हांगकांग:
चीन दुनिया का छठा सबसे बड़ा स्वर्ण धारक देश बन गया है। चीन अपनी आरक्षित संपत्तियों को अमेरिकी डालर से अलग करना चाहता है, जिसकी वजह से उसका स्वर्णभंडार बढ़ रहा है। वित्त मंत्रालय ने वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल (डब्ल्यूसीजी) के आंकड़ों के हवाले से कहा है कि चीन का सोने का भंडार मार्च तक 1,054.1 टन पर पहुंच गया। यह अमेरिका के भंडार का करीब 12.5 प्रतिशत है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था 2009 से छह साल पहले तक 600 टन का स्वर्ण भंडार रखा था। डब्ल्यूजीसी अंतरराष्ट्रीय बिना लाभ के लिए काम करने वाला संगठन है, जो निवेशकों को सोने के बारे में महत्वपूर्ण सूचनाएं प्रदान करता है। स्वर्ण भंडार के मामले में अमेरिका 8,133.5 टन के साथ पहले स्थान पर है। जर्मनी के पास 3,406.8 टन सोना है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (3,005.3 टन), इटली (2,451.8 टन) और फ्रांस (2,435.4 टन) का स्थान आता है। चीन की कुल आरक्षित परिसंपत्तियां 3,000 अरब डालर की हैं जिनमें सोने की हिस्सेदारी मात्र 1.6 प्रतिशत या 55 अरब डॉलर की हैं।
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