विज्ञापन

Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog

'Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog' - 2 News Result(s)
  • सत्यम शिवम् सुंदरम, कौन हैं श‍िव और शिव सिद्धांत क्या है: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

    सत्यम शिवम् सुंदरम, कौन हैं श‍िव और शिव सिद्धांत क्या है: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

    Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog: केवल एक ही ऐसा कार्य  है जो बार-बार करने से आनंद मिलता है और वह है- ध्यान. यही स्वयं (शिव) के सम्पर्क में होना है - सत्यम शिवम् सुंदरम.

  • Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog : सौंदर्य का अनुभव और जीवन जीने की कला

    Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog : सौंदर्य का अनुभव और जीवन जीने की कला

    Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog: जिस क्षण आप सौंदर्य को ‘अधिकार’ में लेने की कोशिश करते हैं, उसी क्षण आप उसे कुरूप बना देते हैं. आप देखेंगे- सुंदर पत्नी होने पर भी पुरुष बाहर और सुंदरता खोजता रहता है. या स्त्रियाँ ऐसे पुरुषों की तलाश करती हैं जिनके कंधे चौड़े हों, नाक और लंबी हो, जो उनके वर्तमान साथी में नहीं है. इसका अंत कहाँ है? जिस क्षण आप उसे पा लेते हैं, उसका आकर्षण समाप्त हो जाता है. फिर अगली खोज शुरू हो जाती है. पूरा जीवन इसी मृगतृष्णा के पीछे दौड़ बन जाता है,

'Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog' - 2 News Result(s)
  • सत्यम शिवम् सुंदरम, कौन हैं श‍िव और शिव सिद्धांत क्या है: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

    सत्यम शिवम् सुंदरम, कौन हैं श‍िव और शिव सिद्धांत क्या है: गुरुदेव श्री श्री रविशंकर

    Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog: केवल एक ही ऐसा कार्य  है जो बार-बार करने से आनंद मिलता है और वह है- ध्यान. यही स्वयं (शिव) के सम्पर्क में होना है - सत्यम शिवम् सुंदरम.

  • Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog : सौंदर्य का अनुभव और जीवन जीने की कला

    Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog : सौंदर्य का अनुभव और जीवन जीने की कला

    Gurudev Sri Sri Ravi Shankar Blog: जिस क्षण आप सौंदर्य को ‘अधिकार’ में लेने की कोशिश करते हैं, उसी क्षण आप उसे कुरूप बना देते हैं. आप देखेंगे- सुंदर पत्नी होने पर भी पुरुष बाहर और सुंदरता खोजता रहता है. या स्त्रियाँ ऐसे पुरुषों की तलाश करती हैं जिनके कंधे चौड़े हों, नाक और लंबी हो, जो उनके वर्तमान साथी में नहीं है. इसका अंत कहाँ है? जिस क्षण आप उसे पा लेते हैं, उसका आकर्षण समाप्त हो जाता है. फिर अगली खोज शुरू हो जाती है. पूरा जीवन इसी मृगतृष्णा के पीछे दौड़ बन जाता है,