ब्रिटेन में भारतीय मूल के कारोबारी और मकान मालिक निरपाल सिंह रियात से उनका प्रतिष्ठित शाही सम्मान वापस ले लिया गया है. यह फैसला तब लिया गया जब उनके खिलाफ किरायेदारों को सीलन भरे और खराब हालत वाले कमरों में रखने तथा आवास संबंधी नियमों के उल्लंघन के आरोप साबित हुए.
निरपाल सिंह रियात को वर्ष 2010 में दिवंगत महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने धर्मार्थ कार्यों और ब्रिटेन में पंजाबी समुदाय के लिए योगदान के सम्मान में ‘ऑर्डर ऑफ द ब्रिटिश एम्पायर' (OBE) से सम्मानित किया था. उस समय उन्हें समुदाय और समाज सेवा का प्रमुख चेहरा माना जाता था.
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हालांकि बाद के वर्षों में उनके कारोबारी कामकाज को लेकर सवाल उठने लगे. करीब तीन साल पहले अदालत में उनके प्रॉपर्टी कारोबार से जुड़े कई तथ्य सामने आए. जांच में पाया गया कि कुछ संपत्तियों को कथित रूप से अवैध तरीके से छोटे फ्लैटों में बदला गया था. इसके अलावा इमारतों के बाहरी हिस्सों में बने कमरों को जरूरतमंद लोगों को किराये पर दिया गया, जहां रहने की परिस्थितियां बेहद खराब बताई गईं.
स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इन मामलों में रियात पर करीब तीन लाख पाउंड यानी लगभग 3.8 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया था. इसे पश्चिमी लंदन में इस तरह के मामलों में लगाए गए सबसे बड़े जुर्मानों में से एक माना गया. इससे पहले भी उन पर संपत्तियों में नियमों के उल्लंघन के आरोप लग चुके थे.
ब्रिटेन के कैबिनेट कार्यालय की संशोधित सूची में अब उनका नाम उन लोगों में शामिल कर दिया गया है जिनके सम्मान रद्द किए गए हैं. राजा चार्ल्स तृतीय के निर्देश पर उनका नाम आधिकारिक सम्मान सूची से भी हटा दिया गया है. हालांकि रियात ने अपने ऊपर लगे आरोपों को मनगढ़ंत बताते हुए उन्हें खारिज किया है.
बताया जा रहा है कि यह मामला हाउंस्लो के एक स्थानीय पार्षद द्वारा ‘ऑनर्स फॉरफीचर कमेटी' के सामने उठाया गया था. यह समिति ऐसे मामलों की समीक्षा करती है जिनमें किसी सम्मानित व्यक्ति के आचरण से सम्मान की प्रतिष्ठा प्रभावित होने की आशंका हो. गौरतलब है कि शाही सम्मान वापस लेने की घटनाएं काफी दुर्लभ होती हैं. इससे पहले वर्ष 2024 में भारतीय मूल के कारोबारी लॉर्ड रामी रेंजर से भी उनका CBE सम्मान वापस ले लिया गया था.
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