साथ मिलकर नई पीढ़ी का फाइटर जेट भी बना रहा है. उसने अभी हाल ही में ऑस्ट्रेलिया के साथ 6.5 अरब डॉलर की डील की है. इसमें वह ऑस्ट्रेलिया को तीन युद्धपोत देगा और आठ उसके साथ मिलकर विकसित करेगा. 

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