Naushad Movies
-
{
- सब
- ख़बरें
- वेब स्टोरी
-
पिता की मर्जी के खिलाफ संगीत में बनाया करियर, मुंबई आकर ऐसी बदली किस्मत 75 रुपये कमाने वाले नौशाद की सैलरी सीधे हो गई 25 हजार
- Tuesday May 5, 2026
- Edited by: उर्वशी नौटियाल
नौशाद के पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा संगीत में करियर बनाए क्योंकि उस वक्त इस तरह की करियर चॉइस को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था.
-
ndtv.in
-
लता-किशोर के वो गुरु, जिसने दी गालिब के गजलों को रूह, देवदास से बना सुपरस्टार, पलटा सिनेमा का इतिहास
- Friday February 6, 2026
- Written by: शिखा यादव
टाइपराइटर बेचने से लेकर भारतीय सिनेमा की दिशा बदलने तक, एक ऐसे कलाकार की कहानी जिसने अपनी आवाज से पूरे दौर को अमर कर दिया. लता मंगेशकर और किशोर कुमार जैसे दिग्गज भी इन्हें अपना गुरु मानते थे.
-
ndtv.in
-
इन 5 हिंदी फिल्मों ने 1947 में मचाई थी जबरदस्त धूम, जानें क्यों 'मिर्जा साहिबां' थी नूरजहां की भारत में रिलीज हुई आखिरी फिल्म
- Wednesday March 15, 2023
- Written by: नरेंद्र सैनी
हम आपको 1947 की उन 5 टॉप फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनको दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और जो हिंदी सिनेमा के इतिहास में आज भी याद की जाती हैं.
-
ndtv.in
-
पिता की मर्जी के खिलाफ संगीत में बनाया करियर, मुंबई आकर ऐसी बदली किस्मत 75 रुपये कमाने वाले नौशाद की सैलरी सीधे हो गई 25 हजार
- Tuesday May 5, 2026
- Edited by: उर्वशी नौटियाल
नौशाद के पिता नहीं चाहते थे कि उनका बेटा संगीत में करियर बनाए क्योंकि उस वक्त इस तरह की करियर चॉइस को अच्छी नजर से नहीं देखा जाता था.
-
ndtv.in
-
लता-किशोर के वो गुरु, जिसने दी गालिब के गजलों को रूह, देवदास से बना सुपरस्टार, पलटा सिनेमा का इतिहास
- Friday February 6, 2026
- Written by: शिखा यादव
टाइपराइटर बेचने से लेकर भारतीय सिनेमा की दिशा बदलने तक, एक ऐसे कलाकार की कहानी जिसने अपनी आवाज से पूरे दौर को अमर कर दिया. लता मंगेशकर और किशोर कुमार जैसे दिग्गज भी इन्हें अपना गुरु मानते थे.
-
ndtv.in
-
इन 5 हिंदी फिल्मों ने 1947 में मचाई थी जबरदस्त धूम, जानें क्यों 'मिर्जा साहिबां' थी नूरजहां की भारत में रिलीज हुई आखिरी फिल्म
- Wednesday March 15, 2023
- Written by: नरेंद्र सैनी
हम आपको 1947 की उन 5 टॉप फिल्मों के बारे में बताने जा रहे हैं जिनको दर्शकों का भरपूर प्यार मिला और जो हिंदी सिनेमा के इतिहास में आज भी याद की जाती हैं.
-
ndtv.in