रिटायरमेंट (Retirement Planning) के बाद की जिंदगी सुकून भरी हो, इसके लिए आज से ही इन्वेस्टमेंट प्लानिंग (Investment ) शुरू कर देना चाहिए. इन्वेस्टमेंट के जरिए हम सभी अपने रिटायरमेंट के लिए अच्छा खासा फंड जुटा लेना चाहते हैं ताकि हमें उस समय आर्थिक तंगी का सामना न करना पड़े. EPF (Employees' Provident Fund) आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प है. यह न सिर्फ सुरक्षित है, बल्कि आपको अच्छा रिटर्न भी देता है.
चाहे आपकी सैलरी कितनी भी कम क्यों न हो, EPF के जरिए आप भी एक मजबूत रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं. आप 10, 000 की बेसिक सैलरी (Basic Salary) से भी अपने लिए मोटा रिटायरमेंट फंड तैयार कर सकते हैं.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
EPFO इन्वेस्टमेंट पर गारंटीड रिटर्न
वैसे तो मार्केट में कई इन्वेस्टमेंट और रिटायरमेंट स्कीम (Retirement Schemes) उपलब्ध हैं, लेकिन कोई भी स्कीम EPFO (Employees' Provident Fund Organisation) के प्रोविडेंट फंड पर मिलने वाली सुविधाओं का मुकाबला नहीं कर पाती है. क्योंकि EPFO की ब्याज दरें न केवल अन्य बचत योजनाओं की तुलना में बेहतर हैं, बल्कि EPFO साल दर साल गारंटीड रिटर्न भी देता है जिससे रिटायरमेंट के लिए आप एक अच्छा खासा फंड जुटा सकते हैं.
हालांकि मार्केट से लिंक्ड ऐसी कई योजनाएं हैं जो EPF की तुलना में ज्यादा रिटर्न दे सकती हैं, लेकिन उनके साथ कई अनिश्चितताएं भी जुड़ी हैं और वो आपके रिटायरमेंट तक बड़ा फंड जुटा लेने की गारंटी नहीं दे सकती हैं.
EPFO स्कीम कर्मचारियों के लिए कैसे काम करती है?
EPFO स्कीम के तहत कंपनी कर्मचारी की बेसिक सैलरी से हर महीने 12% काटती है और कंपनी भी इसमें इतना ही योगदान देती है. कंपनी के कॉन्ट्रीब्यूशन में से 8.33% कर्मचारी की पेंशन स्कीम में जाता है, जबकि 3.67% कर्मचारी के प्रोविडेंट फंड (Provident Fund) में जाता है.
कौन EPF का लाभ उठा सकता है?
EPF का बेनिफिट लेने के लिए, आपको कुछ पात्रता मानदंडों यानी एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करना होता है. 20 या इससे ज्यादा कर्मचारियों वाले फॉर्मल सेक्टर (formal sector) के संगठनों को EPFO के साथ रजिस्टर कराना आवश्यक है. हालांकि, 20 से कम कर्मचारियों वाले संगठन वॉलेंटरी (voluntarily) EPFO में रजिस्टर करा सकते हैं. सभी वेतनभोगी कर्मचारी (Salaried employees) EPF के लिए एलिजिबल होते हैं. खास तौर से, 15,000 रुपये प्रति माह से कम कमाने वाले कर्मचारियों को EPF स्कीम के लिए रजिस्टर करना अनिवार्य है, जबकि 15,000 रुपये से ज्यादा कमाने वाले लोग वॉलेंटरी बेसिस पर EPF स्कीम का विकल्प चुन सकते हैं.
आप EPF कब क्लेम कर सकते हैं?
एक कर्मचारी (Employee) अपने रिटायरमेंट पर या सर्विस छोड़ते समय जमा हुए EPF फंड का इस्तेमाल कर सकता है, बशर्ते वह आवश्यक मानदंडों को पूरा करता हो. कर्मचारी की मृत्यु की स्थिति में, आश्रितों (Dependents) को EPF का बेनिफिट मिलता हैं.
चलिए जानते हैं कि 10,000 रुपये की बेसिक सैलरी से 2 करोड़ रुपये का रिटायरमेंट फंड कैसे बनाया जा सकता है.
मान लीजिए कि एक कर्मचारी 23 साल का है और उसकी 40,000 रुपये की टोटल सैलरी में से बेसिक सैलरी 10,000 रुपये है. EPF की मौजूदा ब्याज दर 8.25% है. कर्मचारी को 60 साल की उम्र तक यानी रिटायरमेंट तक हर साल अपनी सैलरी में 10% बढ़त की उम्मीद है. तो इस लिहाज से अगले 37 सालों में, कर्मचारी EPFO में कितना कंट्रीब्यूट करेगा.
EPFO के नियमों के मुताबिक, कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी का 12% कॉन्ट्रीब्यूट करता है, जो हर महीने 1,200 रुपये होता है. कंपनी भी इतना ही योगदान देती है. कंपनी के 1,200 रुपये के योगदान में से 367 रुपये कर्मचारी के EPF फंड में जोड़े जाएंगे. इस तरह, EPF फंड में टोटल मंथली कॉन्ट्रीब्यूशन 1,567 रुपये का होगा, और यह राशि हर साल 10% बढ़ जाएगी. इसके अलावा, कंपनी के कॉन्ट्रीब्यूशन में से 833 रुपये कर्मचारी की पेंशन स्कीम (employee's Pension Scheme - EPS) में जाता है.
- कर्मचारी की उम्र : 23 साल
- नौकरी के साल: 37 साल (60 साल की उम्र में रिटायरमेंट तक)
- कुल मंथली कंट्रीब्यूशन: 1,200 रुपये (कर्मचारी) + 367 रुपये (कंपनी की ओर से) = 1,567 रुपये
- सालाना वेतन वृद्धि: 10%
- इस हिसाब से 37 सालों में, कुल जमा राशि 68,46,018 रुपये होती है.
- इस राशि पर मिलने वाला कुल ब्याज 1,30,08,857 रुपये होता है.
- इस तरह 37 साल के बाद कुल कॉर्पस या मैच्योरिटी अमाउंट 1,98,54,875 रुपये होगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं