- बेटी अनुकंपा नियुक्ति के नियमों के तहत आवेदन कर सकती है.
- अनुकंपा नियुक्ति की कुछ नियम और शर्तें होती है.
- अनुकंपा नियुक्ति के आवेदनों के लिए कोई डेडलाइन नहीं होती.
सरकारी सेवा के दौरान पिता की मृत्यु होने पर बेटी अनुकंपा नियुक्ति के नियमों के तहत नौकरी के लिए आवेदन कर सकती है. हालांकि इसके लिए कुछ नियम और शर्तें होती है. मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड के एक पूर्व कर्मचारी की बेटी द्वारा पिता की मौत के 28 साल बाद अनुकंपा नियुक्ति मांगने वाली याचिका को खारिज कर दिया है. महिला के पिता की मृत्यु 1998 में हुई थी.
पूरे मामले में क्या हुआ
कंपनी ने नौकरी देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि मृतक की पत्नी को नियमित पेंशन मिल रही थी और परिवार इतने सालों से अपना गुजारा कर रहा थ.। ऐसे में इतने लंबे समय बाद तात्कालिक आर्थिक संकट का कोई आधार नहीं बनता. वहीं महिला के वकील ने दलील दी कि केवल शादीशुदा होने के आधार पर किसी बेटी को अनुकंपा नियुक्ति के लिए अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता. हालांकि कोर्ट ने माना कि जब परिवार इतने वर्षों तक अपना भरण-पोषण करने में सक्षम रहा, तो तुरंत आर्थिक मदद की आवश्यकता सिद्ध नहीं होती.
हाई कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए एक छूट दी कि यदि महिला यह साबित कर देती है कि उसकी मां को वास्तव में पारिवारिक पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा था, तो वह मामले की दोबारा सुनवाई के लिए फिर से आवेदन कर सकती है.
कौन सी बेटियां अनुकंपा पर नौकरी के लिए आवेदन कर सकती हैं?
पिता की मृत्यु के बाद अविवाहित बेटियां, कानूनी रूप से गोद ली गई बेटियां और कुछ खास मामलों में विवाहित बेटियां भी अनुकंपा नियुक्ति के लिए पात्र होती हैं, बशर्ते वे पूरी तरह से मृतक आश्रित/पिता पर निर्भर रही हों. अगर माता नौकरी के लिए आवेदन नहीं करना चाहती हैं या करने में असमर्थ हैं, तो वे अपनी सहमति से बेटी के नाम की सिफारिश कर सकती हैं.
आवेदन कब और कैसे करें?
दिल्ली हाई कोर्ट के वकील प्रशांत सिसोदिया ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सामान्य रूप से अनुकंपा नियुक्ति का उद्देश्य परिवार को अचानक आई आर्थिक तंगी से तुरंत राहत देना होता है, इसलिए पिता की मृत्यु के तुरंत बाद (जितनी जल्दी हो सके, आमतौर पर 1 से 5 साल के भीतर) आवेदन कर देना सबसे उचित माना जाता है.
केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के अनुसार अनुकंपा नियुक्ति के आवेदनों के लिए कोई सख्त या अंतिम डेडलाइन तय नहीं है और कई विभागों में पुराने या देरी से आए मामलों पर भी विचार किया जा सकता है. हालांकि, सुप्रीम कोर्ट के कई स्पष्ट फैसलों के अनुसार, यह कोई कानूनी या पक्का अधिकार नहीं है. अगर मृत्यु के बहुत लंबे समय (जैसे 10, 15 या 20 साल) बाद आवेदन किया जाता है, तो अदालतें और विभाग आमतौर पर इसे यह कहकर खारिज कर देते हैं कि परिवार ने या तो गुजारा कर लिया है या अब तात्कालिक आर्थिक संकट की स्थिति नहीं बची है.
अनुकंपा नियुक्ति की मुख्य शर्तें और प्रक्रिया
विभाग यह जांच करता है कि परिवार की वित्तीय स्थिति वास्तव में दयनीय है या नहीं और परिवार के पास आजीविका का कोई अन्य नियमित साधन है या नहीं. आवेदक की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर ग्रुप 'सी' या 'डी' (या समकक्ष) के पदों पर नियमानुसार विचार किया जाता है. सरकारी विभागों में सीधी भर्ती की कुल रिक्तियों का अधिकतम 5% हिस्सा ही अनुकंपा नियुक्तियों के लिए आरक्षित होता है.
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