मनामा:
बहरीन में सत्ता परिवर्तन की मांग को लेकर देशव्यापी हड़ताल की घोषणा और विरोध प्रदर्शनों में वृद्धि के बाद देश की सात प्रमुख विपक्षी पार्टियों के समूह ने अपनी प्रमुख मांगे रेखांकित की हैं। अमेरिकी समाचार पत्र 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक शिया समुदाय के प्रतिनिधित्व वाली अल वक्फ पार्टी और धर्मनिरपेक्ष पार्टियों के इस समूह ने संवैधानिक राजशाही व्यवस्था की स्थापना और मौजूदा सरकार के विघटन की प्रमुख मांगें रखी हैं। विपक्षी दलों ने सभी राजनीतिक कैदियों की रिहाई, चुनाव सुधार और नई 'राष्ट्रीय मुक्ति' सरकार के गठन की मांग की है। विपक्षी दलों की मांगों में विरोध प्रदर्शन के दौरान सात प्रदर्शनकारियों की मौत की स्वतंत्र जांच की मांग भी शामिल है। मिस्र और ट्यूनीशिया में जनांदोलन के बाद 14 फरवरी को बहरीन में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए थे। मंगलवार को प्रदर्शनकारियों ने राजधानी के पर्ल चौराहे का घेराव कर लिया। बहरीन में प्रदर्शन कर रहे ज्यादातर लोग शिया समुदाय के हैं और वह सत्ताधारी सुन्नी बहुल सरकार से ज्यादा अधिकारों की मांग कर रहे हैं। बहरीन में सरकार विरोधी प्रदर्शनकारियों ने कहा है कि गुरुवार तक सरकार के इस्तीफा नहीं देने पर देशव्यापी हड़ताल आयोजित की जाएगी और विरोध प्रदर्शन तेज किए जाएंगे। बहरीन के शाह हमद बिन ईसा अल खलीफा प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए मनामा से सेना हटाने और राजनीतिक कैदियों को रिहा करने पर सहमत हुए हैं। खलीफा ने अपने पद से इस्तीफा देने और संविधान में संशोधन से इंकार किया है। एक विपक्षी कार्यकर्ता ने कहा, "हमने सरकार को इस्तीफा देने के लिए गुरुवार तक का समय दिया है। यदि सरकार इस्तीफा नहीं देती है तो हम विरोध प्रदर्शन तेज करेंगे। यदि लोगों की उपेक्षा की जाती है तो अगले सप्ताह देशव्यापी हड़ताल करेंगे।" विरोधियों को उम्मीद है कि लेबनान में निर्वासन में रह रहे देश के प्रमुख विपक्षी नेता हसन मुसेमा जल्द ही देश लौटेंगे।
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