Doordarshan News Anchor Sarla Maheshwari
- सब
- ख़बरें
-
सरला माहेश्वरी: गुजराती साड़ी और बड़ी बिंदी वाली भरोसे की आवाज, जिसने भारत को दी थी राजीव गांधी की हत्या की खबर
- Thursday February 12, 2026
- Written by: नरेंद्र सैनी
Sarla Maheshwari Passes Away: सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. जानें क्या था 1980 के दशक का रात साढ़े आठ बजे का जादू और शालीनता और विनम्रता की साक्षात मूर्ति सरला माहेश्वरी की कहानी.
-
ndtv.in
-
दूरदर्शन की मशहूर एंकर सरला माहेश्वरी का निधन, दुखी फैन्स बोले- गोल्डन एरा का अंत
- Thursday February 12, 2026
- Written by: उर्वशी नौटियाल
Doordarshan news anchor Sarla Maheshwari: सरला माहेश्वरी का जाना भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उनके निधन पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी.
-
ndtv.in
-
दूरदर्शन के वो 12 चेहरे जिनके बिना अधूरे थे समाचार, 7वीं वाली की आज भी है जबरदस्त फैन फॉलोइंग
- Monday September 29, 2025
- Edited by: नरेंद्र सैनी
दूरदर्शन का दौर भी क्या दौर था. हर चीज ठहरी हुई और जिंदगी से जुड़ी हुई. ऐसे ही हुआ करते थे दूरदर्शन के समाचार भी. जिसमें न्यूज रीडर सिर्फ दर्शकों को खबरों से रूबरू करवाया करते थे, वो भी बिना किसी शोर-शराबे के.
-
ndtv.in
-
सरला माहेश्वरी: गुजराती साड़ी और बड़ी बिंदी वाली भरोसे की आवाज, जिसने भारत को दी थी राजीव गांधी की हत्या की खबर
- Thursday February 12, 2026
- Written by: नरेंद्र सैनी
Sarla Maheshwari Passes Away: सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है. जानें क्या था 1980 के दशक का रात साढ़े आठ बजे का जादू और शालीनता और विनम्रता की साक्षात मूर्ति सरला माहेश्वरी की कहानी.
-
ndtv.in
-
दूरदर्शन की मशहूर एंकर सरला माहेश्वरी का निधन, दुखी फैन्स बोले- गोल्डन एरा का अंत
- Thursday February 12, 2026
- Written by: उर्वशी नौटियाल
Doordarshan news anchor Sarla Maheshwari: सरला माहेश्वरी का जाना भारतीय टेलीविजन पत्रकारिता के लिए एक अपूरणीय क्षति है. उनके निधन पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें याद किया और श्रद्धांजलि दी.
-
ndtv.in
-
दूरदर्शन के वो 12 चेहरे जिनके बिना अधूरे थे समाचार, 7वीं वाली की आज भी है जबरदस्त फैन फॉलोइंग
- Monday September 29, 2025
- Edited by: नरेंद्र सैनी
दूरदर्शन का दौर भी क्या दौर था. हर चीज ठहरी हुई और जिंदगी से जुड़ी हुई. ऐसे ही हुआ करते थे दूरदर्शन के समाचार भी. जिसमें न्यूज रीडर सिर्फ दर्शकों को खबरों से रूबरू करवाया करते थे, वो भी बिना किसी शोर-शराबे के.
-
ndtv.in