नई दिल्ली/बर्लिन:
विस्तारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी जगह पाने और इस वैश्विक संगठन में व्यापक सुधार के लिए भारत और जर्मनी संयुक्त रूप से प्रयास तेज करेंगे। दोनों देशों के वरिष्ठ मंत्रियों ने यह विचार व्यक्त किए।
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने बर्लिन में कहा, "सुरक्षा परिषद में सुधार स्वाभाविक रूप से हमारी चर्चा के केंद्र में शामिल विषयों में से एक रहा। हमने जर्मनी के साथ मिलकर और दबाव बढ़ाने का फैसला किया है।"
उनका इशारा भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी बातचीत में हुई चर्चा की तरफ था। दोनों देशों के बीच बर्लिन में गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के संयुक्त नेतृत्व में वार्ता हुई थी।
खुर्शीद ने कहा कि भारत और जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जी4 के जरिए सुधार पर भी दबाव डालते रहेंगे। जी4 में ब्राजील और जापान के अलावा भारत और जर्मनी भी शामिल हैं। हालांकि विदेश मंत्री ने यह साफ नहीं किया कि किस तरह के कदम उठाए जाएंगे।
सुरक्षा परिषद में अभी पांच देश अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और इनमें से हर एक को वीटो का अधिकार हासिल है। इसका मतलब यह है कि इनमें से कोई एक देश अंतरराष्ट्रीय समर्थन को नजरअंदाज करते हुए किसी प्रस्ताव को बेमानी बना सकता है।
जर्मनी के विदेश मंत्री गुइडो वेस्टरवेल्ले ने भी कहा कि सुरक्षा परिषद की पद्धति में बदलाव की अत्यंत दरकार है, क्योंकि इसमें मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं की अभिव्यक्ति का अभाव है। उन्होंने कहा कि भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान जैसे मजबूत देशों को संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की नीति निर्धारण प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा, "अफ्रीका महादेश का भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। एशिया से भी मात्र चीन प्रतिनिधि है। जाहिर है कि यह प्रणाली वास्तविकता प्रदर्शित नहीं करती। हम (भारत और जर्मनी) वैश्विक स्तर पर कानून का राज कायम करने के लिए काम करते रहेंगे।"
संयुक्त राष्ट्र में चार बड़े योगदान कर्ता देशों में अमेरिका और जापान के बाद जर्मनी का नंबर आता है।
विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद ने बर्लिन में कहा, "सुरक्षा परिषद में सुधार स्वाभाविक रूप से हमारी चर्चा के केंद्र में शामिल विषयों में से एक रहा। हमने जर्मनी के साथ मिलकर और दबाव बढ़ाने का फैसला किया है।"
उनका इशारा भारत-जर्मनी अंतर-सरकारी बातचीत में हुई चर्चा की तरफ था। दोनों देशों के बीच बर्लिन में गुरुवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और जर्मनी की चांसलर एंजेला मर्केल के संयुक्त नेतृत्व में वार्ता हुई थी।
खुर्शीद ने कहा कि भारत और जर्मनी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जी4 के जरिए सुधार पर भी दबाव डालते रहेंगे। जी4 में ब्राजील और जापान के अलावा भारत और जर्मनी भी शामिल हैं। हालांकि विदेश मंत्री ने यह साफ नहीं किया कि किस तरह के कदम उठाए जाएंगे।
सुरक्षा परिषद में अभी पांच देश अमेरिका, चीन, रूस, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं और इनमें से हर एक को वीटो का अधिकार हासिल है। इसका मतलब यह है कि इनमें से कोई एक देश अंतरराष्ट्रीय समर्थन को नजरअंदाज करते हुए किसी प्रस्ताव को बेमानी बना सकता है।
जर्मनी के विदेश मंत्री गुइडो वेस्टरवेल्ले ने भी कहा कि सुरक्षा परिषद की पद्धति में बदलाव की अत्यंत दरकार है, क्योंकि इसमें मौजूदा वैश्विक वास्तविकताओं की अभिव्यक्ति का अभाव है। उन्होंने कहा कि भारत, जर्मनी, ब्राजील और जापान जैसे मजबूत देशों को संयुक्त राष्ट्र प्रणाली की नीति निर्धारण प्रक्रिया से बाहर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा, "अफ्रीका महादेश का भी कोई प्रतिनिधित्व नहीं है। एशिया से भी मात्र चीन प्रतिनिधि है। जाहिर है कि यह प्रणाली वास्तविकता प्रदर्शित नहीं करती। हम (भारत और जर्मनी) वैश्विक स्तर पर कानून का राज कायम करने के लिए काम करते रहेंगे।"
संयुक्त राष्ट्र में चार बड़े योगदान कर्ता देशों में अमेरिका और जापान के बाद जर्मनी का नंबर आता है।