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सबरीमाला केस: धर्म को समाज सुधार के नाम पर खोखला नहीं कर सकते, देवता को मानोगे तो परंपरा भी माननी होगी-सुप्रीम कोर्ट
- Wednesday April 29, 2026
- Reported by: नूपुर डोगरा, Edited by: विश्वनाथ सैनी
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि सुधार के नाम पर धर्म को खत्म नहीं किया जा सकता और श्रद्धालु अपनी मर्जी से धार्मिक परंपराओं को 'पिक एंड चूज' नहीं कर सकते. बेंच ने ऐतिहासिक संदर्भों और धार्मिक स्वायत्तता को बनाए रखने पर जोर दिया है.
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ndtv.in
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सुप्रीम कोर्ट के जज को क्यों याद आए गालिब, क्या दरगाह में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं
- Wednesday April 29, 2026
- Written by: नूपुर डोगरा
सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों सबरीमाला मामले में आए फैसले पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है. यह सुनवाई नौ जजों का एक संविधान पीठ कर रहा है. इस सुनवाई के दौरान मंगलवार को एक जज ने शायर गालिब का एक शेर पढ़ा. ऐसा क्यों हुआ बता रही हैं नूपुर डोगरा.
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ndtv.in
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आवश्यक धार्मिक प्रथाएं तय करना कोर्ट का काम नहीं...सबरीमाला केस में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की SC में दलील
- Friday March 27, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: पीयूष जयजान
बोर्ड ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलीलें दाखिल की हैं. इस मामले की सुनवाई सात अप्रैल से सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ करेगी.
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ndtv.in
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''हिजाब जरूरी धार्मिक परंपरा नहीं'' : कर्नाटक सरकार ने HC में फिर दी दलील
- Monday February 21, 2022
- Reported by: भाषा
हिजाब मामले (Hijab Case) की सुनवाई कर रहे कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High court) की पूर्ण पीठ से राज्य के महाधिवक्ता प्रभुलिंग नावडगी ने कहा, ‘‘हमारा यह रुख है कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक परंपरा नहीं है. डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि ‘हमें अपने धार्मिक निर्देशों को शैक्षणिक संस्थानों के बाहर रख देना चाहिए.''
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सबरीमाला केस: धर्म को समाज सुधार के नाम पर खोखला नहीं कर सकते, देवता को मानोगे तो परंपरा भी माननी होगी-सुप्रीम कोर्ट
- Wednesday April 29, 2026
- Reported by: नूपुर डोगरा, Edited by: विश्वनाथ सैनी
सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर सुप्रीम कोर्ट की 9 जजों की बेंच ने महत्वपूर्ण टिप्पणी की है. कोर्ट ने कहा कि सुधार के नाम पर धर्म को खत्म नहीं किया जा सकता और श्रद्धालु अपनी मर्जी से धार्मिक परंपराओं को 'पिक एंड चूज' नहीं कर सकते. बेंच ने ऐतिहासिक संदर्भों और धार्मिक स्वायत्तता को बनाए रखने पर जोर दिया है.
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सुप्रीम कोर्ट के जज को क्यों याद आए गालिब, क्या दरगाह में महिलाएं प्रवेश नहीं कर सकतीं
- Wednesday April 29, 2026
- Written by: नूपुर डोगरा
सुप्रीम कोर्ट में इन दिनों सबरीमाला मामले में आए फैसले पर दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर सुनवाई चल रही है. यह सुनवाई नौ जजों का एक संविधान पीठ कर रहा है. इस सुनवाई के दौरान मंगलवार को एक जज ने शायर गालिब का एक शेर पढ़ा. ऐसा क्यों हुआ बता रही हैं नूपुर डोगरा.
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आवश्यक धार्मिक प्रथाएं तय करना कोर्ट का काम नहीं...सबरीमाला केस में मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की SC में दलील
- Friday March 27, 2026
- Reported by: आशीष भार्गव, Edited by: पीयूष जयजान
बोर्ड ने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में लिखित दलीलें दाखिल की हैं. इस मामले की सुनवाई सात अप्रैल से सुप्रीम कोर्ट की नौ जजों की संविधान पीठ करेगी.
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''हिजाब जरूरी धार्मिक परंपरा नहीं'' : कर्नाटक सरकार ने HC में फिर दी दलील
- Monday February 21, 2022
- Reported by: भाषा
हिजाब मामले (Hijab Case) की सुनवाई कर रहे कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High court) की पूर्ण पीठ से राज्य के महाधिवक्ता प्रभुलिंग नावडगी ने कहा, ‘‘हमारा यह रुख है कि हिजाब एक आवश्यक धार्मिक परंपरा नहीं है. डॉ. भीमराव आंबेडकर ने संविधान सभा में कहा था कि ‘हमें अपने धार्मिक निर्देशों को शैक्षणिक संस्थानों के बाहर रख देना चाहिए.''
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