Iran internet cable threat: न UPI और न यूट्यूब... ईरान का एक कदम, पूरी दुनिया पर छाएगा संकट!

नई दिल्ली. कल्पना कीजिए कि अचानक आपका इंटरनेट बंद हो जाए. न UPI चले, न यूट्यूब और न ही ऑफिस का काम पूरा हो पाए. अगर ऐसा होता है तो आमतौर पर हम इसे नेटवर्क की समस्या मानते हैं, लेकिन आने वाले समय में इसकी वजह हजारों किलोमीटर दूर समुद्र की गहराई में छिपी हो सकती है.
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक ऐसी चेतावनी दी है, जिसने दुनिया भर की टेक कंपनियों और सरकारों की चिंता बढ़ा दी है. ईरान के सैन्य प्रवक्ता इब्राहिम जोलफागरी के बयान के मुताबिक, ईरान अपने समुद्री क्षेत्र से गुजरने वाले अंडरसी इंटरनेट केबल्स पर “टोल” लगाने पर विचार कर रहा है.

यह सुनने में मामूली लग सकता है, लेकिन हकीकत यह है कि यह पूरी दुनिया की इंटरनेट सप्लाई चेन को हिला सकता है. तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, दुनिया का करीब 99% इंटरनेट डेटा सैटेलाइट से नहीं, बल्कि समुद्र के नीचे बिछे फाइबर ऑप्टिक केबल्स के जरिए ट्रांसफर होता है.

हॉर्मुज बना डिजिटल ‘हॉटस्पॉट’
स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज का इलाका अब तक तेल सप्लाई के लिए ही चर्चा में रहता था, लेकिन अब यह डिजिटल दुनिया का भी अहम केंद्र बन चुका है. एशिया, यूरोप और अफ्रीका को जोड़ने वाली कई प्रमुख डेटा केबल्स इसी मार्ग से गुजरती हैं. अगर यहां किसी तरह की पाबंदी लगती है, टोल वसूला जाता है या युद्ध के चलते इन केबल्स को नुकसान होता है, तो इंटरनेट ट्रैफिक पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसे ऐसे समझिए जैसे किसी राष्ट्रीय हाईवे पर अचानक भारी टोल लगा दिया जाए या रास्ता ही बंद कर दिया जाए.

भारत पर क्या होगा असर?
भारत भी इस संभावित संकट से अछूता नहीं है. फाल्कन, SEA-ME-WE-6 और अन्य प्रमुख केबल्स भारत के मुंबई और चेन्नई को वैश्विक नेटवर्क से जोड़ती हैं. रिलायंस जियो और एयरटेल जैसी बड़ी कंपनियां इन्हीं केबल्स पर निर्भर हैं. यदि इन केबल्स पर असर पड़ता है, तो भारत में इंटरनेट की स्पीड धीमी हो सकती है, डाटा की कीमतें बढ़ सकती हैं और डिजिटल सेवाओं—जैसे ऑनलाइन बैंकिंग, यूपीआई, स्ट्रीमिंग और वर्क-फ्रॉम-होम—पर बुरा असर पड़ सकता है.

मरम्मत में लग सकते हैं महीनों
विशेषज्ञों का कहना है कि समुद्र के नीचे केबल्स की मरम्मत आसान नहीं होती. अगर कोई केबल क्षतिग्रस्त होती है, तो उसे ठीक करने में कई महीने तक लग सकते हैं.

डिजिटल जिंदगी पर सीधा असर
स्पष्ट है कि ईरान-अमेरिका तनाव अब पारंपरिक युद्ध तक सीमित नहीं रहा. इसका असर सीधे आम लोगों की डिजिटल जिंदगी पर पड़ सकता है. स्मार्टफोन, बैंकिंग सिस्टम और पूरा डिजिटल इकोसिस्टम इसी नेटवर्क पर टिका है. ऐसे में अगर हालात और बिगड़ते हैं, तो यह “डिजिटल वॉर” का नया रूप बन सकता है, जिसका असर पूरी दुनिया को झेलना पड़ सकता है.