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सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने पर विचार कर रहा मिस्र, कल संसद में होगा मतदान

मिस्र के लिए सऊदी अरब एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है. सीसी के शासनकाल में, सऊदी अरब ने मिस्र को अरबों की सहायता दी है, केंद्रीय बैंक में जमा राशि रखी है और ऊर्जा की आपूर्ति की है.

सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने पर विचार कर रहा मिस्र, कल संसद में होगा मतदान
मिस्र के राष्ट्रपति सऊदी के क्राउन प्रिंस सलमान के साथ. (फोटो-एनडीटीवी)
  • मिस्र की संसद में सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के प्रस्ताव पर क्षेत्रीय तनाव के बीच विचार किया जाएगा
  • मिस्र का सैन्य समर्थन सऊदी अरब की रक्षा के लिए है और इसका उद्देश्य यमन या अन्य देशों पर हमला नहीं है
  • राष्ट्रपति अल-सीसी ने कहा कि मिस्र की सैन्य कार्रवाई केवल मित्र अरब देशों की सीमाओं की रक्षा तक सीमित रहेगी

यमन संकट और क्षेत्रीय तनाव के बीच मिस्र की संसद में सोमवार को सऊदी अरब को सैन्य सहायता देने के प्रस्ताव पर विचार होना है. इससे पश्चिम एशिया की राजनीति में नए समीकरण बन सकते हैं. इस सैन्य सहायता की खास बात ये है कि यमन सऊदी की रक्षा तो करेगा मगर किसी देश पर हमला नहीं करेगा.

सऊदी की सुरक्षा पर हमला नहीं

मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी ने इस बारे में कहा कि मिस्र की प्रस्तावित सैन्य पहल का उद्देश्य सऊदी अरब के क्षेत्र की रक्षा करना है, न कि यमन पर हमला करना. उन्होंने यह भी कहा कि अगर किसी अन्य अरब देश से अनुरोध आता है, तो मिस्र उसके क्षेत्र की भी रक्षा करेगा. राष्ट्रपति के प्रवक्ता के अनुसार, अल-सीसी ने कहा कि इसका मकसद सऊदी अरब की जमीन और सीमाओं की रक्षा करना है. उन्होंने स्पष्ट किया कि मिस्र की सैन्य कार्रवाई मिस्र की सीमाओं या किसी ऐसे मित्र अरब देश की सीमाओं से आगे नहीं जाएगी, जिसकी सुरक्षा और स्थिरता को बनाए रखने के लिए मिस्र प्रतिबद्ध है.

मिस्र की सेना क्या ताकतवर है

'इजिप्ट फोरम 2026' के तीसरे दिन 'होमलैंड एंड सिटीज़न सिक्योरिटी' (मातृभूमि और नागरिक सुरक्षा) सत्र में बोलते हुए, अल-सीसी ने कहा कि अरब देशों की राष्ट्रीय सुरक्षा एक-दूसरे से जुड़ी हुई है. उन्होंने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में मिस्र के मित्र देशों की स्थिरता, मिस्र की अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का ही एक हिस्सा है. उन्होंने बताया कि खाड़ी देशों को मिस्र का समर्थन, साझा अरब राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने का ही एक विस्तार है. साथ ही, उन्होंने सूडान, लीबिया और सोमालिया सहित सभी अरब देशों में स्थिरता बहाल करने की आवश्यकता पर जोर दिया. आपको बता दे कि इस क्षेत्र में मिस्र की सेना सबसे मजबूत मानी जाती है.

2015 में भी की थी मदद

मिस्र के लिए सऊदी अरब एक महत्वपूर्ण रणनीतिक और आर्थिक साझेदार है. सीसी के शासनकाल में, सऊदी अरब ने मिस्र को अरबों की सहायता दी है, केंद्रीय बैंक में जमा राशि रखी है और ऊर्जा की आपूर्ति की है. यमन में युद्ध 2014 में शुरू हुआ था. उस समय हूती विद्रोहियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार को उत्तरी राजधानी से बाहर निकाल दिया था, जिसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व में वहां सैन्य हस्तक्षेप हुआ. मिस्र मार्च 2015 में सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन में मुख्य रूप से एक नौसैनिक साझेदार के तौर पर शामिल हुआ. उसने लाल सागर में जहाजों के आवागमन को सुरक्षित रखने के लिए अपने युद्धपोत भेजे और हवाई सहायता देने का भी वादा किया. इसके अलावा, मिस्र ने लगभग 800 जमीनी सैनिक भी तैनात किए, लेकिन उस समय भी युद्ध में उसकी भूमिका काफी सीमित रही. 

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