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क्या घर खरीदारों को कब्जा के लिए करना होगा इंतजार? केंद्र ने बढ़ाई RERA प्रोजेक्ट की डेडलाइन, जानें वजह

मंत्रालय ने कहा है कि उन रजिस्टर्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को समय-सीमा बढ़ाने की मंज़ूरी दी जा सकती है, जिनके पूरा होने की मूल तारीख 28 फरवरी, 2026 या उसके बाद है.

क्या घर खरीदारों को कब्जा के लिए करना होगा इंतजार? केंद्र ने बढ़ाई RERA प्रोजेक्ट की डेडलाइन, जानें वजह
घल वालों को कब्जे के लिए करना होगा इंतजार

अगर आप अपने नए घर का कब्जा (Possession)  मिलने का इंतज़ार कर रहे हैं, तो आपको थोड़ा और इंतज़ार करना पड़ सकता है. केंद्र सरकार ने देश भर की रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटीज़ (RERAs) को सलाह दी है कि वे योग्य हाउसिंग प्रोजेक्ट्स के पूरा होने की समय-सीमा को चार महीने तक बढ़ा दें. इस कदम से डेवलपर्स को अपने प्रोजेक्ट्स पूरे करने के लिए ज़्यादा समय मिलने की उम्मीद है, हालांकि इससे कई घर खरीदारों को कब्ज़ा मिलने में देरी भी हो सकती है.

आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) ने कहा है कि यह सुझाव पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव को देखते हुए दिया गया है, जिसने ग्लोबल सप्लाई चेन को बाधित किया है और निर्माण कार्यों पर असर डाला है.

क्यों बढ़ाया गया 4 महीने का समय

सरकार के अनुसार, पश्चिम एशिया में संघर्ष और अस्थिरता के कारण निर्माण कार्य में इस्तेमाल होने वाले कई कच्चे माल और उपकरणों को हासिल करना मुश्किल हो गया है. लॉजिस्टिक्स और शिपिंग की लागत भी बढ़ गई है, जिससे डेवलपर्स के लिए और चुनौतियां पैदा हो गई हैं. इन मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, वित्त मंत्रालय के तहत व्यय विभाग ने एक ऑफिस मेमोरेंडम जारी किया है, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति को 'फोर्स मेज्योर' (जिसे टाला नहीं जा सके) माना गया है. RERA एक्ट की धारा 6 के तहत, युद्ध, प्राकृतिक आपदाओं या अन्य असाधारण परिस्थितियों में प्रोजेक्ट की समय सीमा बढ़ाई जा सकती है.

किन प्रोजेक्ट्स को किया गया इसमें शामिल?

मंत्रालय ने कहा है कि उन रजिस्टर्ड रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स को समय-सीमा बढ़ाने की मंज़ूरी दी जा सकती है, जिनके पूरा होने की मूल तारीख 28 फरवरी, 2026 या उसके बाद है. यह उन प्रोजेक्ट्स पर भी लागू होता है जिनके पूरा होने की तारीख में बदलाव के बाद नई तारीख 28 फरवरी, 2026 या उसके बाद तय हुई है, और साथ ही उन प्रोजेक्ट्स पर भी जिनकी पहले बढ़ाई गई समय-सीमा उस तारीख या उसके बाद खत्म हो रही है. यानी योग्य प्रोजेक्ट्स को चार महीने का एक बार का एक्सटेंशन मिल सकता है.

आमतौर पर, प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए ज़्यादा समय मांगने के लिए डेवलपर्स को संबंधित RERA अथॉरिटी से संपर्क करना पड़ता है. हालांकि, इस बार केंद्र ने राज्य RERA अथॉरिटीज को एक कॉमन ऑर्डर जारी करने की सलाह दी है ताकि योग्य प्रोजेक्ट्स को बिना अतिरिक्त कागज़ी कार्रवाई के एक्सटेंशन मिल सके. इसका मकसद प्रशासनिक देरी को कम करना और तेज़ी से राहत पहुंचाना है.

घर खरीदारों पर क्या होगा असर

घर खरीदारों के लिए, इस फ़ैसले का असर हो सकता है कि उन्हें अपने घरों का कब्ज़ा मिलने में और ज़्यादा इंतज़ार करना पड़े. जिन लोगों ने गृह-प्रवेश की योजना बनाई थी, किराए के मकान से निकलने की उम्मीद की थी या पहले की पूरी होने की तारीख के आधार पर वित्तीय योजनाएं बनाई थीं, उन्हें अब अपनी समय-सीमा में बदलाव करना पड़ सकता है. साथ ही, सरकार का मानना ​​है कि इस एक्सटेंशन से डेवलपर्स को उन प्रोजेक्ट्स को पूरा करने में मदद मिलेगी जो सप्लाई चेन में रुकावटों से प्रभावित हुए हैं, बजाय इसके कि उन्हें अधूरा छोड़ दिया जाए.

इसका असर हाउसिंग सेक्टर पर भी पड़ सकता है

चिंताएं सिर्फ़ सरकारी सलाह तक ही सीमित नहीं हैं. जून 2026 में, प्रॉपर्टी कंसल्टेंसी फर्म एनारॉक (Anarock) ने चेतावनी दी थी कि वेस्ट एशिया में बढ़ते तनाव, कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और सप्लाई चेन में रुकावटों का असर देश भर में लगभग 54 लाख घरों की डिलीवरी पर पड़ सकता है.

रिपोर्ट के मुताबिक, अगर यह टकराव लंबे समय तक चलता है, तो कंस्ट्रक्शन की लागत बढ़ सकती है और सीमेंट, स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर जैसे मटीरियल की उपलब्धता पर असर पड़ सकता है. इससे प्रोजेक्ट की लागत बढ़ सकती है और काम पूरा होने में देरी हो सकती है.

वेस्ट एशिया संकट का असर अब सिर्फ़ ईंधन की कीमतों तक ही सीमित नहीं है. ट्रांसपोर्टेशन की ज़्यादा लागत और कंस्ट्रक्शन मटीरियल की सप्लाई में रुकावटों का असर रियल एस्टेट सेक्टर पर भी पड़ रहा है.

हालांकि सरकार के फ़ैसले से इन चुनौतियों का सामना कर रहे डेवलपर्स को राहत मिली है, लेकिन कई घर खरीदारों को अपने घरों की चाबियां पाने के लिए कुछ और महीने इंतज़ार करना पड़ सकता है. जिन खरीदारों के प्रोजेक्ट्स योग्य कैटेगरी में आते हैं, उन्हें काम पूरा होने की नई समय-सीमा के बारे में अपने बिल्डर और संबंधित RERA अथॉरिटी से जानकारी लेनी चाहिए.

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