Presiding Officers Conference
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'सदन में आचरण न्यायपूर्ण दिखना भी चाहिए', भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले ओम बिरला
- Monday January 19, 2026
- Reported by: राजीव रंजन, Edited by: शुभम उपाध्याय
ओम बिरला ने कहा, "आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन और भी अधिक आवश्यक हो गया है."
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ndtv.in
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सदन के नियम तोड़ने के कदम का बचाव करना विधायिका के लिए अच्छा नहीं : PM मोदी
- Saturday January 27, 2024
- Reported by: भाषा
PM मोदी ने कहा, ‘‘एक समय था जब सदन में अगर कोई सदस्य नियम तोड़ता था और उस सदस्य के खिलाफ कार्रवाई होती थी तो सदन के वरिष्ठ सदस्य उनसे बात करते थे ताकि भविष्य में वह गलती न दोहराएं और सदन के नियम न तोड़ें.’’
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पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन शिमला में कल से, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत बनाने पर होगी चर्चा
- Monday November 15, 2021
- Reported by: राजीव रंजन
लोकसभा स्पीकर ने बताया कि इसमें राज्य के सभापति, पीठासीन अधिकारी , राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष होते हैं, अलग अलग राज्यों से मिले विचारों पर चर्चा होते हैं. इसके पीछे उद्देश्य यह है कि शासन जिम्मेदार बने, पारदर्शी बने, नई तकनीक से जुड़े. 2001 में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, संसद सदस्य समेत सभी ने हिस्सा लिया.
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'सदन में आचरण न्यायपूर्ण दिखना भी चाहिए', भारतीय पीठासीन अधिकारी सम्मेलन में बोले ओम बिरला
- Monday January 19, 2026
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ओम बिरला ने कहा, "आधुनिक सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी और सोशल मीडिया के युग में जनप्रतिनिधियों के प्रत्येक आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है, इसलिए संसदीय शिष्टाचार और अनुशासन का पालन और भी अधिक आवश्यक हो गया है."
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सदन के नियम तोड़ने के कदम का बचाव करना विधायिका के लिए अच्छा नहीं : PM मोदी
- Saturday January 27, 2024
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PM मोदी ने कहा, ‘‘एक समय था जब सदन में अगर कोई सदस्य नियम तोड़ता था और उस सदस्य के खिलाफ कार्रवाई होती थी तो सदन के वरिष्ठ सदस्य उनसे बात करते थे ताकि भविष्य में वह गलती न दोहराएं और सदन के नियम न तोड़ें.’’
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पीठासीन अधिकारियों का सम्मेलन शिमला में कल से, लोकतांत्रिक व्यवस्था और मजबूत बनाने पर होगी चर्चा
- Monday November 15, 2021
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लोकसभा स्पीकर ने बताया कि इसमें राज्य के सभापति, पीठासीन अधिकारी , राज्यसभा के सभापति और लोकसभा अध्यक्ष होते हैं, अलग अलग राज्यों से मिले विचारों पर चर्चा होते हैं. इसके पीछे उद्देश्य यह है कि शासन जिम्मेदार बने, पारदर्शी बने, नई तकनीक से जुड़े. 2001 में सभी राज्यों के मुख्यमंत्री, संसद सदस्य समेत सभी ने हिस्सा लिया.
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