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This Article is From Feb 18, 2018

नैनी सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए अब गोबर गैस से भोजन पकाने की तैयारी

नैनी सेंट्रल जेल में लगभग 4,000 कैदी बंद हैं. नैनी सेंट्रल जेल के डीआईजी बी.आर. वर्मा ने बताया, “हमने 14.81 लाख रुपये की लागत से गोबर गैस प्लांट लगाने का एक प्रस्ताव 8 दिसंबर, 2017 को शासन को भेजा है और सरकार से इस संबंध में मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं.” 

नैनी सेंट्रल जेल में कैदियों के लिए अब गोबर गैस से भोजन पकाने की तैयारी
जेल की प्रतीकात्‍मक फोटो
  • गोबर गैस प्लांट लगाने का एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया है.
  • नैनी सेंट्रल जेल में लगभग 4,000 कैदी बंद हैं.
  • जेल में स्थित गोशाला में कुल 115 पशु हैं जिनसे पर्याप्त गोबर मिल जाता है.
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लखनऊ:

इलाहाबाद की नैनी सेंट्रल जेल कैदियों के लिए गोबर गैस से भोजन पकाने की योजना पर काम कर रहा है और इस संबंध में गोबर गैस प्लांट लगाने का एक प्रस्ताव शासन को भेजा गया है. नैनी सेंट्रल जेल में लगभग 4,000 कैदी बंद हैं. नैनी सेंट्रल जेल के डीआईजी बी.आर. वर्मा ने बताया, “हमने 14.81 लाख रुपये की लागत से गोबर गैस प्लांट लगाने का एक प्रस्ताव 8 दिसंबर, 2017 को शासन को भेजा है और सरकार से इस संबंध में मंजूरी की प्रतीक्षा कर रहे हैं.” 

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उन्होंने बताया कि गोबर गैस प्लांट से निकले ईंधन का उपयोग कैदियों के लिए भोजन बनाने के साथ ही कुछ इलाकों में प्रकाश व्यवस्था में भी किया जाएगा. जेल में स्थित गोशाला में कुल 115 पशु हैं जिनसे पर्याप्त गोबर मिल जाता है. फिलहाल गोबर का उपयोग जेल के भीतर सब्जियों की खेती में खाद के तौर पर किया जाता है.

वर्मा ने बताया, “अभी कैदियों के लिए भोजन पकाने में हर महीने 900 से 1000 एलपीजी सिलेंडरों (घरेलू) की खपत हो जाती है और गोबर गैस प्लांट लगने के बाद एलपीजी सिलेंडरों का खर्च बहुत हद तक घट जाने की संभावना है. वर्तमान में कैदियों के लिए पांच भंडारे चलते हैं.”

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उल्लेखनीय है कि गत 19 जनवरी को यहां परेड ग्राउंड में आयोजित संत सम्मेलन में प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था, “भारतीय गाय के संरक्षण और संवर्धन के लिए जो भी कार्य किए जाएंगे, प्रदेश सरकार उसमें भरपूर सहयोग करेगी. अगर कोई एक गांव मिलकर एक गौशाला का निर्माण करे तो पूरे गांव के ईंधन की जरूरत उस गौशाला से निकली गोबर गैस से पूरी हो सकती है और उन्हें एलपीजी लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी.”

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