विज्ञापन

आमना-सामना नहीं, पाक अधिकारी पहुंचा रहे मैसेज... US-ईरान की बातचीत का फॉर्मेट, शर्तें; यहां जानें सब कुछ

अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया भर की नजर टिकी हुई है. यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे.

आमना-सामना नहीं, पाक अधिकारी पहुंचा रहे मैसेज... US-ईरान की बातचीत का फॉर्मेट, शर्तें; यहां जानें सब कुछ
  • अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में युद्धविराम के लिए अलग-अलग कमरों में बैठकर बातचीत कर रहे हैं
  • ईरान ने बातचीत शुरू होने से पहले प्रतिबंधित संपत्तियों की रिहाई जैसी सशर्त मांगें रखीं हैं
  • अमेरिका ने होर्मुज स्ट्रेट को हर हाल में खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की मांग की है
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।
नई दिल्ली:

अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर को लेकर बातचीत में शामिल होने के लिए दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इस्लामाबाद में हैं. इस वार्ता के लिए कई इंतजाम किए गए हैं, जिसमें आमने-सामने बातचीत और अलग-अलग कमरों में बातचीत, दोनों शामिल हैं. हालांकि दोनों देशों के बीच कोई फॉर्मेट अभी भी तय नहीं है. दोनों पक्षों के बीच गहरे अविश्वास, परस्पर विरोधी मांगों और संघर्ष से बाहर निकलने के बढ़ते दबाव के बीच यह वार्ता होने जा रही है. दोनों पक्षों के बीच 'युद्ध से निकलने का रास्ता खोजने की जरूरत' के अलावा ज्यादा कुछ कॉमन नहीं लगता.

सूत्रों ने कहा कि पाकिस्तान ने दोनों स्थितियों के लिए तैयारी कर ली है. इस्लामाबाद या तो दोनों पक्षों के बीच सीधी बातचीत कराने के लिए तैयार है या उनके डेलीगेशन के लिए अलग-अलग जगहों का इंतजाम करके उनके बीच संदेश पहुंचाने के लिए तैयार है.

बातचीत का फॉर्मेट तय नहीं, अलग-अलग कमरों में बैठने की उम्मीद

अल जजीरा के अनुसार, अमेरिका और ईरानी डेलीगेशन के इस्लामाबाद में एक ही होटल में रुकने की उम्मीद है, लेकिन वे आमने-सामने बातचीत नहीं करेंगे. इसके बजाय, उम्मीद है कि वे अलग-अलग कमरों में रहेंगे, जबकि पाकिस्तानी अधिकारी उनके बीच मैसेज पहुंचाएंगे.

Latest and Breaking News on NDTV
दोनों पक्षों के नेताओं का बयान भी अलग-अलग आ रहा है. एक तरफ ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना दबदबा बनाए रखने के साथ-साथ यूरेनियम संवर्धन नहीं छोड़ना चाहता है. वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि इस समझौते में 99 फीसदी हिस्सा ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना है.

अमेरिका की किसी भी कीमत पर होर्मुज स्ट्रेट खोलने की धमकी

होर्मुज संकट को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा है कि स्ट्रेट को किसी भी कीमत पर खोला जाएगा, भले ही इसके लिए ईरान साथ हो या नहीं. दूसरी तरफ तस्त्रीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, 71 सदस्यीय ईरानी डेलीगेशन का नेतृत्व कर रहे संसद के स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबफ ने इस्लामाबाद पहुंचने पर सावधानी भरा रुख अपनाया और कहा कि ईरान अच्छे इरादों के साथ, लेकिन भरोसे के बिना बातचीत में शामिल हो रहा है.

Latest and Breaking News on NDTV

ईरान ने रखीं पक्की शर्तें

ईरान ने पक्की शर्तें रखी हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, ईरान संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबफ ने कहा कि बातचीत शुरू होने से पहले प्रतिबंधित और ब्लॉक किए गए एसेट्स को रिलीज करने जैसे मुद्दों को सुलझाना होगा.

अमेरिकी डेलिगेशन को उपराष्ट्रपति जेडी वेंस लीड कर रहे हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, उन्होंने मीडिया से कहा, "मुझे लगता है कि यह सकारात्मक होगा. अगर ईरान अच्छी नीयत से बातचीत करता है तो हम निश्चित रूप से खुले हाथ बढ़ाने को तैयार हैं."

Latest and Breaking News on NDTV

पाक पीएम ने बातचीत को बताया 'करो या मरो' वाला पल

इधर पाकिस्तान ने खुद को एक अहम मध्यस्थ के तौर पर पेश किया है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बातचीत को 'करो या मरो' वाला पल बताया. यह बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब बड़े पैमाने पर इलाके के हालात अस्थिर बने हुए हैं. द वॉशिंगटन पोस्ट और द न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, वैसे तो तकनीकी सीजफायर लागू है, लेकिन लेबनान में इजरायली ऑपरेशन जारी है, इससे डिप्लोमैटिक कोशिशें मुश्किल हो रही हैं.

द वॉशिंगटन पोस्ट के अनुसार, एक बड़ी रुकावट होर्मुज स्ट्रेट है, जो एक जरूरी ग्लोबल एनर्जी रूट है. ईरान ने ऐसे कंट्रोल लगाए हैं जिनके तहत टैंकरों को परमिशन लेनी होगी और टोल वसूलना शुरू कर दिया है. इस कदम को अमेरिकी अधिकारियों ने 'गैर-कानूनी' करार कर स्वीकार करने से मना कर दिया.

ईरान होर्मुज स्ट्रेट पर अपना दबदबा बनाए रखने पर तुला

होर्मुज संकट का असर वैश्विक बाजार पर देखने को मिला है. इसकी वजह से तेल की कीमतों में भी उछाल देखने को मिला है. अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह से फिर से खोलना चाहता है, जबकि ईरान इस समुद्री मार्ग पर अपना दबदबा बनाए रखने पर तुला हुआ है.

बातचीत की स्थिति अभी भी बहुत अलग है. द वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ईरान ने यूरेनियम संवर्धन रोकने और अपने मिसाइल प्रोग्राम पर रोक लगाने की अमेरिका की मांगों को खारिज कर दिया है. वहीं अमेरिका ने संकेत दिया है कि बैन में राहत डील के बाद ही मिलेगी.

Latest and Breaking News on NDTV

अमेरिकी उपराष्ट्रपति की राजनीतिक समझ की परीक्षा

यह अभी साफ नहीं है कि बातचीत डायरेक्ट होगी या मध्यस्थता होगी. द वॉशिंगटन पोस्ट ने बताया, दोनों पक्ष अलग-अलग बैठ सकते हैं. वेंस के ऊपर इस वक्त एक बड़ी जिम्मेदारी है. द वॉल स्ट्रीट जर्नल ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने उन्हें बातचीत को लीड करने के लिए भेजा है. ऐसे में इस बातचीत का नतीजा उपराष्ट्रपति की राजनीतिक समझ से काफी हद तक जुड़ा हुआ है.

पाकिस्तान की भूमिका को लेकर द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि पाक ने शुरुआती सीजफायर में मदद की और अंदरूनी आर्थिक और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद वॉशिंगटन और तेहरान दोनों के साथ संबंधों का फायदा उठा रहा है. मौजूदा लड़ाई इस साल की शुरुआत में बढ़ गई, जिससे दुनियाभर में एनर्जी सप्लाई को खतरा पैदा हो गया. इस हफ्ते कुछ समय के लिए सीजफायर हुआ, लेकिन यह कितना चलेगा, यह पक्का नहीं है क्योंकि दोनों पक्ष एक-दूसरे के इरादे को परख रहे

हैं.

सुरक्षा को लेकर इस्लामाबाद में रेड अलर्ट

पाकिस्तान के सरकारी रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत से पहले के सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव हुए हैं. पाकिस्तानी मीडिया डॉन के अनुसार, अमेरिका-ईरान की वार्ता से पहले फेडरल कैपिटल ‘रेड अलर्ट' पर थी. दोनों देशों के डेलिगेशन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 10,000 से ज्यादा पुलिस और सुरक्षा वाले तैनात किए गए.

Latest and Breaking News on NDTV

एक दिन पहले डॉन ने सूत्रों के हवाले से बताया कि मल्टी-टियर सिक्योरिटी अरेंजमेंट की देखरेख मिलिट्री करेगी. इसमें रेंजर्स जैसी पैरामिलिट्री फोर्स और इस्लामाबाद और पंजाब पुलिस मदद करेगी. इस्लामाबाद ट्रैफिक पुलिस और नेशनल हाईवे और मोटरवेज पुलिस को सड़कों पर तैनाती है.

कैपिटल पुलिस के करीब 6,000 लोग, फ्रंटियर कॉन्स्टेबुलरी के 900 लोग, और पंजाब कॉन्स्टेबुलरी के 3,000 लोग, रेंजर्स और पाकिस्तान आर्मी के सैनिकों के साथ ड्यूटी करेंगे. करीब 1,000 ट्रैफिक पुलिस अधिकारी भी तैनात किए जा रहे हैं. सेना और रेंजर्स रेड जोन और उच्च स्तरीय सुरक्षा जोन की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे. क्विक रिस्पॉन्स फोर्स की टुकड़ियां भी अलग-अलग जगहों पर तैनाती है.

इसे भी पढ़ें: होर्मुज में अभी सबसे खतरनाक दौर आना बाकी... ईरान-अमेरिका में चल रहे शांति वार्ता के बीच रे डालियो की चेतावनी

अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी दुनिया की नजर

वहीं अमेरिका-ईरान वार्ता पर दुनिया भर की नजर टिकी हुई है. यह प्रतिनिधिमंडल ऐसे समय में इस्लामाबाद पहुंचा है जब लेबनान में इजराइल के हमलों के कारण ईरानी प्रतिनिधिमंडल की यात्रा को लेकर अनिश्चितता जताई जा रही थी और सोशल मीडिया पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे थे. कुछ खबरों में ईरानी मीडिया के हवाले से कहा गया था कि प्रतिनिधिमंडल तभी वार्ता में हिस्सा लेगा, जब युद्धविराम समझौते में तय शर्तें पूरी होंगी.

Latest and Breaking News on NDTV

अमेरिका-ईरान वार्ता का संयुक्त राष्ट्र ने किया स्वागत

इधर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने इस्लामाबाद में हो रही अमेरिका-ईरान वार्ता का स्वागत किया है. समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने ब्रीफिंग में कहा, "वह दोनों पक्षों से आग्रह करते हैं कि वे इस कूटनीतिक अवसर का लाभ उठाते हुए सद्भावना के साथ एक स्थायी और व्यापक समझौते की दिशा में आगे बढ़ें, जिसका उद्देश्य तनाव कम करना और शत्रुता की वापसी को रोकना हो."

दुजारिक ने कहा, "महासचिव इस बात को दोहराते हैं कि अंतरराष्ट्रीय विवादों के शांतिपूर्ण समाधान का कोई अन्य व्यवहार्य विकल्प नहीं है और यह समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून, जिसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर भी शामिल है, के पूर्ण अनुपालन में होना चाहिए. मध्य पूर्व संघर्ष और उसके परिणामों के लिए संयुक्त राष्ट्र प्रमुख के विशेष दूत, जीन अर्नाल्ट, कूटनीतिक प्रयासों को समर्थन देने के लिए अभी भी इस क्षेत्र में मौजूद हैं."

Latest and Breaking News on NDTV

इजरायल के लेबनान पर हमले जारी

ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच बुधवार तड़के एक अस्थायी संघर्ष विराम (सीजफायर) पर सहमति बनी थी. इसके बावजूद इजरायल ने लेबनान पर अपने हमले जारी रखे हैं. इजरायल लेबनान में ईरान समर्थित उग्रवादी समूह हिज्बुल्लाह पर लगातार हमले कर रहा है. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कलीबाफ का कहना है कि लेबनान पर हमलों को रोकना इस संघर्ष विराम का एक अहम हिस्सा है.

इसे भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका ने पाकिस्तान को बताई शांति की शर्तें, अब आमने-सामने बात कराने की कोशिश, समझिए क्या है मुश्किल

इसे भी पढ़ें: इजरायल का लेबनान में फिर ताबड़तोड़ हमला, 3 की मौत, इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान वार्ता के बीच अटैक

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com