- हरिद्वार से निकलने वाली गंग नहर को वार्षिक सफाई और मरम्मत के लिए 20 अक्टूबर 2026 से बंद कर दिया गया है.
- नहर बंद रहने की अवधि लगभग 19 से 20 दिन होगी, जो 8 नवंबर 2026 तक चलेगी.
- गंग नहर बंद होने से नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर में पेयजल और सिंचाई प्रभावित हो सकती है.
Ganga Canal Closure Dates: उत्तर प्रदेश और दिल्ली एनसीआर (NCR) के करोड़ों लोगों के लिए बेहद जरूरी खबर है. हरिद्वार से निकलने वाली प्रसिद्ध गंग नहर को उसकी वार्षिक सफाई, सिल्ट निकालने और मरम्मत कार्यों के लिए 20 अक्टूबर 2026 की रात से बंद कर दिया गया है. 19 से 20 दिनों की इस वार्षिक बंदी के कारण नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, मुजफ्फरनगर और बुलंदशहर समेत पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति और सिंचाई पर असर पड़ने की आशंका है.
दरअसल, लगातार पानी बहने की वजह से नहर के तलों में जमी गाद यानी सिल्ट की सफाई और क्षतिग्रस्त तटबंधों की मरम्मत संभव नहीं हो पाती है. इसलिए सिंचाई विभाग की ओर से हर साल 19 से 20 दिनों का यह विशेष मेंटेनेंस ब्रेक लिया जाता है. हरिद्वार के भीमगोडा बैराज से निकलने वाली गंग नहर कानपुर तक लगभग 7,500 किलोमीटर लंबे नेटवर्क के जरिए पेयजल और सिंचाई के लिए पानी की आपूर्ति करती है.
20 अक्टूबर से 8 नवंबर तक बंद रहेगी नहर
गंगनहर मंगलवार रात 20 अक्टूबर 2026 से बंद कर दी गई है और यह 8 नवंबर 2026 तक बंद रहेगी. दिवाली पर्व की मध्य रात्रि से नहर में दोबारा गंगाजल छोड़ दिया जाएगा, जिसके बाद शहरों के वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में आपूर्ति सामान्य हो सकेगी. यूपी सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने बताया कि दशहरे की रात से गंग नहर का पानी रोका गया है. इस दौरान साफ सफाई, सिल्ट निकालने और मेंटेनेंस के काम किए जाएंगे. इसके बाद दिवाली की आधी रात से गंग नहर में फिर पानी छोड़ दिया जाएगा.
नोएडा, गाजियाबाद और मेरठ समेत इन जिलों पर पड़ेगा असर
गंग नहर बंद होने के चलते पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर के नोएडा , ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ , मुजफ्फरनगर, बुलंदशहर और हापुड़ के रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों में पानी की किल्लत हो सकती है. हालांकि, सिद्धार्थ विहार और प्रताप विहार स्थित गंगाजल प्लांट को पानी न मिलने की वजह से स्थानीय नगर निगम और विकास प्राधिकरणों की ओर से ट्यूबवेल और अंडरग्राउंड रिजर्वायर के जरिए वैकल्पिक पेयजल सप्लाई देने की तैयारी की गई है. गंगनहर रोके जाने से शुरुआती दिनों में हरिद्वार स्थित हर की पैड़ी पर गंगाजल का स्तर काफी कम हो जाता है. हालांकि, अधिकारियों ने आश्वासन दिया है कि श्रद्धालुओं के स्नान के लिए न्यूनतम जल स्तर बरकरार रखा जाएगा.
आगामी कुंभ मेले के लिए नए घाटों का होगा निर्माण
इस बार गंगनहर की बंदी का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि हरिद्वार में आयोजित होने वाले आगामी कुंभ मेले की तैयारियां जोरों पर हैं. इस दौरान कुंभ मेले के विशेष बजट से गंग नहर के किनारे लगभग 4.5 किलोमीटर लंबे नए गंगा घाटों का निर्माण किया जा रहा है. पानी का बहाव थमने से नहर के किनारों और घाटों के पक्के निर्माण कार्यों में तेजी आएगी, जिससे कुंभ श्रद्धालुओं को भविष्य में बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं