- हमास ने 7 अक्टूबर को इजरायल पर किए थे हमले
- गाजा पट्टी पर इजरायल ने तेज किए ग्राउंड ऑपरेशन
- जंग में अब तक 12000 लोगों की मौत, 240 बंधक
Israel Hamas War: इजरायल और फिलिस्तीनी संगठन हमास (Hamas) के बीच जंग (Israel-Palestine War) का सोमवार (13 नवंबर) को 37वां दिन है. 7 अक्टूबर को हमास ने गाजा पट्टी से इजरायल की तरफ 5000 से ज्यादा रॉकेट दागे थे. हमास के लड़ाकों ने सुरंगों के रास्ते इजरायल में घुसपैठ की थी और 1400 लोगों को मौत के घाट उतार दिया था. उसके बाद से इजरायल गाजा पट्टी (Gaza Strip) पर हमास के खिलाफ आर या पार की लड़ाई लड़ रहा है. इजरायल ने गाजा में अस्पतालों को टारगेट करना शुरू कर दिया है. सोमवार को इजरायली सेना के टैंक गाजा के मुख्य अस्पताल के गेट तक पहुंच गई. जंग के बीच गाजा के अल शिफा अस्पताल (Gaza's Al Shifa Hospital) में फ्यूल की कमी हो जाने से बड़ा संकट हो गया है.
समाचार एजेंसी 'रॉयटर्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्यूल की सप्लाई बंद होने से मशीनें और मेडिकल इक्यूपमेंट्स नहीं चल रहे हैं, जिससे मरीजों की मौत हो रही है. इसमें नवजात बच्चे भी शामिल हैं. वहीं, इंक्यूबेटर में नवजात बच्चों को एक दूसरे से सटाकर रखा जा रहा है, ताकि उन्हें ह्यूमन हीट से सही टेंपरेचर दिया जा सके. डॉक्टर के मुताबिक, एक बेड पर 39 बच्चे लिटाए गए हैं.
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इजरायल-हमास युद्ध : गाजा का सबसे बड़ा अस्पताल भी मरीजों को जीवित रखने के लिए कर रहा है संघर्ष
इजरायल के आंकड़ों के अनुसार, 7 अक्टूबर से शुरू हुए जंग में अब तक 12000 लोग मारे गए हैं. हमास ने 240 लोगों को बंधक बनाकर गाजा के सुरंगों में छिपा रखा है. इस जंग में आधे से ज्यादा गाजावासी बेघर हो गए हैं. इजरायल ने उत्तरी गाजा के आधे हिस्से को पूरी तरह से खाली करने का आदेश दिया है. गाजा के चिकित्सा अधिकारियों का कहना है कि जंग के बीच 11000 से अधिक लोगों के मारे जाने की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें से लगभग 40% बच्चे हैं.
नवजात बच्चों को गाजा के अल शिफा अस्पताल में मजबूर डॉक्टरों की देखरेख में रखा गया है. ये अस्पताल इजरायली टैंकों से घिरा हुआ है. यहां बिजली, पानी, भोजन, दवाओं और मेडिकल डिवाइस की किल्लत है.
अल शिफ़ा अस्पताल में पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट की हेड डॉ. मोहम्मद तबाशा ने सोमवार को एक टेलीफोनिक इंटरव्यू में कहा, "कल यहां 39 बच्चे थे और संख्या 36 हो गई है." उन्होंने कहा, "मैं नहीं कह सकता कि वे कितने समय तक चल सकेंगे. मैं आज या अगले एक घंटे में दो और बच्चों को खो सकता हूं.''
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तबाशा ने कहा, "इसके बजाय बिजली की कमी के कारण इन बच्चों को इंक्यूबेटर से जनरल बेड पर ले जाना पड़ा. उन्हें एक-दूसरे के बगल में लिटाया गया है. कुछ नैपी के पैकेट दिए गए हैं. बेड पर स्टराइल गॉज और प्लास्टिक की थैलियां भी पड़ी हैं.
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डॉ. मोहम्मद तबाशा कहती हैं, "इन बच्चों का शरीर ठंडा हो रहा है. बिजली कटौती के कारण तापमान स्थिर नहीं है. इंफेक्शन कंट्रोल उपायों की कमी की वजह से बच्चे एक-दूसरे तक वायरस पहुंचा रहे हैं और उनमें कोई इम्यूनिटी नहीं है."
उन्होंने कहा, "अब उनके दूध और बोतल टीट को जरूरी मानक के हिसाब से स्टरलाइज़ करने का कोई तरीका नहीं है. इसके नतीजे के रूप में कुछ बच्चों को गैस्ट्राइटिस हो गया. वे दस्त और उल्टी से पीड़ित थे, जिसका मतलब उन्हें डिहाइड्रेशन का गंभीर खतरा है."
"आप धीरे-धीरे उन्हें मार रहे हैं"
बच्चों की देखभाल में शामिल डॉ. अहमद अल मोखलालती ने मौजूदा हालात को घातक बताया. उन्होंने अल शिफा से टेलीफोन पर बातचीत में कहा, "वे बहुत बुरी स्थिति में हैं. आप उन्हें धीरे-धीरे मार रहे हैं. जब तक कि कोई उनकी स्थिति को समायोजित करने या सुधारने के लिए हस्तक्षेप नहीं करता."
उन्होंने कहा, "ये बहुत ही गंभीर मामले हैं. आपको इनसे निपटने में बहुत संवेदनशील होना होगा. आपको इनमें से हर बच्चे का बहुत खास तरीके से ख्याल रखना होगा."
इस दौरान डॉ. तबाशा ने बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी चीजें भी बताई. उन्होंने कहा, "हमें इंक्यूबेटर चलाने के लिए बिजली, दूध और बोतल टीट्स के लिए एक उचित स्टरलाइज़र, दवाएं और अगर इन बच्चों में कोई सांस का मरीज है, तो हमें संबंधित मशीनें चाहिए."
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